Wednesday, 9 June 2021

चौधरी राकेश सिंह को लेकर कांग्रेस में अंतर्कलह जारी, प्रदेश सचिव नें पूंछा- आखिर क्या है गद्दारी की परिभाषा?



सीधी: मध्यप्रदेश में संगठन की मजबूती के लिये प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में 56 जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति की है। जिसको लेकर अब पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति पैदा हो गई है। सबसे जादा विवाद रीवा जिले की कमान BJP से कांग्रेस में शामिल हुए चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को सौंपनें को लेकर है। चौधरी राकेश सिंह को लेकर पूरे विंध्य क्षेत्र में घमासान मचा हुआ है। पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना की जो व्यक्ति विधानसभा का उपनेता प्रतिपक्ष रहते हुये, चलते सदन में पार्टी को धोखा देकर भाजपा के खेमें मे चला गया हो वह कार्यकर्ताओं को क्या सिखाएगा।


प्रदेश कांग्रेस सचिव नें भी खड़े किये सवाल।

चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को रीवा जिले का प्रभारी नियुक्त किये जाने पर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के आईटी एवं सोशल मीडिया सचिव अरुण सिंह 'चिन्टू' नें सवाल करते हुये कहा- "आखिर क्या है गद्दारी की परिभाषा?? एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसा जाता हैं और उन्हें गद्दार कहा जाता हैं, लेकिन दूसरी तरफ चौधरी राकेश सिंह  को सर आँखों पर बैठाया जा रहा है, जो चलते सदन में विश्वासघात कर भाजपा की गोद बैठ गये थे। यह दोहरा मापदंड क्यूं??"


आइये जानतें हैं, कौन है चौधरी राकेश सिंह और किस समय उन्होनें कांग्रेस छोड़ी थी।

बता दें की ये वही चौधरी राकेश सिंह हैं जिन्होनें वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेेेस द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के बीच भरे सदन में उपनेता प्रतिपक्ष रहते हुये अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान करते हुये अविश्वास प्रस्ताव को गिरा दिया था और भाजपा का दामन थाम लिया था।


आखिर कांग्रेस के लिये क्या है, गद्दारी की परिभाषा।

अपनी गलतियों से ना सीखनें का दूसरा नाम ही मध्यप्रदेश कांग्रेस है। आखिर दलबदलुओं कें नाम पर कांग्रेस क्यूं बंटी हुई है। टीम कमलनाथ एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसते हैं और उन्हें गद्दार कहतें हैं, लेकिन यही टीम कमलनाथ  चौधरी राकेश सिंह एवं नारायण त्रिपाठी जैसे लोंगों को गद्दार नही मानती। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यूं। अभी कुछ दिनों पहले भी कांग्रेस नें एक ऐसा ही फैसला लिया और नाथूराम गोडसे के भक्त बाबूलाल चौरसिया की कांग्रेस में वापसी करायी थी। जिसका पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव नें विरोध किया था।

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