Saturday, 27 March 2021

दमोह उपचुनाव: आखिर क्या है कमलनाथ की रणनीति, दिग्विजय- अजय- अरुण कहां हैं?



दमोह उपचुनाव: मध्यप्रदेश की दमोह विधानसभा सीट उपचुनाव को लेकर अब कांग्रेस के अन्दर असंतोष की खबर है। अभी जो माहौल दिख रहा है उसे देख ऐसा लग रहा की दमोह उपचुनाव की कमान पूर्व सीएम कमलनाथ नें पूरी तरह अपनें हाँथ में ले रखी है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है की दूसरे बड़े नेताओं जैसे की पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव एवं कान्तिलाल भूरिया की भूमिका इस उपचुनाव में क्या होगी।


बता दें की, कांग्रेस उम्मीदवार अजय टंडन ने गुरूवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। कमलनाथ दमोह में थे। इसके बाद भी वे नामांकन पत्र दाखिल कराने उम्मीदवार के साथ नहीं गए। टंडन का नामांकन पत्र दाखिल कराने कुछ स्थानीय नेता ही साथ गए।


दमोह में अजय टंडन को अपनी पसंद और सर्वे के आधार पर कमलनाथ ने ही टिकट दिया है। कमलनाथ, पिछले काफी समय से संगठन के साथ साथ विधायक दल के नेता भी है। उन्होनें सीएम रहते हुये भी पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी नही छोड़ी थी। सीएम की कुर्सी से हटनें के बाद उन्होनें नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी अपनें पास रख ली। ऐसे में अब पार्टी में लगातार असंतोष पनप रहा है।


गौरतलब है की, कमलनाथ के सीएम रहते हुये उनके और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मतभेद इतनें बढ़ गये की, सिंधिया नें कांग्रेस पार्टी छोड दी और अपनें समर्थक विधायकों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। जिसकी वजह से कमलनाथ सरकार गिर गयी। सिंधिया के जानें के बाद कमलनाथ नें कांग्रेस की पूरी कमान अपनें पास रख ली और दिग्विजय सिंह, अजय सिंह, कांतिलाल भूरिया और अरूण यादव जैसे कद्दावर चेहरे हाशिए पर दिखाई दे रहे हैं। दमोह विधानसभा उप चुनाव के लिए आयोजित की गई पहली सभा के मंच पर कांग्रेस एकजुट होने का संदेश नहीं दे पाई। कमलनाथ के अलावा कार्यक्रम में कोई दूसरा बड़ा नेता मौजूद नहीं था।  


कमलनाथ के दोनों बड़े पद अपनें पास रखनें से फैल रहा असंतोष।

कमलनाथ का एक साथ पार्टी अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष जैसे दोनों महत्वपूर्ण पद अपनें पास रखनें के कारण कांग्रेस की राजनीति में असंतोष बढ़ता जा रहा है। अभी हाल में ही गोडसे भक्त बाबूलाल चौरसिया के कांग्रेस में प्रवेश को लेकर काफी हंगामा मचा था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने तो तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि बापू हम शर्मिंदा हैं। इस मुद्दे को लेकर एक अन्य नेता माणक अग्रवाल को पार्टी से ही बाहर निकाल दिया गया।


अजय सिंह के निवास पर भी पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस के दिग्गजों एवं विधायकों का लग रहा जमावड़ा।

मध्यप्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी दमोह उपचुनाव को लेकर अभी तक सक्रिय नही हुये हैं। जिसको लेकर सवाल खड़े हो रहें हैं। हालांकि दमोह उपचुनाव की घोषणा के पहले अजय सिंह नें दमोह के पूर्व भाजपा विधायक एवं पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया से मुलाकात की थी, जिसको लेकर कई तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे थे। इसी बीच पिछले कुछ दिनों से अजय सिंह के भोपाल स्थित आवास C 19 पर कांग्रेस विधायकों एवं दिग्गजों का जमावड़ा लगना चालू हो गया है, जिसको लेकर भी राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई है।


क्या होगी दिग्विजय सिंह की भूमिका।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नब्ज समझने वाले दिग्विजय सिंह अकेले नेता हैं। विधानसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह को नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी थीं। दिग्विजय सिंह राज्य के दस साल मुख्यमंत्री रहे हैं। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई। पार्टी की हार के बाद दिग्विजय सिंह ने अपनी घोषणा के अनुसार पार्टी में दस साल तक कोई पद नहीं लिया और चुनाव भी नहीं लड़ा। लेकिन 2018 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस के मैदानी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में दिग्विजय सिंह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही थी। कांग्रेस की सत्ता में वापसी भी हो गयी। लेकिन 15 महीनें में ही कांग्रेस की सरकार गिर गयी। सरकार गिरनें के बाद पिछले 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में दिग्विजय सिंह मुख्य भूमिका में दिखाई नहीं दिए थे। अब यह देखना दिलचस्प होगा की दमोह उपचुनाव में उनकी क्या भूमिका रहेगी।

No comments:

Post a comment

Latest Post

सीधी: कोरोना ने तोड़ा अब तक का रिकॉर्ड, पहली बार मिले 231 कोरोना संक्रमित।

सीधी: जिले में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है, कोरोना संक्रमितों के सारे पुराने रिकार्ड ध्वस्त हो रहें हैं। सीधी में पिछले 24 घंटो...