Wednesday, 31 March 2021

दमोह उपचुनाव: चलते विधानसभा सत्र में पार्टी से इस्तीफा देनें वाले राकेश सिंह को कांग्रेस नें बनाया स्टार प्रचारक।



भोपाल: मध्यप्रदेश के दमोह विधानसभा में होने वाले उपचुनाव के लिये कांग्रेस नें अपनें स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ  दिग्विजय सिंह एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह समेत कांग्रेस के कई युवा विधायकों को भी जगह दी गई है। साथ ही कांग्रेस नें चौधरी राकेश सिंह को भी स्टार प्रचारकों की लिस्ट में जगह दी है। बता दें की ये वही चौधरी राकेश सिंह हैं जिन्होनें वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेेेस द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के बीच भरे सदन में उपनेता प्रतिपक्ष रहते हुये अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान करते हुये अविश्वास प्रस्ताव को गिरा दिया था और भाजपा का दामन थाम लिया था।


आइये जानतें हैं, कौन है चौधरी राकेश सिंह और किस समय उन्होनें कांग्रेस छोड़ी थी।
वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ तत्कालीन नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था उस दौरान चलते विधानसभा सत्र में उपनेता रहे चौधरी राकेश ने कह दिया था कि वे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करते हैं। इस तरह कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था, और राकेश ने भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके छोटे भाई मुकेश चौधरी को मेहगांव से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए थे। 2018 में फिर भाजपा ने राकेश को भिंड से टिकट दिया जहां से वे हार गए थे उसके बाद से ही वे कांग्रेस में आने के लिए प्रयासरत थे।



सिंधिया समर्थक मानें वाले चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया की वजह से फिर से कांग्रेस में हुई थी वापसी।
मध्यप्रदेश के इतिहास में यह एकमात्र घटनाक्रम है जब विधानसभा सत्र के बीच उपनेता प्रतिपक्ष ने अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया हो। चौधरी राकेश सिंह ने कांग्रेस को यह झटका दिया था। लेकिन जब भाजपा में उनकी दाल नही गली तो वो वापस कांग्रेस में लौट आए। गौरतलब है की, चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया समर्थक नेता माना जाता है। एक बार फिर उन्होंने शिवपुरी में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब लोकसभा का नामांकन भरा था तब चौधरी राकेश भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे।


आखिर कांग्रेस के लिये क्या है, गद्दारी की परिभाषा।
अपनी गलतियों से ना सीखनें का दूसरा नाम ही मध्यप्रदेश कांग्रेस है। आखिर दलबदलुओं कें नाम पर कांग्रेस क्यूं बंटी हुई है। टीम कमलनाथ एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसते हैं और उन्हें गद्दार कहतें हैं, लेकिन यही टीम कमलनाथ  चौधरी राकेश सिंह एवं नारायण त्रिपाठी जैसे लोंगों को गद्दार नही मानती। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यूं। अभी कुछ दिनों पहले भी कांग्रेस नें एक ऐसा ही फैसला लिया और नाथूराम गोडसे के भक्त बाबूलाल चौरसिया की कांग्रेस में वापसी करायी थी। जिसका पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव नें विरोध किया था।

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