Sunday, 21 February 2021

भजापा नेतृत्व द्वारा सीधी विधायक की बार बार उपेक्षा की वजह, कहीं आपसी गुटबाजी तो नहीं।



सीधी: आखिरकार मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के लिये भाजपा नें अपना उम्मीदवार तय कर दिया। भाजपा की तरफ गिरीश गौतम नें आज अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है। गिरीश गौतम के नामांकन के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष के प्रबल दावेदार मानें जा रहे सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला अब रेस से पूरी तरह बाहर हो गये हैं। विधानसभा अध्यक्ष का पद ना मिलनें पर केदारनाथ शुक्ला का दर्द भी छलका है और उन्होंन कहा की, मुझे भी पद से मोह है, मै नेता हूं, संन्यासी नही। साथ ही उहोनें कहा की कांग्रेस नें हमेशा ही सीधी का ध्यान रखा है लेकिन भाजपा में सीधी की उपेक्षा हो रही हैं।


अब सवाल यह उठ खड़ा होता है की केदारनाथ जैसे वरिष्ठ और काबिल नेता की उपेक्षा आखिर भाजपा नेतृत्व बार बार क्यों कर रहा है। जैसा की विदित है की सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला अपनें बेबाक राय और बोल के लिये जानें जाते हैं और वो अपनी पार्टी के खिलाफ भी बोलतें रहें है, ऐसे में कुछ ऐसे तथ्य हैं जो हमेशा उनके खिलाफ जाते हैं ।


सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला के सीधी सांसद रीति पाठक से मतभेद।

सीधी से भोपाल तक सीधी विधायक एवं सांसद की आपसी तकरार के बारें में सब को पता है। दरअसल सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला और सांसद रीति पाठक के रिश्ते बिल्कुल समान्य नही है, और दोनों एक दूसरे के बारे मे मीडिया में भी बयानवाजी करनें से पीछे नही हटते। हालत तो यहां तक पहुंच गये थे की सीधी विधायक द्वारा सीधी सांसद पर व्यक्तिगत छींटाकशी की गयी थी, जिसके जवाब में सांसद रीति पाठक ने, सीधी विधायक के मानसिक स्थिति पर ही सवालिया निशान लगा दिया था, और शिवराज सिंह को बीच बचाव करना पड़ा था।


सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला द्वारा पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह के खिलाफ की गई टिप्पणी।

झाबुआ उपचुनाव हारने के बाद  भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सीधी से विधायक केदारनाथ शुक्ला ने अपनी ही पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की काबिलियत पर सवालिया निशान लगाते हुए यह तक कह डाला था कि उन्हीं के असक्षम नेतृत्व के चलते पार्टी चुनाव हारी है ।शुक्ल ने यहां तक कह दिया कि  राकेश सिंह के नेतृत्व में पार्टी चौपट हो रही है और उन्हें जल्द पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना चाहिए। केदारनाथ शुक्ला का इतना बोलते ही पार्टी में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पार्टी नें केदारनाथ शुक्ल की इस बयान बाजी को अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया था।  साथ ही सीधी सांसद रीति पाठक प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के खेमे की मानी जाती है, और उस समय सीधी विधायक के खिलाफ इतनी जल्दी कार्यवाही किये जानें के पीछे सीधी भाजपा की आपसी गुटवाजी भी वजह बनी थी।

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