Monday, 22 February 2021

निर्विरोध स्पीकर चुने गए गिरीश गौतम, जानें- कैसा रहा गौतम का सियासी सफर।



भोपाल: रीवा के देवतालाब विधानसभा से भाजपा विधायक गिरीश गौतम को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए  नि​र्विरोध चुन लिया गया है। आज से शुरू हो रहे बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष पद के लिये कांग्रेस द्वारा कोई उम्मीदवार ना उतारनें से गिरीश गौतम नि​र्विरोध चुनें गये। इसके साथ करीब 17 साल बाद एक बार फिर विधानसभा का अध्यक्ष विंध्य क्षेत्र से मिला है।  गिरीश गौतम विंध्य क्षेत्र में अपने सरल एवं सहज स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं। गौतम को 18 वर्ष बाद किसी बड़े पद से नवाजा गया है।


छात्र जीवन से ही शुरू किया था अपना सियासी सफर।

गिरीश गौतम ने अपनी​ सियासी पारी 1977 में छात्र राजनीति शुरू की। फिर वह 2003 से 2018 तक लगातार चौथी बार दो अलग-अलग सीटों से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने 1993 व 98 सीपीआई से विधानसभा का चुनाव लड़ा। तब गिरीश गौतम को कांग्रेस पार्टी के दिग्गज व विंध्य के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी से शिकस्त का सामना करना पड़ा था। लेकिन वर्ष 2003 में भाजपा के टिकट पर मनगवां विधानसभा से चुनाव लड़े और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी को शिकस्त दी। साल 2008 में मनगवां विधानसभा सीट आरक्षित होने पर भाजपा ने गौतम को पड़ोसी सीट देवतलाब भेजा, जहां से वह 2008, 2013 व 2018 में लगातार जीत दर्ज विधानसभा पहुंचते रहे।


श्रीनिवास तिवारी को हराने से गिरीश गौतम को मिली एक अलग पहचान।

दरअसल, गिरीश गौतम से पहले विंध्य अंचल से आने वाले कद्दावर नेता श्रीनिवास तिवारी 10 साल विधानसभा अध्यक्ष के पद पर रहे। 2003 के विधानसभा चुनाव में गिरीश गौतम ने अजेय कहे जाने वाले श्रीनिवास तिवारी के वर्चस्व को खत्म करते हुए मनगंवा सीट से जीत हासिल की थी, जिसके बाद गौतम को एक अलग पहचान मिली। अब यह एक अजब संगोय है कि अब विधानसभा अध्यक्ष के पद पर गिरीश गौतम की ताजपोशी हुई है।


2003 के विधानसभा चुनाव ने बदल दिया था विंध्य के सियासत का समीकरण।

गौरतलब है की, सफेद टाइगर के नाम से मशहूर नेता श्रीनिवास तिवारी 2003 में रीवा जिले की मनगंवा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे, वे विंध्य के ऐसे नेता थे, जिनको लेकर उनके समर्थकों ने बघेली में एक नारा बनाया था. ''दादा नहीं दऊ आंय, वोट न देवे तऊ आंय'' मतलब दादा को अगर वोट नहीं भी दिया जाएगा तो भी वे चुनाव जीतेंगे। इसी नारे के साथ उनके समर्थक 2003 के विधानसभा चुनाव में श्रीनिवास तिवारी का प्रचार कर रहे थे। लेकिन जब 2003 के विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो मध्य प्रदेश में 10 साल से जमी कांग्रेस की सत्ता ही नहीं गई, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष और विंध्य के टाइगर कहे जाने वाले श्रीनिवास तिवारी भी चुनाव हार गए। गिरीश गौतम ने एक दिग्गज नेता को चुनाव हराया था। गिरीश गौतम इसके बाद वह 2008, 2013 और 2018 में देवतालाब से विधायक बने। ऐसे में अब बीजेपी उन्हें विधानसभा अध्यक्ष के रूप में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

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