Wednesday, 24 February 2021

26 और 27 फरवरी को नहीं चलेगीं बसें, सीधी हादसे के बाद की जा रही कार्रवाई से संचालक नाराज।



भोपाल: मध्यप्रदेश के सीधी जिले में 16 फ़रवरी को एक बस के नहर में डूब जानें से उसमें सवार 54 लोगों की मृत्यु हो गयी थी। जिसे देखते हुए  परिवहन विभाग सख्त हो गया है। परिवहन विभाग ने सभी बसों की चेकिंग के लिए जगह-जगह चेकिंग पॉइंट बना दिए है, जहां बसों की जांच की जा रही है। अगर बस में डबल डोर नहीं या फिटनेस नहीं है तो बसों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है।


परिवहन विभाग द्वारा सख्ती और चालानी कार्रवाई को लेकर मध्यप्रदेश के बस संचालक दो दिन 26 और 27 फरवरी को हड़ताल पर रहेंगे। बस संचालकों का कहना है कि सीधी हादसे के बाद भोपाल सहित प्रदेश में चल रही परिवहन विभाग की चेकिंग की एकतरफा कार्रवाई के चलते बस संचालकों ने 2 दिनों तक बसों को बंद करने का निर्णय लिया है। जिसमें प्रदेश भर की करीब 20,000 बसों का संचालन नहीं होगा।

बस ऑपरेटर एसोसिएशन नें कहा- सस्ता टिकट, महंगा डीजल।
वहीं जबलपुर में हुई बस ऑपरेटर एसोसिएशन की लगातार बैठकों का दौर जारी है। जिसमें सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी की जा रही है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि मध्यप्रदेश में जब 58 रुपए प्रति लीटर डीजल बिक रहा था, तब बसों का किराया निर्धारित किया गया था। लेकिन आज मध्य प्रदेश में 90 रुपए लीटर डीजल बिक रहा है, लेकिन किराया हम पुरानी दरों पर ही वसूल कर रहे हैं। ऐसे हालातों में बस संचालकों के लिए अपनी बसों को चलाना बेहद मुश्किल हो गया है इसके पहले जब बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने सरकार से बातचीत की थी तो अपनी मांग रखी थी कि मध्यप्रदेश में बसों के किराए में कम से कम 50 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा किया जाए। तब सरकार ने उनकी इस मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया था लेकिन बसों का किराया नहीं बढ़ाया गया।

बैठक में कहा- सीधी बस हादसे के लिए प्रशासन जिम्मेदार।
बस संचालकों का कहना है कि सीधी बस हादसा पूरी तरह सतना और सीधी के जिला प्रशासन और पुलिस की अनदेखी का नतीजा था। यदि सतना में परीक्षा थी तो जिला कलेक्टर को मालूम होना चाहिए था कि इस मार्ग पर कितनी बसें संचालित हैं और आसपास के जिलों का एकमात्र सेंटर सतना है। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। दूसरा कारण यह था कि सीधी में एक सड़क बहुत खराब थी। इसके बाद भी वहां पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं थी, जो ट्रैफिक को नियंत्रित कर सके।एसोसिएशन ने कहा है कि सीधी बस हादसे की सजा हमें दी जा रही है जबकि इस हादसे के पीछे प्रशासन जिम्मेदार है।प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए हमें निशाना बना रहा है।  

आरटीओ 2-2 मिनट पर दे रहे परमिट, किसी मार्ग पर फ्रीक्वेंसी तय नहीं।
संचालकों ने कहा कि सरकार 10 साल में किसी भी मार्ग पर फ्रीक्वेंसी तय नहीं कर पाई है। आरटीओ असफर दो-दो मिनट के अंतराल पर परमिट जारी कर रहे है। बस स्टैंड पर अराजक तत्व बस संचालकों से वसूली करते हैं। बस स्टैंड पर समय पर पहुंचना और दो गाड़ियों के बीच कम अंतराल होने से स्पर्धा दुर्घटनाओं की वजह है। राजस्व और भ्रष्टाचार दोनों के कारण सरकार परमिट पर रोक नहीं लगा रही है।

संचालक बोले- सरकार का यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं।
बस संचालकों का कहना है कि अधिकारियों को यात्रियों की सुरक्षा की तरफ ध्यान नहीं है। चार्टर्ड और सूत्र सेवा बसों में डबल गेट नहीं है। इमरजेंसी गेट भी नहीं है। चार्टर्ड बसें एयर कंडीशन होती हैं, उनके पलटने पर तुरंत आग लग सकती है। इसके बाद भी ऐसी बसों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

1 मार्च से बड़ी हड़ताल की चेतावनी।
बस ऑपरेटर एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि अगर सरकार ने बसों का किराया बढ़ाने की मांग पूरी नहीं की तो आने वाली 1 मार्च से मध्यप्रदेश में बसों के पहिए जाम कर दिए जाएंगे और प्रदेश भर में बस संचालक हड़ताल पर चले जाएंगे।

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