Tuesday, 12 January 2021

भाजपा की मानसिकता में खोट, अंग्रेजों ने बांटकर और भाजपा ने गरीब बनाकर हुकूमत चलाई: अजय।



  • किसान अपनों से ही आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ रहे हैं: अजय सिंह।
  • देश भाजपा के षड्यंत्र को नहीं समझेगा तो हम दूसरी गुलामी की ओर बढ़ते जाएँगे: अजय सिंह।                

रीवा: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आज रीवा में किसान कानून के विरोध में किसान महापंचायत में कहा कि धिक्कार है ऐसी मोदी सरकार को कि सुप्रीम कोर्ट को फैसला लेना पड़ा कि फिलहाल कृषि कानून लागू नहीं होगा। लोकसभा और राज्यसभा में बिना चर्चा के यह कानून बना। यह कोई साधारण बात नहीं है कि 50 दिनों से देश का अन्नदाता दिल्ली में पड़ा है। हमारे पूर्वजों ने पहले अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई लड़ी। अब यह दूसरी आजादी की लड़ाई है जो किसान लड़ रहे हैं, वह भी अपनों से।


अजय सिंह ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार को आर.एस.एस. चला रहा है। भाजपा की मानसिकता में खोट है। जिस तरह अंग्रेजों ने लोगों को बांटकर हुकूमत चलाई उसी तरह भाजपा लोगों को आर्थिक रूप से तोड़कर विपन्न बनाना चाहती है। इसके पीछे उनकी सोच है कि जब देश के 95 प्रतिशत लोग गरीब हो जाएँगे, तब हम हुकूमत चला सकते हैं। आर्थिक तंत्र पर चोट करने के लिए अब भाजपा के सामने एक ही वर्ग है और वह है इस देश का किसान और मजदूर। उन्होंने कहा कि जब तक हम लोग भाजपा के कुचक्र और षड्यंत्र को नहीं समझेंगे तब तक दूसरी गुलामी के रास्ते पर बढ़ते जाएँगे।


श्री सिंह ने कहा कि अब सभी को लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना है। नोटबंदी करके मोदी ने हमारी माता बहनों को सबसे पहले आर्थिक रूप से कमजोर किया। वर्षों से उनकी जमा पूंजी उजागर करके खर्च करवा दी। दो करोड़ लोगों को हर साल रोजगार देने का झूठ बोला। सबकी जेब में 15-15 लाख देने का लालच देकर इस देश की तमाम जनता को ठगा। यह बात सबने स्वयं महसूस की है। अब किसानों की बरबादी के तीन काले कानून लाये हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब 1965 में दाऊ साहब कृषि मंत्री थे तब जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से सोयाबीन लगाने का काम शुरु हुआ था। रुचि सोया के मालिक कैलाश सहारा ने साइकिल पर घूम घूम कर सोयाबीन का महत्व बताते हुये प्रचार किया और बीज बांटा। फिर रुचि सोया तेल प्लांट लगाया। आज सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण करोड़ों का प्लांट कौड़ियों के मोल बिक गया। यह तो केवल एक उदाहरण है ऐसे बहुत सारे मामले हैं।


अजय सिंह ने कहा कि मोदी ने अपने मित्र ट्रंप को यदि भारत न बुलाया होता तो कोरोना इतना ज्यादा न फैलता। उनकी यात्रा होने और मध्यप्रदेश की सरकार गिराने तक लॉकडाउन नहीं लगाया। और फिर अचानक लॉकडाउन लगा दिया। लाखों मजदूर सैंकड़ों मील चलकर अपने अपने गाँव पहुंचे। यही घोषणा वे पहले कर देते कि सात दिन बाद लॉकडाउन लगेगा और बसें- ट्रेनें बंद रहेंगी, तो सारे मजदूर कम से कम एक हफ्ते में बसों और ट्रेनों से अपने अपने घर पहुँच जाते। देश के मजदूर पैदल भागते रहे लेकिन मोदी की आँख से गरीबों के लिए एक आँसू नहीं गिरा। पाक प्रधानमंत्री की माताजी के निधन पर वे शोक संदेश भेजते हैं लेकिन दिल्ली में दर्जनों किसानों की मृत्यु पर संवेदना का एक शब्द नहीं बोलते। लानत है ऐसी मानसिकता पर। अब मकर संक्रांति आने वाली है। सूर्य की दिशा बदलेगी। मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि उसी के साथ लंबी दाढ़ी वाले मोदीजी की सोच भी बदले।

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