Sunday, 18 October 2020

गद्दारी की पारिवारिक परंपरा के चलते, सिंधिया सरकार गिराने का मोहरा बने: अजय।



  • शिवराज सिंह को लगा कि कमलनाथ कुछ दिन और रह गए तो हमारा नंबर नहीं लगेगा: अजय सिंह।
  • तीन तारीख को जनता इमरती की जलेबी बनाएगी: अजय सिंह।

भोपाल: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने गोहद और डबरा की चुनावी सभाओं में कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया तो गद्दारी की पारिवारिक परंपरा के कारण सरकार गिराने का मोहरा बने। भाजपा के लिए वे केवल एक बहाना थे। यह पोल तो शिवराजसिंह ने स्वयं खोल दी जब उन्होंने बताया कि मैंने ही कहा था "गिर्राज दंडोतिया कहाँ फंसे हो, रणवीर जाटव कहाँ भटक गए। भाजपा में आ जाओ, चलो कमलनाथ सरकार गिराते हैं। "  


अजय सिंह ने कहा कि शिवराजसिंह कमलनाथ से काफी डर गए थे। छिंदवाड़ा माडल की तर्ज पर कमलनाथ मध्यप्रदेश का एक नया स्वरूप बनाना चाहते थे, जहां लोगों को प्रदेश में ही रोजगार मिले। मजदूरों को बंबई, सूरत, अहमदाबाद जाकर ठोकर न खाना पड़े। हर दो तीन जिलों के बीच बड़े बड़े कारखाने लगें। उनका एक सपना था कि खेती को लाभ का धंधा बनाएँ। माफियाओं के खिलाफ जबर्दस्त अभियान की शुरुआत हुई। यह देखकर शिवराजसिंह को लगा कि यदि कमलनाथ कुछ दिन और रह गए तो हमारा नंबर नहीं लगने वाला। तब उन्होंने सिंधिया को लेकर बिकाऊ और लोभियों के साथ कांग्रेस सरकार गिरा दी।


श्री सिंह ने कहा कि प्रजातन्त्र में यह घटना फिर से हो गई तो जनता के वोट का कोई महत्व नहीं रह जाएगा । बिकाऊ यदि चुनाव जीतेगा तो वह विधायक जनता की सेवा नहीं, खुद की ही सेवा करेगा। जितने भी बिके लोग हैं, वे अपने करोड़ों रुपए ठिकाने लगाने के रास्ते खोज रहे है। भोपाल में मंहगे से मंहगा प्लाट खरीद रहे हैं। अभी अखबार में नरोत्तम मिश्रा के आगे नतमस्तक होते हुये इमरती देवी की फोटो छपी थी। आप सभी जानते हैं कि डबरा शक्कर फैक्ट्री किस के कारण बंद हुई और उसकी कीमती जमीन पर किसका कब्जा है। जनता तीन तारीख को इमरती की जलेबी बना देगी। जलेबी देवी के पास जब कोई मतदाता अपना काम लेकर जाता है तो उनका सीधा जवाब होता है कि पहले मोहनसिंह से हिसाब किताब कर लो।


अजय सिंह ने कहा कि शिवराजसिंह का खोया हुआ दिमागी संतुलन भाषणों में दिखाई देने लगा है। उनके दिमाग का जीभ के साथ तालमेल खत्म हो चुका है। उनके मंत्री गोपाल भार्गव कहते हैं कि बड़ा मलहरा में विधायक आलोक चतुर्वेदी वोट कैप्चर कर रहा है। शिवराज कल को यहाँ आकर कहेंगे कि गोविंद सिंह जी को जेल भेज देंगे। क्या प्रजातन्त्र यही सिखाता है। क्या वोट इसी तरह मांगे जाते हैं। मैं भी छ्ह बार का विधायक हूँ। जो हमारे खिलाफ चुनाव लड़ा उससे कभी कटुता नहीं रही। आज भी घरेलू संबंध हैं। पहली बार पैसे के बल पर चुनाव देख रहा हूँ, ऊपर से डंडे का राज। यदि सभी युवा साथी और माता बहनें अच्छा प्रदेश और परिवेश चाहते हैं तो यह मौका आपको अगली तीन तारीख को मिलेगा। आपको बता देना है कि " न जात पर न पाँत पर, कमलनाथ की बात पर, मोहर लगेगी हाथ पर।


श्री सिंह ने कहा कि कमलनाथ भावी मुख्यमंत्री हैं। मैं उन्हें तब से जानता हूँ जब 1976 में दिल्ली कालेज से पढ़ाई करके निकला था और संजय गांधी जी से जुड़ा था। उन्होंने 1977 से 1980 के बीच आंदोलनों के समय संजय गांधी के साथ डंडे खाये हैं। इंदिराजी उन्हें अपना तीसरा बेटा मानती थीं। कमलनाथजी ने मेरे पिता स्व॰ अर्जुन सिंह जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राजनीति की है। कमलनाथ को पहला मौका मिला था प्रदेश की तस्वीर बदलने का, उसे सँवारने का। यह सिंधिया की महत्वाकांक्षा के कारण चला गया। उन्होंने कहा कि मुझे किसी ने बताया कि सूची निकाल लीजिये कि सिंधिया घराने में जिन राजाओं के नाम 'एम' से शुरू होते हैं वे कल्याणकारी राजा हुये और जिनके नाम 'जे' से शुरू होते हैं वे अय्याश और बिकाऊ माल साबित हुये।

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