Tuesday, 20 October 2020

अजय सिंह द्वारा लोकयुक्त से मिलकर सिंधिया- शिवराज सहित अन्य BJP नेताओं के विरुद्ध कार्यवाही की मांग, जानिये क्या है मामला?


  • सिंधिया, शिवराज, नरोत्तम, भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, उमाशंकर, सारंग सहित 25 पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कार्यवाही की जाये: अजय सिंह।
  • उन्होंने लोकसेवक पद का दुरुपयोग और लोक कर्तव्य में बेईमानी की है: अजय सिंह।
  • चुनाव में होने वाला करोड़ों का खर्च भाजपा उम्मीदवारों से वसूला जाये: अजय सिंह।

भोपाल: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आज सुबह लोकयुक्त से मिलकर ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, उमाशंकर  गुप्ता और विश्वास सारंग के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही करने के लिए शपथ पत्र सहित शिकायती पत्र दिया है। पत्र में लिखा है कि इन सभी ने अपने लोकसेवक होने का दुरुपयोग किया है। उन्होंने लोक कर्तव्य का पालन नहीं किया है। यह कृत्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा सात के अंतर्गत अपराध है। साथ ही धारा आठ के अंतर्गत दंडनीय है। इसमें सात वर्ष का कारावास और जुर्माना दोनों लगाया जा सकता है।

 

अजय सिंह ने लिखा है कि इन सभी ने कांग्रेस के 22 पूर्व विधायकों को पद देने का प्रलोभन देकर बदले में कांग्रेस के नेतृत्व में चुनी हुई सरकार गिराने का कृत्य किया है। अखबारों में प्रकाशित खबरों और आम चर्चा के अनुसार उन्हें प्रलोभन दिया गया कि सभी को न केवल भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ाया जाएगा बल्कि 12 लोगों को मंत्री भी बनाया जाएगा।  विभाग भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की इच्छा से दिये जाएँगे, साथ ही कुछ राशि भी दी जाएगी।


श्री सिंह ने लिखा है कि योजनाबद्ध तरीके से 22 विधायकों को बेंगलोर ले जाकर प्रेस्टीज़ गोल्फ लिंक रिसार्ट में रखा गया। किसी से मिलने नहीं दिया गया और फोन जब्त कर लिए गए। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में भाजपा शासन है। सभी के स्तीफ़े भूपेंद्र सिंह के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष को भिजवाए गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जब उनसे मिलने गए तो पुलिस प्रशासन ने अंदर नहीं जाने दिया। प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि ये सभी विधायक, ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा नेता सरकार गिराने का षड्यंत्र कर रहे थे। जो कांग्रेस सरकार गिरने पर सिद्ध हो गया।


अजय सिंह ने लिखा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि वादे के अनुसार 14 ऐसे व्यक्तियों को जो विधायक नहीं थे, मंत्री बना दिया गया। ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा से राजयसभा सदस्य चुने गए। उन्हें केंद्र में मंत्री पद से नवाजे जाने की पूरी संभावना है। उपचुनाव में स्तीफ़ा देने वाले सभी लोगों को भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, हरदीप सिंह, राज्यवर्धन सिंह, बृजेन्द्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, ओ॰पी॰एस॰ भदौरिया, गिर्राज दंडोतिया, एदल सिंह कंसाना और बिसाहू लाल सिंह ने सरकार गिराने के प्रतिफल के रूप में मंत्री पद प्राप्त किया। जाहिर है  सभी ने लोक कर्तव्य का पालन अनुचित रूप से और बेईमानी से किया। इस तरह उन्होने षड्यंत्र सिद्ध कर दिया।  


श्री सिंह ने अगली वस्तुस्थिति बताते हुये लिखा है कि विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी को शिवराज सिंह चौहान ने लालच दिया और उनसे स्तीफ़ा दिलाकर तत्काल नागरिक आपूर्ति निगम का चेयरमेन बना दिया। इसके बाद नारायण पटेल और सुमित्रा देवी कासडकर के भी स्तीफ़े दिलाये गए जो कांग्रेस के विधायक थे। मंत्री बनाए गए लोगों के अलावा स्तीफ़ा देने वाले लोगों में मनोज चौधरी, जसपाल सिंह जज्जी, जसवंत जाटव, संतराम सिरोनिया, मुन्नालाल गोयल, रणवीर सिंह जाटव, कमलेश जाटव और रघुराज कंसाना भी शामिल थे। अजय सिंह ने लिखा है कि कांग्रेस के 25 पूर्व विधायकों के स्तीफ़ा देने के कारण उपचुनाव हो रहे हैं जिसके लिए ये सभी जिम्मेदार हैं। अकारण चुनाव थोपे जाने के फलस्वरूप करोड़ों रुपयों के शासकीय धन का जो अपव्यय हो रहा है, वह इन सभी से वसूला जाये।


सिंह ने लिखा है कि षड्यंत्र में शामिल सभी लोग अंतत: विगत 20 मार्च को चुनी हुई कमलनाथ सरकार गिराने में सफल रहे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्तीफ़ा दिया। ताबड़तोड़ 23 मार्च को शिवराज सिंह को शपथ दिलाई गई और फिर पूरे भारत में 25 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई। संभवत: लॉकडाउन लगाने में विलंब इसलिए किया गया क्योंकि भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस सरकार गिराना थी। सरकार गिरने के बाद जो घटनाक्रम हुआ उससे प्रकाशित खबरें और आम चर्चा सच साबित हुई।


श्री सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या करते हुये लिखा है कि धारा सात के अंतर्गत यदि कोई लोक सेवक लाभ के पद के लिए लोक कर्तव्य का पालन अनुचित रूप से और बेईमानी से करता है या करवाता है तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा कृत्य करने के लिए यदि वह कोई इनाम लेता है या लाभ की प्रत्याशा में लोक कर्तव्य का निर्वहन नहीं करता है तो इस अपराध के लिए कम से कम तीन साल से सात साल तक का कारावास और जुर्माने का भागी होगा। लोक कर्तव्य में बेईमानी के लिए प्रेरित करने वाले पर भी यही सजायेँ लागू होती हैं। इन प्रावधानों से स्पष्ट है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिलकर शिवराजसिंह चौहान, नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, उमाशंकर गुप्ता, सुदर्शन गुप्ता और विश्वास सारंग ने षड्यंत्र पूर्वक कांग्रेस सरकार गिरायी है। अपने लोक सेवक होने का दुरुपयोग किया है। लोक कर्तव्य का पालन नहीं किया है जो कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अपराध है।

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