Thursday, 10 September 2020

वेयर हाउस मालिकों को एनपीए से बचाने, लंबित किराया तत्काल दिया जाये: अजय सिंह।


  • सुखात छूट दो प्रतिशत से बढ़ाकर छ: प्रतिशत की जाये: अजय सिंह।
  • भंडारण के कूटरचित आदेश को तत्काल निरस्त करें: अजय सिंह।

भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने कहा है कि भाजपा की जो केंद्र सरकार निजी वेयर हाउस बनाने के लिए 33 प्रतिशत सब्सिडी और तीन प्रतिशत ब्याज में छूट दे रही है, उसी पार्टी की मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार वेयर हाउस मालिकों का शोषण कर रही है। आज वे सड़क पर आने की कगार पर हैं। 

अजय सिंह ने कहा कि सरकार की षड्यंत्रकारी नीतियों और निर्देशों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के सभी छोटे छोटे भंडार मालिक कोरोना संक्रमण काल में पूरी तरह टूट जाएंगे। महीनों से उनका किराये का भुगतान लंबित पड़ा है। इनके गोदामों में जनवरी से हजारों क्विंटल धान रखी है। अब यह धान काफी सूख गई है और सुखात प्रतिशत पाँच से छ: तक आ गया है। लेकिन शासन ने केवल दो प्रतिशत की सुखात छूट दी है। यदि सरकार निजी वेयर हाउस मालिकों को सुखात छूट बढ़ाकर पाँच - छ: प्रतिशत नहीं देगी तो वे बंद होने की स्थिति में आ जायेंगे, वे बैंक से एन पी ए घोषित हो जाएँगे। इस संबंध में उनके संघ ने पी॰एस॰ से मिलकर शासन को ज्ञापन भी दिया है। मेरी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह से मांग है कि कम से कम पाँच प्रतिशत सुखात छूट निजी वेयर हाउस मालिकों को दें।

श्री सिंह ने आरोप लगाया है कि वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के तत्कालीन एम डी अविनाश लवानिया ने विगत 25 मई को अनाज के भंडारण के लिए एक अव्यवहारिक आदेश पूरे प्रदेश के लिए जारी किया था। उन्होंने  प्राथमिकता क्रम बनाते हुये निर्देश दिये थे कि उपार्जन का अन्न पहले साइलो कैप में रखा जाये। उसके बाद सरकारी गोदामों में रखा जाये और क्षमता समाप्त होने के बाद निजी गोदामों अनाज का भंडार किया जाये। जबकि होना यह चाहिए था कि पहले सरकारी और फिर निजी गोदामों में अनाज का भंडार किया जाये और तीसरे क्रम पर साइलो कैप में अनाज रखा जाये। यह इसलिए क्योंकि साइलो कैप में खुले में रखा ऊपर का तीस प्रतिशत अनाज बरसात के समय नमी से खराब होकर सड़ जाता है।

अजय सिंह ने कहा कि यहीं से भ्रष्टाचार का खेल शुरू होता है। अनाज को पूरा खराब होना बताकर सस्ते में व्यापारियों को बेच दिया जाता है। यही अनाज प्रोसेस होकर पी डी एस के माध्यम से गरीबों में बंट जाता है। यह सब भाजपा सरकार के संरक्षण में कूटरचित योजना के तहत किया जा रहा है। पता नहीं अविनाश लवानिया ने यह दोषपूर्ण निर्देश किस मंत्री के कहने पर जारी किए थे। वैसे तथाकथित मंत्री से उनकी रिश्तेदारी जग जाहिर है।

अजय सिंह ने इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग मुख्यमंत्री शिवराजसिंह से करते हुये कहा है कि खरीफ फसल की आवक से पहले भंडारण का यह दोषपूर्ण आदेश जनहित में तत्काल निरस्त किया जाये। साथ ही निजी भंडारगृह मालिकों को धान पर सुखात छूट पाँच या छ: प्रतिशत देते हुये उन्हें महीनों से लंबित किराए का भुगतान तत्काल किया जाये।

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