Saturday, 4 July 2020

शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार: आखिर सीधी की हर बार उपेक्षा क्यों, कहीं वजह अंतर्कलह तो नही।


भोपाल / सीधी: मध्यप्रदेश में भाजपा की शिवराज सिंह सरकार का बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार 2 जुलाई को 100 दिनों के लम्बे इन्तजार के बाद हो ही गया। सभी नवनियुक्त मंत्रियों ने शपथ भी ले ली और सीएम ने पहली बैठक भी कर ली। लेकिन शिवराज सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार नें विंध्य की पूरी तरह से उपेक्षा की गयी। अगर बात विंध्य के रीवा, सीधी एवं सिंगरौली जिले की करे तो 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां की जनता नें भाजपा को 15 मे से 14 विधायक जिताकर दिये लेकिन विडंबना यह है की इनमें से किसी को भी मंत्री नही बनाया गया। 



यहां तक रीवा जिले की आठों सीटों पर भाजपा के विधायक होनें के बाद भी मंत्रिमंडल में जगह नही मिली। रीवा से विधायक एवं पूर्व की शिवराज सरकारों में मंत्री रहे राजेन्द्र शुक्ला को भी इस बार मंत्रिमंडल में जगह नही मिल सकी। साथ ही इस बार रीवा जिले की देवतालाब विधानसभा से विधायक गिरीश गौतम का नाम भी रेस में था लेकिन ऐन वक़्त पर उनका नाम भी काट दिया गया। रीवा से मंत्रीपद का छिनना विधायकों की आपसी खींचतान सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।



बात सीधी की, आखिर सीधी की हर बार उपेक्षा क्यों?
मध्यप्रदेश के सीधी जिले को कांग्रेस की सरकारों में हमेशा ही प्रतिनिधित्व मिलता रहा है। कांग्रेस की सरकारों में यहां से मुख्यमंत्री, मंत्री एवं विपक्ष में रहते हुये नेता प्रतिपक्ष जैसे पद मिले, लेकिन इससे उलट भाजपा में हर बार तारीख पे तारीख मिलती रही, और सीधी की जनता को हर बार की तरह इस बार भी हताशा ही मिली। चाहे बात शिवराज सिंह चौहान की पिछली सरकारों की करें या फिर अब की सरकार की, सीधी के कद्दावर एवं वरिष्ठ विधायक केदारनाथ शुक्ला का नाम मंत्रिमंडल की रेस में हमेशा रहता है, लेकिन अंतिम सूची में कभी नही आ पाता। आखिर इसकी बजह क्या है? 



इस बार तो यह तय माना जा रहा था की, सीधी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया जायेगा। क्योंकि सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला नें खुद इस बार दावेदारी ठोंकी थी, और सीएम शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के बाद कहा था की इस बार वो 100 प्रतिशत मंत्री बनेंगें। लेकिन ऐन वक़्त पर ऐसा क्या हो गया, की इस बार भी उनका नाम मंत्रिमंडल की सूची से हटा दिया गया।



इसके कई कारण है, प्रदेश स्तर पर चर्चा है की, सिंधिया समर्थकों को जादा से जादा हिस्सेदारी देनें की वजह से भाजपा के वरिष्ठ विधायकों का पत्ता काट दिया गया। लेकिन इस बार भाजपा से कई नये विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली, जिसमें पहली बार विधायक बननें वाले भी शामिल हैं। तो केदारनाथ जैसे वरिष्ठ और एक काबिल विधायक की इस बार भी उपेक्षा समझ से परे है।



सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला के सीधी सांसद रीति पाठक से मतभेद।
सीधी से भोपाल तक सीधी विधायक एवं सांसद की आपसी तकरार के बारें में सब को पता है। दरअसल सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला और सांसद रीति पाठक के रिश्ते बिल्कुल समान्य नही है, और दोनों एक दूसरे के बारे मे मीडिया में भी बयानवाजी करनें से पीछे नही हटते। हालात तो यहां तक पहुंच गये थे की सीधी विधायक द्वारा सीधी सांसद पर व्यक्तिगत छींटाकशी की गयी थी, जिसके जवाब में सांसद रीति पाठक ने, सीधी विधायक के मानसिक स्थिति पर ही सवालिया निशान लगा दिया था, और शिवराज सिंह को बीच बचाव करना पड़ा था।



सीधी भाजपा काफी दिनों से सांसद और विधायक गुट में बटीं हुई नजर आ रही है, जिसका खामियाजा सीधी की जनता को भुगतना पड़ रहा है। अभी हाल में सीधी सांसद रीति पाठक सीधी के दौरे पर रहीं हैं, लेकिन उनके किसी भी कार्यक्रम में विधायक केदार शुक्ला का उपस्थित ना होना गुटबाजी को और भी हवा देनें का काम किया। साथ ही कुछ दिनों पहले सांसद रीति पाठक नें सीएम शिवराज सिंह चौहान से भोपाल में मुलाकात की थी, सांसद के साथ सीधी व सिंगरौली के जिलाध्यक्ष, व्यौहारी विधायक के साथ साथ सीधी- सिंगरौली के विधायक गण भी उपस्थित थे। लेकिन यहां भी सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला का उपस्थित ना होना कई तरह के सवाल खड़ें कर रहा था।




सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला द्वारा पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह के खिलाफ की गई टिप्पणी।
झाबुआ उपचुनाव हारने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सीधी से विधायक केदारनाथ शुक्ला ने अपनी ही पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की काबिलियत पर सवालिया निशान लगाते हुए यह तक कह डाला था कि उन्हीं के असक्षम नेतृत्व के चलते पार्टी चुनाव हारी है। शुक्ला ने यहां तक कह दिया कि  राकेश सिंह के नेतृत्व में पार्टी चौपट हो रही है और उन्हें जल्द पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना चाहिए। केदारनाथ शुक्ला का इतना बोलते ही पार्टी में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पार्टी नें केदारनाथ शुक्ला की इस बयान बाजी को अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया था।



अब चाहे वजह जो भी हो लेकिन सीधी को मंत्रिमंडल में जगह ना मिलनें से नुकसान तो सीधी की जनता को ही झेलना पड़ रहा है। क्योंकि सीधी की जनता केदारनाथ शुक्ला को हर बार चुनाव जिताकर भेज रही है, लेकिन हर बार सीधी की उपेक्षा अब हताशा में बदलती जा रही है। अब सीधी एवं केदारनाथ शुक्ला के समर्थकों में इस बात की उम्मीद है की, उन्हें शायद विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया जाय, लेकिन इस कुर्सी के लिये भी शिवराज सिंह के करीबी एवं पिछले विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा प्रबल दावेदार हैं। साथ ही नागोद विधायक नागेन्द्र सिंह का नाम भी इसके लिये प्रमुखता से लिया जा रहा है।

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