Saturday, 6 June 2020

सिंधिया नें ट्विटर प्रोफाइल से कथित तौर पर हटाया "भाजपा", अटकलों का बाजार गर्म।

भोपाल: ज्योतिरादित्य सिंधिया नें जब से कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली है, तब से ही उनको लेकर तरह तरह की अटकलें लगाई जा रही है। अभी पिछले दिनों ही सिंधिया के कट्टर समर्थक रहे कांग्रेस सेवादल के पूर्व अध्यक्ष सत्येंद्र यादव ने कहा था, '' ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में घुटन महसूस कर रहे हैं। सिंधिया इन दिनों किसी से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। वह भाजपा में परेशान होकर जल्द ही कांग्रेस में वापसी करेंगे''। अब इस बात को और भी बल मिल गया है, क्योंकि भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर अकाउंट से कथित तौर पर ‘भाजपा’ हटा दिया है। इसके स्थान पर उन्होंने जनता का सेवक और क्रिकेट प्रेमी लिखा है। इसके बाद से चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सिंधिया ने अपने प्रोफाइल में भाजपा जोड़ा ही नहीं था। हालांकि इसपर भाजपा या सिंधिया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।



गौरतलब है की, 18 सालों तक कांग्रेस के साथ रहने के बाद सिंधिया ने भाजपा का दामन थाम लिया था। पार्टी में उनके आने के बाद उनके समर्थकों को शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल करने और उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि उनके समर्थक पूर्व विधायकों को उपचुनाव का टिकट मिलने में परेशानी हो रही है।



उपचुनाव को लेकर राजनीति तेज।
शिवराज चौहान की कैबिनेट को लेकर कई बार संभावित तारीख आ चुकी है। प्रदेश संगठन के साथ मुख्यमंत्री ने संभावित मंत्रियों की लिस्ट तैयार की है, मीडिया में भी कई बार संभावित मंत्रियों की लिस्ट आ चुकी है। लेकिन कैबिनेट विस्तार नहीं हो पाया। मोदी कैबिनेट में सिंधिया को शामिल करने की भी चर्चा अब कम ही सुनाई देती है। हालांकि पार्टी में उनकी एंट्री को ग्वालियर-चंबल संभाग में उनके समर्थकों ने काफी जोर-शोर से प्रचारित किया था।



उपचुनाव में टिकटों को लेकर खींचतान।
भाजपा ने उपचुनाव में सिंधिया समर्थक सभी 22 विधायकों को टिकट देने का वादा किया है लेकिन इसमें परेशानी आ रही है। कई सीटों पर पार्टी को अपने पुराने नेताओं की बगावत देखने को मिल रही है। हाटपिपल्या में दीपक जोशी हों या ग्वालियर पूर्व में कांग्रेस में शामिल हो चुके बालेंदु शुक्ला, पार्टी के लिए अपने नेताओं को मनाना मुश्किल हो रहा है। कुछ सीटों पर सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों की जीत को लेकर संशय की बातें भी सामने आ रही हैं।



हला की, सिंधिया या उनके समर्थकों की तरफ से अभी तक किसी तरह के असंतोष की खबरें सामने नहीं आई हैं लेकिन लोग यह कहनें लगें हैं की सिंधिया का रसूख भाजप में जानें से कम हुआ है। यदि ट्विटर प्रोफाइल से भाजपा हटाने के दावे सच हैं तो इसे सिंधिया का राजनीतिक दबाव माना जा सकता है। खासतौर से इसलिए क्योंकि कांग्रेस छोड़ने से पहले उन्होंने अपनी प्रोफाइल से पार्टी का नाम हटा लिया था।

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