Tuesday, 9 June 2020

विधानसभा सत्र के बीच कांग्रेस से इस्तीफा देनें वाले चौधरी राकेश नें, अब दिग्विजय-अजय पर खड़े किये सवाल।


ग्वालियर: मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनके समर्थक 22 विधायकों के पार्टी छोड़ने एवं 15 महीने में ही सरकार गंवाने के बाद भी कांग्रेस में कलह शांत होनें का नाम नही ले रही।प्रदेश में होनें वाले आगामी 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिये दलबदलू नेताओं को टिकट देनें को लेकर छिड़ा विवाद अब बढ़ता जा रहा है। 


दिग्विजय सिंह की हैसियत क्या है: चौधरी राकेश।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह एवं पूर्व सहकारिता मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह द्वारा दलबदलू नेता चौधरी राकेश सिंह को उपचुनाव में टिकट देनें का विरोध करने पर, अब चौधरी राकेश सिंह नें पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में उठाई जाने वाली बात सार्वजनिक रूप से करना क्या अनुशासनहीनता नहीं है । आखिर दिग्विजय सिंह की हैसियत क्या है जो वो मुझपर सवाल खड़े कर रहे हैं।



मैं पहले ही कांग्रेस जॉइन कर चुका हूं, राहुल गांधी नें मुझे क्षेत्र में काम करनें के लिये बोला: चौधरी राकेश।
ग्वालियर में अल्प प्रवास पर आये चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने कुछ पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी में नहीं आ जाऊं, इसलिए तीन बड़े नेता मेरे लिए इकट्ठा हो रहे है। जबकि मैं तो कांग्रेस जॉइन कर ही चुका हूँ। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुझे शिवपुरी में मंच पर बुलाकर स्वागत किया था। उसके बाद उसी लोकसभा चुनाव में जब राहुल गांधी भिंड आये थे, तब उन्होंने मंच पर बुलाकर मुझे क्षेत्र में काम करने के लिये बोल दिया था। अब इससे बड़ी पुष्टि क्या चाहिए।



दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और गोविंद सिंह में मेरे नाम का भय: चौधरी राकेश।
उन्होंने कहा कि आज दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और गोविंद सिंह को राकेश चौधरी के नाम से इतना भय सता रहा है कि वह रात दिन मेरे नाम की चर्चा कर रहे है। लेकिन सवाल ये है कि अब जो दिग्विजय सिंह मेरे खिलाफ बोल रहे हैं, वह किस हैसियत से बोल रहे हैं, उनके पास क्या अधिकार है। क्या वो प्रदेश अध्यक्ष हैं? क्या प्रदेश महासचिव हैं? उनके पास क्या अधिकार है? क्या कमलनाथ, सोनिया गांधी या राहुल गांधी ने उन्हें अथॉरिटी दी है। क्या इस तरह से सार्वजनिक तौर पर पार्टी के सदस्य के खिलाफ बोलना अनुशासनहीनता नहीं है।



मुझसे एक ही गलती हुई है, और मै उसकी माफ़ी मांग चुका हूं: चौधरी राकेश।
चौधरी राकेश सिंह ने कहा कि मैं पंडित श्यामाचरण शुक्ला के साथ प्रदेश में राजनीति में आया। मैं 1979 में NSUI प्रदेश अध्यक्ष रहा, जब इंदिरा गांधी जेल गई तब मैं भी उनके साथ जेल गया, जीवन भर कांग्रेसी रहा, केवल एक गलती छोड़कर जिसे मैंने स्वीकार किया और उसके लिए माफी भी मांगी। मैं दिग्विजय सिंह का बहुत सम्मान करता हूँ वे आदरणीय हैं। उन्होंने पच्चीस दिन पहले मुझे फोन करके कहा था कि राकेश मैंने तुम्हें दिल से माफ कर दिया। लेकिन उन्होनें फिर मेरे विरोध में बोलना शुरु कर दिया जिसका जवाब मुझे देना जरूरी लगा।



मैं मेहगांव से चुनाव लड़ने के लिए लालायित नहीं: चौधरी राकेश।
मुझे लगता है ये कोई व्यक्तिगत चोट है और इसने मुझे ठेस पहुंचाई है इसलिए मुझे इसका जवाब देने मीडिया के सामने आना पड़ा अब ये शुरुआत हो गई है। टिकट से जुड़े सवाल पर चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने कहा कि मैं मेहगांव से चुनाव लड़ने के लिए लालायित नहीं हूँ। बहुत उत्सुक नहीं हूँ। लेकिन मध्यप्रदेश के तीन बड़े नेता मुझे रोकने में लगे हैं लेकिन फिर भी यदि पार्टी मुझे टिकट देगी तो मैं बिलकुल चुनाव लडूंगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं है। उनपर खरीद फरोख्त के आरोप हैं जनता सब समझती है हम अंचल की सभी सीटें जीतेंगे।



पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को भी घेरा।
चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, जो खुद लगातार चुनाव हार गए वो मुझे रोकने की बात कर रहे हैं । पूरा देश जानता है अर्जुन सिंह जी की कितनी बड़ी विरासत है लेकिन अजय सिंह उस संभाल नहीं पाए। सतना, सीधी लोकसभा और चुरहट विधानसभा चुनाव हार गए। और अब उन्हें भय है कि राकेश चौधरी ना आ जाये।



टीम कमलनाथ द्वारा चौधरी राकेश को इतनी वरीयता क्यों?
फिलहाल अब समझ में यह नही आ रहा की पार्टी से ऐन वक़्त पर अलग होनें वाले चौधरी राकेश सिंह को, पूर्व सीएम कमलनाथ एवं उनके कुछ पूर्व मंत्रीगण इतनी वरीयता क्यों दे रहे। आखिर कमलनाथ एवं उनकी टीम के लिये गद्दारी की परिभाषा क्या है। अगर सिंधिया एवं उनके समर्थक गद्दार हैं, तो चौधरी राकेश सिंह एवं नारायण त्रिपाठी के लिये अलग परिभाषा क्यों? इन सब बातों से तो यही लगता है की, कल अगर सिंधिया एवं उनके समर्थक भी कांग्रेस में आना चाहेंगें तो उनका जोरदार स्वागत किया जायेगा। 



आइये जानतें हैं, कौन है चौधरी राकेश सिंह और किस समय उन्होनें कांग्रेस छोड़ी थी।
वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था उस दौरान चलते विधानसभा सत्र में उपनेता प्रतिपक्ष रहे चौधरी राकेश ने कह दिया था कि वे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करते हैं। इस तरह कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था, और राकेश ने भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके छोटे भाई मुकेश चौधरी को मेहगांव से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए थे। 2018 में फिर भाजपा ने राकेश को भिंड से टिकट दिया जहां से वे हार गए थे उसके बाद से ही वे कांग्रेस में आने के लिए प्रयासरत थे। 



सिंधिया समर्थक मानें वाले चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया की वजह से फिर से कांग्रेस में हुई थी वापसी।


मध्यप्रदेश के इतिहास में यह एकमात्र घटनाक्रम है जब विधानसभा सत्र के बीच उपनेता प्रतिपक्ष ने अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया हो। चौधरी राकेश सिंह ने कांग्रेस को यह झटका दिया था। लेकिन जब भाजपा में उनकी दाल नही गली तो वो वापस कांग्रेस में लौट आए। गौरतलब है की, चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया समर्थक नेता माना जाता है। एक बार फिर उन्होंने शिवपुरी में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब लोकसभा का नामांकन भरा था तब चौधरी राकेश भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे।

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