Saturday, 6 June 2020

राज्यसभा चुनाव को लेकर डरी भाजपा, अब चुनाव के बाद शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें।


भोपाल: मध्यप्रदेश में कोरोना का संकट बरकरार है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। जब मध्यप्रदेश में कोरोना दस्तक दे रहा था, उसी वक़्त तत्कालीन कमलनाथ सरकार का तख्ता पलट हो गया था, और कमलनाथ सरकार गिरनें के बाद कोरोना के चलते 24 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन से कुछ घंटे पहले शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर सूबे के मुख्यमंत्री के रूप में सपथ ली थी। लेकिन जैसे ही शिवराज सिंह सीएम की कुर्सी पर विराजमान हुये, वैसे ही कोरोना का कहर भी मध्यप्रदेश में तेजी से फैलनें लगा। इन्दौर में हालात लगातार बिगड़ते रहे। शुरुआती दिनों में सीएम शिवराज सिंह वन मेन आर्मी की तरह मैदान में डटे रहे। लेकिन बाद में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भारी दबाव के चलते एक महीनें बाद मंत्रिमंडल का गठन किया और पांच मंत्री नियुक्त कर दिए गए। लेकिन, अब मंत्रिमंडल विस्तार के लिये मिल रही है सिर्फ़ तारीख पे तारीख।



अब एक बार फिर 19 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव की वजह से शिवराज सिंह चौहान सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार टलता दिखायी दे रहा है। इसके पीछे की वजह भाजपा के वरिष्ठ विधायकों की नाराजगी एवं उनका लामबन्द होना बताया जा रहा है। भाजपा को डर सता रहा है कि अगर राज्यसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार किया गया तो क्रॉस वोटिंग का भी खतरा हो सकता है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब विस्तार जून के आखिरी सप्ताह में हो सकता है। 



हला की, इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि 31 मई के पहले विस्तार हो जाएगा। प्रदेश की रिक्त हुई राज्यसभा की तीन सीटों पर 19 जून को मतदान होना है। एक-एक सीट तो भाजपा और कांग्रेस के लिए पक्की है। तीसरी सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच पेंच फंसा हुआ है। 3 निर्दलीय विधायक सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं। भाजपा नेताओं ने कमलनाथ सरकार को गिरनें के लिये पहले इन्ही को अपनें तरफ लानें का प्रयास किया था। अभी के हालात के अनुसार  राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय भी भाजपा का साथ दे सकते हैं।



भाजपा में मंत्रिमंडल को लेकर काफी खींचतान।
मध्‍यप्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से मंत्रिमंडल में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं। फिलहाल कैबिनेट में पांच मंत्री हैं। शिवराज के मंत्रिमंडल विस्तार में 22 मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने की चर्चा है। इसमें 11 के करीब सिंधिया समर्थक हो सकते हैं। भाजपा में नेताओं में इसी बात को लेकर नाराजगी है कि सिंधिया समर्थकों की खातिर उन्हें साइड लाइन किया जा रहा है। हालात तो यहां तक हैं की पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव तक की भी मंत्रिमंडल में जगह खतरे में है।



उपचुनाव को लेकर भी सियासी घमासान जारी।
शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई बार संभावित तारीखों का अनौपचारिक ऐलान किया जा चुका है। प्रदेश संगठन के साथ मुख्यमंत्री ने संभावित मंत्रियों की लिस्ट तैयार की है, संभावित नाम मीडिया में भी आते रहतें हैं। प्रदेश में होनें वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों के पहले सिंधिया समर्थक अपनी जगह मंत्रिमंडल में चाहते हैं। इसके पीछे उनका तर्क यह है की, मंत्री होनें की वजह से चुनाव जीतना आसान हो जायेगा। लेकिन भाजपा में इसको लेकर एक राय नही हैं। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है की, पहले उन्हें विधायक बन जानें दिया जाय बाद में मंत्रीमंडल में जगह दी जाय।



उपचुनाव में सिंधिया-समर्थक सभी 22 विधायकों को टिकट देने का वादा भाजपा ने किया है, लेकिन इसमें भी दिक्कतें आ रही हैं। कई सीटों पर पार्टी को अपने पुराने नेताओं के विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। हाटपिपल्या में दीपक जोशी हों या ग्वालियर पूर्व में कांग्रेस में शामिल हो चुके बालेंदु शुक्ला, पार्टी के लिए अपने नेताओं को मनाना मुश्किल साबित हो रहा है। कुछ विधानसभा सीटों पर सिंधिया-समर्थक पूर्व विधायक की जीत पर संदेह की बातें भी हैं।

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