Saturday, 30 May 2020

डॉ. एस.बी खरे को हाई कोर्ट की फटकार, HC नें कहा- कोरोना आपदा के समय ट्रांसफर के खिलाफ मुकदमेबाजी उचित नही।


सीधी: अभी कुछ दिनों पहले ही सीधी में कोरोना संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गयी थी। जिसके तहत बर्षों से जमें हुये चिकित्सकों का तबादला किया गया था। जिले के सीएमएचओ एवं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन दोनों ही बदल दिये गयें थे। जारी आदेश के अनुसार सीधी में तत्कालीन सिविल सर्जन  डॉक्टर एस.बी खरे को जिला चिकित्सालय रीवा स्थानांतरित किया गया था।



जिसको लेकर डॉक्टर एस.बी खरे नाराज होके अपने स्थानांतरण के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंच गये थे। इस पर हाई कोर्ट ने डॉक्टर साहब को जमकर फटकार लगा दी। हाई कोर्ट ने सख्त लहजे पर कहा की कोरोना महामारी के समय सरकार ही जज है। वही तय करेगी कि किस डॉक्टर को कहां रखना है।



हाई कोर्ट ने कहा प्रभारी सिविल सर्जन जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए ट्रांसफर के खिलाफ याचिका दायर करना अनुचित है। याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी गई कि वह अभ्यावेदन दे और सरकार उसका निराकरण करे।



बता दें की, डॉ.एसबी खरे सीधी में प्रभारी सिविल सर्जन बतौर पदस्थ थे। उनका ट्रांसफर रीवा कर दिया गया। जिसके खिलाफ वे हाईकोर्ट चले आए। उनका तर्क यह था कि वे प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं। इस मामले में सक्षम अधिकारी ने ट्रांसफर आदेश नहीं निकाला। ट्रांसफर आदेश निरस्त किया जाए।



इस पर राज्य की ओर से साफ किया गया कि प्रशासनिक आवश्यकता के मद्देनजर सीधी से रीवा भेजा जा रहा है। कोरोना आपदा के समय यह आवश्यक था। साथ ही याचिकाकर्ता लंबे समय से सीधी में पदस्थ है। ऐसे में रीवा में उनकी अधिक आवश्यकता महसूस की गई।



हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को नसीहत दी कि कोरोना आपदा के समय इस तरह ट्रांसफर के खिलाफ मुकदमेबाजी उचित नहीं है। ऐसे समय में डॉक्टर को पूरा ध्यान मानव सेवा पर लगाना चाहिए। इसके साथ कोर्ट ने याचिका निराकृत कर दी।

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