Tuesday, 5 May 2020

नरोत्तम मिश्रा की शराब ठेकेदारों को चेतावनी, कहा- आदेश पर अमल नहीं करते हैं तो सरकार के पास हैं और भी विकल्प।


भोपाल: शराब की दुकानों को खोलनें के मुद्दे पर मध्यप्रदेश सरकार और शराब ठेकेदार असोसिएशन, आमने सामने आ गये हैं। जिसके बाद गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि, शराब ठेकेदार सरकार के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते। उनकी कोई समस्या है तो बातचीत की जा सकती है। नरोत्तम मिश्रा ने यह भी कहा है कि अगर शराब ठेकेदार आदेश पर अमल नहीं करते हैं तो फिर सरकार के पास और भी विकल्प हैं।

मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्रीय गाइडलाइन के तहत 5 मई से ग्रीन और ऑरेंज जोन में शराब दुकानें खोलने का फैसला किया था। लेकिन मध्यप्रदेश में शराब ठेकेदार एसोसिएशन ने दुकान खोलने से इनकार कर दिया और 5 मई से दुकानें नहीं खोलीं। शराब ठेकेदारों का कहना है अगर शराब की दुकानें खुलेंगी तो इससे संक्रमण फैलेगा।



शराब ठेकेदारों का तर्क है कि शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां रेड जोन वाले इलाके में हैं और वहीं से शराब की सप्लाई होती है। अगर यह शराब दुकानों पर जाएगी और वहां लोगों की भीड़ होगी तो फिर संक्रमण फैलेगा। हालांकि असली वजह इसके पीछे लाइसेंस फीस है। ठेकेदारों का मन है कि कोरोना में हुए लॉक डाउन की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार उनकी लाइसेंस फीस को लेकर भी कोई फैसला करे।इस मुद्दे को लेकर शराब ठेकेदार एसोसिएशन हाईकोर्ट भी पहुंच गया है।



30 शराब ठेकेदारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूरे मामले में 2 हफ्तों में जवाब मांगा है और मामले पर अगली सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख तय कर दी है। शराब ठेकेदारों ने अपनी इस याचिका में कोरोना लॉकडाउन के दौरान हुए घाटे का हवाला दिया है। साथ ही याचिका में कहा गया है कि अब जबकि सरकार ने शराब दुकानों के खुलने का समय घटा दिया है तो शराब ठेकेदारों से वसूली गई बिड की रकम भी घटाई जानी चाहिए।




गौरतलब है की, मध्यप्रदेश में शराब दुकानों को सशर्त खोलने के आदेश जारी किए गए हैं। लेकिन शराब ठेकेदार अपने घाटे के मद्देनजर बिड राशि घटाने की मांग करते हुए शराब दुकानें नहीं खोल रहे हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने शराब दुकानें ना खोलने वाले ठेकेदारों पर सख्ती दिखाते हुए उनकी जमा राशि जब्त करने की चेतावनी दी थी लेकिन अब शराब ठेकेदार अपनी मांगों को लेकर हाईकोर्ट की शरण में हैं।

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