Wednesday, 13 May 2020

सिंधिया समर्थकों की वजह से भाजपा में उठे बगावती सुर, पूर्व सीएम के बेटे एवं पिछली शिवराज सरकार में मंत्री रहे नेता नें कहा- "दूसरे विकल्पों पर करूंगा विचार"।


भोपाल: मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें फिर तेज हो रही है। साथ ही आगामी 24 विधानसभा सीटों पर होनें वाले उपचुनाव को देखते हुये भी राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गयी हैं। लेकिन इस बीच मध्यप्रदेश भाजपा में अन्दरूनी कलह भी चालू हो गयी है। 



अब सिंधिया समर्थक नेताओं के कारण पार्टी में विरोध के स्वर फूटने लगे हैं। जिसके साथ ही बीजेपी नेताओं ने बगावती सुर अपना लिए हैं। पूर्व मंत्री और भाजपा नेता दीपक जोशी ने साफ़ किया है कि यदि उनके राजनीतिक मुद्दे पर पार्टी में उनके साथ नाइंसाफी होती है तो वे दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।



दरअसल पूर्व मंत्री और भाजपा से तीन बार के विधायक दीपक जोशी ने कहा कि अभी वो पार्टी के साथ हैं लेकिन उन्होंने कहा कि उनके लिए सारे विकल्प खुले हैं और वक्त आने पर वो इस पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा है कि मैं भी मनुष्य हूं, अगर राजनीति का यही रूप है तो इसका प्रयोग मैं भी करूंगा। 



ऐसा माना जा रहा है की, हाटपिपल्या विधानसभा सीट से उपचुनाव मनोज चौधरी भाजपा के टिकट से लड़ेंगे। ऐसे में दीपक जोशी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। जिसके बाद ये अंदेशा लगाया जा रहा है कि वो दूसरे विकल्प पर भी विचार कर सकते है।



गौरतलब है कि, दीपक जोशी हटपिपल्या विधानसभा सीट से दो बार लगातार विधायक रह चुके हैं। वे एक बार बागली विधानसभा सीट से भी विधायक रह चुके हैं। दीपक जोशी 2013 में मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार में स्कूल, उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट मंत्री भी रहे थे। जिसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें ज्योतिरादित्य समर्थक मनोज चौधरी से करीब 23 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। अब ये तो तय है कि हटपिपल्या से मनोज चौधरी चुनाव लड़ेंगे। जिसके बाद अब जोशी पार्टी के बिरोध पर उतर आयें हैं।

पिता से मिली राजनीति की तालीम।
दीपक जोशी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे हैं। उन्हें राजनीति की  तालीम अपने पिता से ही मिली है। पहली बार जब दीपक बागली से ही विधायक चुने गए थे। बागली दरअसल उनके पिता का प्रमुख कार्यक्षेत्र रहा है। लेकिन, जब बागली सीट आरक्षित हुई तो उन्होंने हाटपिपल्या का रुख किया। चौधरी और पाटीदार समाज बाहुल्य क्षेत्र में दीपक को उनकी साफ और सादगी भरी छवि का लाभ मिला। इस कारण उन्होंने पिछले दो विधानसभा चुनाव जीता लेकिन इस बार 2018 में वो मनोज चौधरी से चुनाव हार गये थे।

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