Sunday, 24 May 2020

भाजपा में सिंधिया विरोधी हुये सक्रिय, जयभान पवैया, डॉ.केपी सिंह एवं वीरेंद्र रघुवंशी नें बंद कमरे में की बैठक।


गुना: मध्यप्रदेश में विधानसभा की 24 सीटों पर होनें वाले उपचुनावों के लिये अब रानीतिक सरगर्मियां तेज हो गयी है। सबसे जादा उथल-पुथल ग्वालियर-चम्बल संभाग में देखनें को मिल रही है। क्योकी यहां सबसे जादा 16 सीटों पर उपचुनाव होना है। और खास बात ये है की यहां से सभी सिंधिया समर्थक जो की कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुये थे, को भाजपा से टिकट देनें की अटकलें लागाई जा रही हैं। लेकिन इसी बीच अब भाजपा में भी सिंधिया एवं सिंधिया समर्थकों को लेकर विरोध तेज होता दिख रहा है। पिछले दिनों पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू नें सिंधिया पर हमला बोला था, उसके बाद भाजपा के कद्दावर नेता जयभान सिंह पवैया नें सिंधिया पर तंज कसा था। लेकिन अब इसके साथ ही ग्वालियर-चम्बल संभाग के सिंधिया विरोधी भाजपा नेता लामबन्द होनें लगे हैं, जो आनें वाले वक़्त में भाजपा के लिये खतरे की घंटी हो सकता है।



अब सिंधिया के धुर विरोधी भाजपाई अपने राजनैतिक भविष्य को लेकर बेचैन हैं तो सिंधिया समर्थक पार्टी में अपनी स्थिति को लेकर उहापोह में है। उपचुनाव में टिकट को लेकर भी दोनों पक्ष अपने अपने लोगों को प्रत्याशी बनाने के लिए राजनीति पासा फेंकने लगे हैं। शुक्रवार को ‘महाराज’ के घोर विरोधियों की बंद कमरे की मीटिंग ने रानीतिक तापमान को बढ़ा दिया है।



दरअसल, ग्वालियर-चंबल संभाग की खाली सीटों पर उपचुनाव को लेकर सभी दल प्रत्याशी चयन की कवायद शुरू कर दिए हैं। भाजपाई हुए कद्दावर नेता ज्योतिरार्दित्य सिंधिया के समर्थकों को यह उम्मीद है कि उनके प्रभाव क्षेत्र वाले ग्वालियर-चंबल संभाग में उनके साथ आए सभी पूर्व विधायकों को भाजपा प्रत्याशी बनाएगी। उधर, भाजपा में ही सिंधिया का धुर विरोधी गुट इस वजह से अपने राजनैतिक भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहा है। विरोधी गुट को आशंका है कि अगर ‘महाराज’ के समर्थकों को टिकट मिल गया तो वह कहां जाएंगे। उनका और उनके लोगों का स्थानीय स्तर पर वर्चस्व कम हो जाएगा। 



प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिर्रादित्य सिंधिया के विरोधी माने जाने वाले पूर्व मंत्री/गुना जिले के पूर्व प्रभारी मंत्री जयभान सिंह पवैया, सिंधिया को हराने वाले गुना-शिवपुरी क्षेत्र के सांसद डाॅ.केपी सिंह यादव, कोलारस से भाजपा विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने गुना-शिवपुरी सीमा के पास एक जगह गोपनीय बैठक की। इस गोपनीय बैैठक की भनक लगते ही राजधानी तक का सियासी पारा चढ़ने लगा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस बैठक में उपचुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। साथ ही कांग्रेस के शासनकाल में सिंधिया समर्थक रहे अधिकारियों की तैनाती अभी भी रहने और उसकी वजह से उन लोगों के राजनैतिक प्रभाव के बारे में मंथन किया गया।



पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया सिंधिया के घोर विरोधी माने जाते हैं। वह गुना के प्रभारी मंत्री रह चुके हैं। सांसद डाॅ.केपी सिंह यादव अभी बीते लोकसभा चुनाव में ही अजेय माने जाने वाले सिंधिया को भाजपा के टिकट पर हराकर पूरे देश की निगाहें अपनी ओर खींचने को मजबूर कर दिए थे। कभी सिंधिया के खास में शुमार यादव की पूरी राजनीति ही सिंधिया के विरोध से उभरी। भाजपा विधायक वीरेंद्र रघुवंशी भी कभी सिंधिया के ही समर्थक माने जाते थे। लेकिन विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने रघुवंशी का टिकट काटकर पूर्व विधायक रामसिंह यादव के बेटे को दे दिया था। माना जाता है कि सिंधिया ने ही रघुवंशी का टिकट कटवाया। इससे नाराज होकर रघुवंशी ने भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए रघुवंशी को टिकट दे दिया और वह कोलारस से विधायक हो गए।



पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के अनुसार दोनों नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर पीड़ा व्यक्त की है। उस पीड़ा से जल्द मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को अवगत कराऊंगा। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं के नाम न लेकर श्री पवैया नें कहा कि भाजपा के प्रति चल रही इस लहर पर उन नेताओं के पुराने कर्म भारी न पड़ जाएं। भाजपा का कैडर है, जो नेता अभी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं उनको अभी घुलने-मिलने में समय लगेगा। 

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