Wednesday, 13 May 2020

किसानों और मजदूरों के शोषण की नई इबारत लिख रहे शिवराज: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह।


भोपाल: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि भाजपा सरकार ने हाल ही में श्रम कानूनों में बदलाव कर किसानों के बाद अब मजदूरों का शोषण करने की अमीरों को खुली छूट दे दी है। श्री सिंह ने कहा कि अपने को किसानों और मजदूरों का हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार “मुंह में राम बगल में छुरी” कहावत चरितार्थ कर रही है।



श्री अजय सिंह ने कहा कि श्रम कानूनों में जो बदलाव किये गये हैं वे अलोकतांत्रिक तरीके से बड़े लोगों को सुविधायें देने के लिए हैं। इतने बड़े बदलाव के लिए न तो मजदूर संगठनों, राजनीतिक दलों और यहाँ तक कि विधानसभा सत्र का भी इन्तजार नहीं किया गया।



श्री सिंह ने कहा कि कोरोना से हो रही मौत के सन्नाटे और भय के बीच में उसे एक अवसर मानकर मोदी और शिवराज सरकार इस देश के अन्नदाता और निर्माण की नींव मजदूरों को गुलामी के दौर में ले जा रही है। उन्होंने कहा कि हमेशा से यह कहा जाता रहा है कि वह बड़े लोगों की पार्टी है । यह मंडी अधिनियम और श्रम अधिनियम जैसे कानूनों में संशोधन से स्पष्ट हो गया है। भाजपा अब इस प्रदेश को गुलामी और शोषण के दौर में ले जाना चाहती है।



पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने कहा कि हाल ही में श्रम कानूनों में जो बदलाव किये गये हैं उनमें महत्वपूर्ण यह है कि अगर नियोक्ता मजदूरों को न्यूनतम वेतन न दे तो उस पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। पहले ऐसा करने पर छ: माह की जेल और सात गुना जुर्माने का प्रावधान था। इसी तरह दूकान स्थापना अधिनियम 1958 में संशोधन के अनुसार सुबह 6 बजे से रात 12 बजे  तक दूकान कारखाने खुल सकेंगे। इन दुकानों में जो काम करेंगे उनकी कितनी शिफ्ट होगी और कितने घंटे की शिफ्ट होगी यह न तो स्पष्ट है और न ही बताया गया है कि ऐसा होनें पर क्या कार्यवाही होगी। अब 100 मजदूरों वाला उद्योग कभी भी बंद हो सकता है। उसके लिए इजाजत नहीं लेनी होगी।



श्री सिंह ने कहा कि संशोधन बताते हैं कि देश में तानाशाह तरीके से शासन चलाने का दौर शुरू हो गया है। मजदूर दिवस महीने में शिवराज सरकार ने श्रम कानूनों में शोषण उन्मुखी संशोधन कर उन्हें फिर से बंधुआ मजदूर बनने के तोहफा दिया है। श्री सिंह ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जो कानून चर्चा बहस के बाद विधानसभा में पारित किया गया है उसे मात्र अधिसूचना जरिये बदल देना वह भी मजदूरों के हितों पर कुठाराघात करने वाला पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।उन्होंने कहा कि किसान मजदूर विरोधी बदलावों को तत्काल बदला जाए नहीं तो भाजपा के विरुद्ध एक नै क्रान्ति का शंखनाद होगा जिससे गद्दारों के साथ भाजपा भी जमींदोज हो जायेगी।

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