Friday, 29 May 2020

दलबदलू नेताओं की "घर वापसी" के मसले पर दो खेमे में बंटी कांग्रेस, उपचुनाव में क्या होगा भविष्य?


भोपाल: मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनके समर्थक 22 विधायकों के पार्टी छोड़ने एवं 15 महीने में ही सरकार गंवाने के बाद भी कांग्रेस की आंतरिक कलह शांत होनें का नाम नही ले रही। प्रदेश में होनें वाले आगामी 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के पहले मध्यप्रदेश कांग्रेस, खेमों में बंट गयी है। जिसकी वजह से पार्टी आलाकमान को प्रदेश जिलाध्यक्षों के नाम दिल्ली से तय करने पड़ रहें हैं। साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का मामला भी इसी वजह से अधर में लटका है।



क्या है वजह?
उपचुनाव से ठीक पहले खेमों में बंटी दिख रही प्रदेश कांग्रेस के पीछे की ताजा वजह चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी हैं, जिन्हे टीम कमलनाथ उपचुनाव में टिकट देना चाहती है लेकिन पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह एवं पूर्व सहकारिता मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह इस बात का विरोध कर रहें हैं। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित भिंड कांग्रेस की पूरी जिला इकाई भी पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के इस बात का समर्थन कर रही की, चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को टिकट ना दिया जाय।


चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की वापसी के साथ ही, कमलनाथ खेमे के नेता उन्हें भिंड के मेहगांव से विधानसभा उपचुनाव लड़ाना चाहते हैं। यहां ब्राह्मण मतदाताओं का बाहुल्य है। इससे दोनों नेता और उनके समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। कमलनाथ के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति जैसे नेता हैं। वहीं दिग्विजय सिंह के खेमें में अजय सिंह, डॉ. गोविंद सिंह, केपी सिंह सहित भिंड जिले की पूरी कांग्रेस इकाई शामिल है।


आइये जानतें हैं, कौन है चौधरी राकेश सिंह और किस समय उन्होनें कांग्रेस छोड़ी थी।
वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ तत्कालीन नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था उस दौरान चलते विधानसभा सत्र में उपनेता रहे चौधरी राकेश ने कह दिया था कि वे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करते हैं। इस तरह कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था, और राकेश ने भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके छोटे भाई मुकेश चौधरी को मेहगांव से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए थे। 2018 में फिर भाजपा ने राकेश को भिंड से टिकट दिया जहां से वे हार गए थे उसके बाद से ही वे कांग्रेस में आने के लिए प्रयासरत थे। 



सिंधिया समर्थक मानें वाले चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया की वजह से फिर से कांग्रेस में हुई थी वापसी।
मध्यप्रदेश के इतिहास में यह एकमात्र घटनाक्रम है जब विधानसभा सत्र के बीच उपनेता प्रतिपक्ष ने अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया हो। चौधरी राकेश सिंह ने कांग्रेस को यह झटका दिया था। लेकिन जब भाजपा में उनकी दाल नही गली तो वो वापस कांग्रेस में लौट आए। गौरतलब है की, चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया समर्थक नेता माना जाता है। एक बार फिर उन्होंने शिवपुरी में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब लोकसभा का नामांकन भरा था तब चौधरी राकेश भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे।


आखिर कांग्रेस के लिये क्या है, गद्दारी की परिभाषा।
अपनी गलतियों से ना सीखनें का दूसरा नाम ही मध्यप्रदेश कांग्रेस है। आखिर दलबदलुओं कें नाम पर कांग्रेस क्यूं बंटी हुई है। टीम कमलनाथ एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसते हैं और उन्हें गद्दार कहतें हैं, लेकिन यही टीम कमलनाथ  चौधरी राकेश सिंह, प्रेमचंद गुड्डू एवं नारायण त्रिपाठी जैसे लोंगों को गद्दार नही मानती। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यूं। इस बात को टीम कमलनाथ एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस को समझना होगा, अन्यथा उपचुनाव का रिजल्ट क्या होगा किसी को बतानें की जरुरत नही है।



खेमों में बंटे नेता।
प्रदेश में खींचतान का ही असर रहा कि पिछले दिनों प्रदेश के ग्यारह जिलों एवं बाद में 3 जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति दिल्ली से की गई, जबकि आमतौर पर यह जिम्मा प्रदेश कांग्रेस का रहता है। जहां तक नेता प्रतिपक्ष की बात है तो खेमेबाजी के चलते एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही। जहां दिग्विजय एवं अजय सिंह खेमा कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे डॉ गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनवाना चाहता है, वहीं कमलनाथ खेमा उनके नाम का विरोध कर रहा है। प्रदेश के कई बड़े चेहरे फिलहाल कमलनाथ के साथ हैं, जिनमें बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, तरुण भनोत, सुखदेव पांसे जैसे नेता शामिल हैं। ये सभी कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी व पूर्व स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति भी नाथ के साथ हैं। यह खेमा बाला बच्चन को नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहता है। इसके पीछे दलील है कि वे उपनेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। वहीं सज्जन सिंह वर्मा का नाम भी रेस में बताया जा रहा है। दूसरी ओर दिग्विजय सिंह के खेमे में अजय सिंह, गोविंद सिंह, जयवर्द्धन सिंह, जीतू पटवारी, आरिफ अकील व के पी सिंह जैसे नेता हैं।



उपचुनाव में प्रत्याशियों का मामला अटका।
गौर करनें वाली बात यह है कि, आपसी मतभेद के चलते जल्द ही प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के लिए प्रत्याशियों के नाम भी नहीं तय हो पा रहे हैं। खेमों में बंटी कांग्रेस में सबसे बड़ा मुद्दा बन रहा है - कांग्रेस छोड़कर बीजेपी गए नेताओं की घरवापसी। इनमें दो नाम काफी चर्चा में हैं- चौधरी राकेश चतुर्वेदी और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू। कमलनाथ खेमा चतुर्वेदी को भिंड की मेहगांव सीट से उतारना चाहता है। लेकिन अजय सिंह सहित दिग्विजय खेमे के कई नेता उन्हें टिकट दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। इसी तरह, गुड्डू की पार्टी में वापसी व टिकट देने का विरोध कमलनाथ खेमा कर रहा है।

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