Monday, 11 May 2020

सीधी में "रेत का खेल": दोनों ही मुख्य पार्टियों के लिये विपक्ष में रहते हुये "रेत" एक मुद्दा मात्र, सत्ता में आते ही करीबी ही करनें लगते हैं "खेल"।


सीधी: मध्यप्रदेश की राजनीति में अवैध रेत उत्खनन हमेशा से ही एक राजनैतिक मुद्दा रहा है। दोनों ही मुख्य पार्टियां भाजपा एवं कांग्रेस जब जब विपक्ष में होती हैं "रेत के खेल" को मुद्दा बनाती हैं, लेकिन विडंबना यह है की, जैसे ही सत्ता में आती हैं उनके खुद के ही लोग धड़ल्ले से इस खेल में शामिल हो जातें हैं।



अगर प्रदेश की बात करें तो पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार में कांग्रेस हमेशा ही तत्कालीन सरकार पर रेत माफियायों से मिले होनें का आरोप लगाती थी। कांग्रेस का आरोप रहता था की नर्मदा का सीना छलनी किया जा रहा है और अवैध रेत उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा है। लेकिन कांग्रेस की 15 महीनें की कमलनाथ सरकार में इस मुद्दे को साइड लाईन कर दिया गया था। कमलनाथ सरकार नें अवैध रेत उत्खनन को रोकनें के लिये कंप्यूटर बाबा को जिम्मेदारी सौंपी थी, और बिडंबना यह रही की कंप्यूटर बाबा की बातों से तत्कालीन खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल तक सहमत नही रहा करते थे।



अगर बात मध्यप्रदेश के सीधी जिले की करें तो, सरकार कोई भी रहे यहां अवैध रेत उत्खनन जारी रहता है। सीधी भाजपा पिछली कमलनाथ सरकार में रेत के खेल के मुद्दे को काफी जोरों से आगे लेकर आती थी। यहां तक तत्कालीन पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल को मीडिया में सफाई देनी पड़ी थी की उनका कोई भी रिश्तेदार रेत का कारोबार नही करता।



साथ ही कमलनाथ सरकार के समय सीधी कलेक्टर रहे अभिषेक सिंह को भी रेत के मुद्दे पर भाजपा द्वारा घेरा गया। सीधी से भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला नें तो इस मुद्दे को विधानसभा के पटल पर रखा और तत्कालीन कलेक्टर के स्थानान्तरण की मांग की थी। जिसके बाद तत्कालीन सीधी कलेक्टर अभिषेक सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया।



अब एक बार फिर प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गयी है और शिवराज सिंह फिर मुख्यमंत्री बन चुकें है। सीधी में अभी भी अवैध रेत उत्खनन जारी है, लेकिन भाजपा के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी शांत बैठ गयें हैं। अब रेत के खेल पर किसी का भी वक्तव्य नही आता।

भाजपा जिलाध्यक्ष पर लग रहें "रेत के खेल" में शामिल होनें के आरोप।
अभी हाल में ही रेत से भरा हाईवा अमिलिया और बहरी थाना के अन्तर्गत पकड़ाया था, और खबरों की मानें तो यह हाईवा सीधी भाजपा जिलाध्यक्ष इन्द्रशरण सिंह के करीबी जीतेन्द्र सिंह चौहान का था। अब यहां सवाल यह उठता है कि कांग्रेस सरकार के समय रेत के मुद्दे को लेकर सक्रिय रहनें वाले सीधी विधायक भी इस घटना पर चुप्पी साध गये हैं। यहां गौर करनें वाली बात ये भी है की, सीधी भाजपा जिलाध्यक्ष इन्द्रशरण सिंह चौहान पर भी अप्रत्यक्ष रूप से रेत के खेल में शामिल होनें के आरोप लगे, लेकिन उन्होनें भी इस पर कोई भी सफाई नही दी। 


अब इन सब बातों से यह साबित होता है की, सीधी में "रेत का खेल" विपक्ष में रहते हुये दोनों ही मुख्य पार्टियों के लिये विरोध जताने का एक मुद्दा मात्र है। क्योकी सरकार कोई भी हो सीधी में "रेत का खेल" बदस्तूर जारी है।

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