Monday, 4 May 2020

सिंधिया कोटे से 8 नेताओं के मंत्री बननें से, क्या बदलेगा विंध्य का समीकरण ! भाजपा के दिग्गजों का कटेगा पत्ता?


भोपाल: कोरोना के संकट के बीच एक बार फिर शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गयी हैं। माना यह जा रहा की आनें वालें तीन से चार दिनों में कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। खबरों की मानें तो,  इस सिलसिले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात हो चुकी है। और आनें वाले दो तीन दिनों में वों दिल्ली जाकर हाईकमान से भी मुलाकात करने वाले हैं। चर्चा है कि दूसरी बार शपथ लेने वाले मंत्रियों में कमलनाथ सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले सिंधिया समर्थकों को खास वरीयता दी जायेगी।



जिसकी झलक शिवराज सिंह के हाल में ही किये गये एक ट्वीट में भी दिखती है। जिसमें उन्होंने कहा है -
पिछली कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में त्राही-त्राही मचा दी थी। भ्रष्टाचार में लिप्त सरकार को उखाड़ फेंकने में मदद करने वाले ही असली लीडर, असली हीरो होते हैं। सिंधिया जी ऐसे नेता है, जिन्होंने प्रदेश का हित सर्वोपरि रखा और भ्रष्ट सरकार से अपने साथियों समेत किनारा किया। मैं मेरे उन सभी साथियों का भी सम्मान करता हूँ, जिन्होंने कमलनाथ जी की स्वकेंद्रित बँटाधार सरकार को गिराने के लिए और प्रदेश की उन्नति के लिए अपनी-अपनी राजनीतिक कारकिर्दगी को दाँव पे लगा दिया! सारे पदों को त्याग दिया! अति कठोर निर्णय लिए और उस पर अडिग रहे।
गौरतलब है की,  21 अप्रैल को मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के 29 दिन बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल का गठन किया था। हालांकि ये भी पंच परमेश्वर की तर्ज पर केवल 5 मंत्रियों वाला कैबिनेट ही था। लेकिन अब कयास लगाये जा रहें की जल्द ही शिवराज सिंह चौहान सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार होगा।



सिंधिया कोटे से ये 8 लोग हो सकते हैं मंत्री।
शिवराज सिंह चौहान के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती सियासी संतुलन बनाने की हैं। दरसअल, ज्योतिरादित्य सिंधिया कोटे से पहले ही 2 नेता को मंत्री बनाया जा चुका हैं। अब खबर है कि प्रभुराम चौधरी, प्रद्युमन सिंह तोमर, इमरती देवी, और महेन्द्र सिंह सिसौदिया के अलावा कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए बिसाहूलाल साहू, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, हरदीप सिंह डंग और एंदल सिंह कंसाना को भी मंत्री बनाए जाने पर अटकलें तेज़ हैं।



यदि सिंधिया कोटे से 8 मंत्री बनाए जाते है, तो विंध्य में इसका क्या होगा असर?
यदि सिंधिया कोटे से 8 मंत्री बनाए जाते है तो भाजपा से कई दिग्गजों के हाथ कुछ नहीं लगेगा। अभी की स्तिथि देखे तो भाजपा के खाते में 14 से 16 मंत्री पद आ सकते हैं। जबकि भाजपा की तरफ से करीब 30 दावेदार माने जा रहे हैं। यदि बात विंध्य की करें तो यहांं से दो पूर्व मंत्रियों सहित सीधी विधायक की दावेदारी प्रबल मानी जा रही है। 



राजेंद्र शुक्ला, विधायक रीवा।
यदि बात पूर्व मंत्री एवं रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला की करें तो कुछ दिनों पहले तक उनका मंत्री बनना तय था, लेकिन अब खबर यह की रीवा सहित विंध्य के कई भाजपा नेता उनके मंत्रिमंडल में शामिल किये जानें के खिलाफ है। बाकीं नेताओं का मानना है की, श्री शुक्ला पहले भी मंत्री रह चुकें हैं, अब दूसरों को भी मौका मिलना चाहिए। लेकिन इस सब के बाबजूद भी राजेंद्र शुक्ला सीएम शिवराज सिंह के करीबी मानें जातें हैं और संगठन में भी उनकी पकड़ मजबूत है, इस लिहाज से मंत्रिमंडल में उनको जगह मिल सकती है।



नागेन्द्र सिंह, विधायक नागोद।
अब बात करतें हैं विंध्य के दूसरे पूर्व मंत्री एवं नगोद विधायक नागेन्द्र सिंह की, नागेन्द्र सिंह वरिष्ठ होनें के साथ साथ अनुभवी भी हैं। वो पहले की भाजपा सरकारों में मंत्री भी रह चुकें हैं। साथ ही वो सांसद भी रह चुकें हैं। इस लिहाज से उनकों मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

केदारनाथ शुक्ला, विधायक सीधी।
दोनों पूर्व मंत्रियों के अलावा सीधी से भाजपा के वरिष्ठ  विधायक केदारनाथ शुक्ला भी इस बार मंत्री बननें के प्रबल दावेदारों में से एक हैं। हला की केदारनाथ शुक्ला एक ऐसे नेता हैं, जिनका नाम पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार में हर मंत्रिमंडल विस्तार में संभावित मंत्री के रूप में आता था, लेकिन अब तक एक भी बार मंत्री नही बन पायें हैं। साथ ही विधायक केदारनाथ शुक्ला एवं सीधी सांसद रीति पाठक का आपसी विरोध भी श्री शुक्ला को मंत्री बननें की राह में रोड़ा बन सकता है। साथ ही विधायक शुक्ला के बेबाक बोल भी उनके लिये मुसीबत खड़ी कर सकतें हैं। गौरतलब है की झाबुआ उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद केदारनाथ शुक्ला नें तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाये थे। जिसके लिये पार्टी नें उनके खिलाफ कारण बातओ नोटिस भी जारी किया था।



इन तीनों के अलावा विंध्य के कई और भी नेता हैं जिनके नाम की चर्चा मंत्रिमंडल में शामिल होनें की है। इन नेताओं में धौहनी विधायक कुवँर सिंह टेकाम, सिंगरौली विधायक रामलल्लू वैश्य, देवतलाव विधायक गिरिश गौतम एवं गुढ़ विधायक नागेन्द्र सिंह का नाम  भी शामिल हैं।



हला की, भाजपा नें शुरुआत में ही मंत्रिमंडल गठन में विंध्य से मीना सिंह को हिस्सेदारी देकर विंध्य तथा जातिगत समीकरण दोनों को ही साधने का प्रयास किया है। साथ ही सिंधिया कोटे से 8 मंत्री बनाए जानें की स्थिति में विंध्य के दिग्गजों के सपनों में पानी फिर सकता है।

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