Sunday, 31 May 2020

सीधी: कंटेनमेंट एरिया कोल्हूडीह में फिर मिले 3 कोरोना पॉजिटिव मरीज, आंकड़ा 15 तक पहुंचा।


सीधी: देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में भी कोरोना का कहर जारी है। अगर बात मध्यप्रदेश के विंध्य की करें तो अब यहां भी कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। विंध्य क्षेत्र के सीधी जिले में अब एक साथ 3 व्यक्तियों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आयी है। अब सीधी में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 15 हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीधी जिले में अभी अभी एक साथ 3 व्यक्तियों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आयी है। जिसके बाद सीधी में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 15 तक पहुंच गया है। लेकिन अभी तक मेडिकल बुलेटिन जारी नही किया गया है।

बता दें की, कोरोना पॉजिटिव निकले 3 व्यक्ति पहले से कंटेनमेंट एरिया घोसित किये गये कोल्हूडीह के हैं। इन तीन पॉजिटिव में से 2 व्यक्ति एक ही परिवार के हैं, इस परिवार में पहले से भी कुछ व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं। जबकि एक व्यक्ति पहले चुरहट में क्वॉरेंटाइन सेंटर में रहकर हाल ही में वहां से अपना 17 दिनों का कोर्स पूरा कर वापस गांव भेजा गया था।

हला की 4 व्यक्ति कोरोना की जंग जीतकर डिस्चार्ज भी हो चुकें हैं। जिसके अब सीधी में कोरोना ऐक्टिव मरीजों की संख्या 11 रह गयी है।

(सीधी में एक साथ 3 व्यक्तियों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आयी है, यह खबर सीधी के वरिष्ठ पत्रकार आर.बी सिंह के माध्यम से आयी है।)

लॉकडाउन 5.0 मध्यप्रदेश में भी 30 जून तक रहेगा जारी, जानिये क्या हैं नियम।


भोपाल: देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में भी कोरोना का संकट बरकरार है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसे देखते हुये केंद्र नें लॉक डाउन को 30 जून तक बढानें का फ़ैसला लिया है। इस लोक डाउन 5.0 को अनलाक 1.0 नाम दिया गया है। जिसे देखते हुये मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार नें भी लॉक डाउन को 30 जून तक जारी रखनें का फ़ैसला किया है।



मध्य प्रदेश में लॉकडाउन 5.0 के अनुसार, कंटेनमेंट क्षेत्र में प्रतिबंध जारी रहेंगा। आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर पूरे प्रदेश में रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक आवागमन प्रतिबंधित रहेगा । आठ जून से प्रदेश में सभी धार्मिक स्थलों को खोल दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।



प्रदेश वासियों को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी घोषणा की है।  इस बार लॉकडाउन में काफी राहतों के साथ सीएम ने कोरोना से बचाव के लिए नियमों का आवश्यक रूप से पालन करने की अपील भी की है। आइये जानते है की, मध्यप्रदेश में अब क्या रहेगा बंद और किसमें रहेगी छूट।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिलों में अधिक प्रभावित मोहल्ला/कॉलोनी इत्यादि क्षेत्र कंटेनमेंट एरिया होंगे। इनमें 30 जून, 2020 तक लॉकडाउन यथावत् लागू रहेगा। कंटेनमेंट क्षेत्रों में केवल आवश्यक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा प्रदेश का शेष क्षेत्र सामान्य क्षेत्र होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि रात्रिकालीन कर्फ्यू का समय अब रात्रि 9 बजे से सुबह 5 बजे तक होगा। इस दौरान अत्यावश्यक गतिविधियों को छोड़कर लोगों का आवागमन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।



कंटेनमेंट क्षेत्र के बाहर 8 जून 2020 से धार्मिक स्थल, सार्वजनिक स्थान पूजा स्थल, होटल, रेस्तरां, अन्य आतिथ्य सेवाएं तथा शॉपिंग मॉल प्रारंभ होंगे। अभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद रहेंगीं। परंतु 12वीं की परीक्षाओं हेतु विद्यालय खोले जाएंगे। बाद में स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक, प्रशिक्षण / कोचिंग संस्थान आदि को खोलने का निर्णय सभी लोगों के साथ परामर्श कर जुलाई में लिया जाएगा ।



मध्यप्रदेश में सिनेमा हॉल, व्यायामशाला, स्विमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थिएटर, बार और ऑडिटोरियम, सभा कक्ष मैरिज गार्डन आदि। सामाजिक / राजनीतिक / खेल / मनोरंजन / शैक्षणिक / सांस्कृतिक / धार्मिक कार्य और अन्य बड़ी सभाएं आदि गतिविधियां पूर्णत: बंद रहेंगी। इन्हें पुन: प्रारंभ करने का निर्णय बाद में लिया जाएगा।



राज्य में और राज्य के बाहर आने-जाने वाले वाहनों के लिए किसी प्रकार के पास की आवश्कता नहीं होगी। अत: पास चेकिंग की व्यवस्था समाप्त की जा रही है। पूरे प्रदेश में अंतर्राज्यीय बसों का संचालन 7 जून तक बंद रहेगा। तत्पश्चात इस पर निर्णय लिया जाएगा। इंदौर, उज्जैन तथा भोपाल संभाग सहित पूरे प्रदेश में फैक्टरी के संचालन में और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवहन हेतु बसें संचालित करने की अनुमति होगी। राज्य के अंदर सार्वजनिक परिवहन की बसें इंदौर, उज्जैन व भोपाल को छोड़कर अन्य सभी संभागों में 50 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालित हो सकेंगीं।



इंदौर, उज्जैन, नीमच और बुरहानपुर के नगरीय क्षेत्रों के बाजारों की एक चौथाई दुकानें बारी-बारी से खुलेंगीं। भोपाल के बाजारों की एक तिहाई दुकानें बारी-बारी से खुलेंगीं। देवास, खंडवा नगर निगम तथा धार एवं नीमच नगर पालिका क्षेत्र की आधी-आधी दुकानें बारी-बारी से खुलेंगीं परंतु स्टैंड अलोन दुकानें व मोहल्ले की दुकानें इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगीं। इनके अलावा शेष प्रदेश में दुकानों के खुलने पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।



सभी शासकीय और प्रायवेट कार्यालय इंदौर, उज्जैन और भोपाल नगर निगम क्षेत्र में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ और शेष प्रदेश में पूरी क्षमता से खोले जाएंगे। उन्हें स्क्रीनिंग और स्वच्छता का ध्यान रखना होगा। थर्मल स्केनिंग, हैंड वाश और सैनिटाइजर का प्रावधान सभी प्रवेश और निकास द्वारों और सामान्य क्षेत्रों में किया जाएगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। कार्यस्थलों के प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि श्रमिकों के बीच पर्याप्त दूरी हो, शिफ्ट के बीच पर्याप्त अंतराल हो, कर्मचारियों के भोजन के अवकाश का समय अलग-अलग हो।



मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि कोविड से सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर, कार्यस्थलों में और परिवहन के दौरान, मास्क पहनना अनिवार्य होगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग- व्यक्तियों को सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम 6 फीट की दूरी बनाएं रखनी चाहिए। सभी दुकानें, ग्राहकों के बीच शारीरिक दूरी सुनिश्चित करेंगी और एक समय में 5 से अधिक व्यक्तियों को दुकान मे प्रवेश की अनुमति नहीं देंगी। सार्वजनिक सभाएँ – बड़ी सार्वजनिक सभाएँ प्रतिबंधित रहेंगी। विवाह संबंधी समारोह में मेहमानों की संख्या 50 से अधिक नहीं। अंतिम संस्कार संबंधित कार्यक्रम में व्यक्तियों की संख्या 20 से अधिक नहीं। सार्वजनिक स्थानों पर थूकना दंडनीय होगा। सार्वजनिक स्थानों पर शराब, पान, गुटका, तंबाकू आदि का सेवन वर्जित है।

रीवा: राजकुमारी मोहेना के ससुर व उत्तराखंड के मंत्री सतपाल महराज एवं उनकी सास अमृता रावत की रिपोर्ट निकली कोरोना पॉजिटिव।


रीवा: देशभर में कोरोना का कहर जारी है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही है। इसी बीच खबर है की, रीवा राजकुमारी मोहेना कुमारी सिंह के ससुराल पक्ष में 22 लोंगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आयी है। कोरोना पॉजिटिव 22 लोंगों में राजकुमारी मोहना के ससुर व उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी शामिल हैं।



इससे पहले शनिवार को रीवा राजकुमारी मोहेना की सास एवं उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत कोरोना पॉजिटिव पाई गईं थी। उसके बाद लिये गये सैंपलों में, रविवार को मिली रिपोर्ट में सतपाल महाराज, उनके दो बेटे और बहुएं भी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। वहीं, कर्मचारियों के सैंपल में 17 लोग पॉजीटिव पाए गए हैं, जबकि बारह की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।



कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद अब कैबिनेट के साथ ही कई अधिकारियों को भी क्‍वारंटाइन किए जाने की संभावना है। कैबिनेट मंत्री महाराज 29 मई को कैबिनेट की बैठक में शामिल हुए। सरकार के प्रवक्‍ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि अब स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की जो भी गाइडलाइन होगी, मंत्री और अधिकारी उसका अनुपालन करेंगे।



बता दें की,  देहरादून की अहूजा पैथोलॉजी में शनिवार को रीवा राजकुमारी मोहेना कुमारी की सास अमृता रावत की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आयी थी। जिन्हें आइसोलेट किया गया था। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के विशेष कर्याधिकारी अभिषेक शर्मा नें इस बात की पुष्टि की थी। उन्होनें बताया था की, अमृता रावत की दो तीन दिन से तबियत खराब थी। जिसके बाद देहरादून की एक निजी लैब में उनकी कोरोना जांच हुई थी, जो पॉजिटिव पायी गयी थी।


शिवराज सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच, इमरती देवी की केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर से मुलाकात।


भोपाल: मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों एवं आगामी उपचुनावों के मद्देनजर, सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री इमरती देवी नें रविवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की है। इस मुलाकात से माना यह जा रहा है की, उपचुनाव की रणनीति एवं मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा हुई है। इस बैठक में ग्वालियर ग्रामीण के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष मोहन सिंह भी मौजूद रहे।



दरअसल रविवार को सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री इमरती देवी ने दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय कृषि मंत्री और ग्वालियर चंबल के दिग्गज बीजेपी नेता नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। मुलाकात के वक़्त उनके साथ ग्वालियर चम्बल के नेता मोहन सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान तीनों नेताओं में 24 सीटों पर उपचुनाव की तैयारियों तथा शिवराज सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बात हुई। केंद्रीय मंत्री तोमर से मिलने के बाद इमरती देवी ने भाजपा नेता और राज्यसभा उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात की।



बता दें कि, शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार एवं उपचुनाव से पहले सभी सिंधिया समर्थकों ने दिल्ली में जमावड़ा लगा दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई सिंधिया समर्थक नेताओं ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने के साथ ग्वालियर चंबल के बीजेपी के बड़े नेताओं में शुमार नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की है। वहीँ इससे पहले सभी पूर्व मंत्री और विधायकों ने भोपाल पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष वी डी शर्मा सहित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाकात की है।

MP उपचुनाव: अब कांग्रेस दलबदलू नेताओं के सहारे, प्रेमचंद गुड्डू की कांग्रेस में हुई "घर वापसी"।


भोपाल: मध्यप्रदेश में होनें वाले विधानसभा उपचुनावों के लिये अब कांग्रेस नें भी अपनी तैयारियां तेज कर दी है। कांग्रेस अब दलबदलू नेताओं के जरिए उपचुनाव की जंग जीतना चाह रही है। अब इसी कड़ी में, अभी कुछ दिन पहले ही भाजपा से निष्काषित किये गये प्रेमचंद गुड्डू एवं उनके बेटे अजीत बौरासी वापस कांग्रेस में शामिल हो गए है।



प्रेमचंद गुड्डू को पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा सहित रामनिवास रावत और कई नेताओं की मौजूदगी मे सदस्यता दिलवाई गई।इसके पहले वे पूर्व सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ से मिले। इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के साथ कांग्रेस के अन्य नेता वहां मौजूद रहे।



गौरतलब है की, प्रेमचंद गुड्डू कभी कांग्रेस के दमदार नेता हुआ करते थे, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले उन्होने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। आज एक बार फिर कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद गुड्डू ने कहा कि, आज मैं मानसिक रूप से अच्छा महसूस कर रहा हूं। जब मैं बीजेपी में गया ऐसी कोई रात नही थी जिसमे मुझे चैन से नींद आई हो। गुड्डू ने कांग्रेस छोड़ने का वजह ज्योतिरादित्य सिंधिया को बताया। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रताड़ना से मैंने काँग्रेस छोड़ी थी। उज्जैन का सांसद रहते हुए सिंधिया ने मेरा कोई काम नही होने दिए थे जिस कारण मुझे कांग्रेस छोड़नी पड़ी थी।



दरअसल, पिछले कुछ समय से ही प्रेमचंद गुड्डू की वापसी की चर्चा चल रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से उनकी मुलाक़ात के बाद से ही माना जा रहा था कि जल्द ही गुड्डू कांग्रेस में वापस आ जायेंगे। इसी बीच यह तब और भी साफ हो गया था, जब प्रेमचंद गुड्डू नें सिंधिया एवं तुलसी सिलावट पर जमकर हमला बोला था, और कहा था की वो फरवरी में ही भाजपा से इस्तीफ़ा दे चुके हैं, हला कि इसको बीजेपी ने भी गंभीरता से लिया और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।



अब यह देखना दिलचस्प होगा की ये दलबदलू जो कभी कांग्रेस को गच्चा देकर भाजपा के गोद में बैठ गये थे, अब फिर कांग्रेस में आकर आनें वाले विधानसभा उपचुनावों में क्या कांग्रेस के लिये संजीवनी बन सकेंगें। क्योकी दलबदलुओं को लेकर कांग्रेस में भी काफी अंतर्विरोध है। यहां तक की कई नेता गुड्डू की कांग्रेस वापसी के फेवर में नही थे। वही अब माना जा रहा है की, कांग्रेस उन्हें उपचुनाव में सांवेर से तुलसी सिलावट के खिलाफ उतार सकती है। प्रेमचंद गुड्डू दिग्गज नेताओं में गिने जाते है। वे इंदौर के सांवेर और आलोट से दो बार विधायक रहे हैं। वे उज्जैन संसदीय सीट से एक बार सांसद भी रह चुकें है।



देखिये वीडियो: प्रेमचंद गुड्डू नें क्या कहा।

Saturday, 30 May 2020

अजय सिंह नें स्व.जोगी की पूर्व सीएम अर्जुन सिंह एवं सीधी से जुड़ी यादें साझा करते हुये बताया की कैसे वो कलेक्टर से बनें राजनेता।


  • अजीत जोगी जितने अच्छे प्रशासनिक अफसर थे, उतने ही अच्छे राजनेता भी थे। उनकी कार्यशैली के कारण कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें पार्टी में शामिल किया था: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह।

भोपाल: छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री एवं सीधी के कलेक्टर रहे अजीत जोगी के निधन पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें गहरा दुख व्यक्त करते हुये स्व. जोगी के साथ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह एवं सीधी जिले से जुड़ी हुई यादें साझा करीं। बता दें की, दिल का दौरा पड़ने के बाद श्री जोगी लंबे समय से कोमा में थे। जिनका कल शुक्रवार को निधन हो गया था।



क्या कहा पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें स्व. श्री जोगी की याद में।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी को याद करते हुये पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें कहा की, मुझे याद है जोगी जी भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा उनका इस्तीफा मंजूर नहीं कर रहे थे। वोरा जी नहीं चाहते थे कि बेहतर प्रशासनिक अफसर नौकरी छोड़े। लेकिन जोगी जी अड़े थे कि उनका इस्तीफा मंजूर किया जाए। उस दौरान मुझे संदेश मिला कि मैं अपने पिता अर्जुन सिंह (दाऊ साहब) तक उनका संदेश पहुंचाऊं की उनका इस्तीफा मंजूर कराया जाए।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें कहा की उस दौरान मेरे पिता (दाऊ साहब) पंजाब के राज्यपाल थे। यह बात वर्ष 1985 की है। दाऊ साहब ने वोरा जी से कहा कि इनका इस्तीफा तत्काल मंजूर किया जाय, यही पार्टी का निर्देश है। जोगी जी का इस्तीफा मंजूर होते ही पार्टी ने उन्हें राज्यसभा टिकट दिया और चुनाव जीतकर राज्यसभा तक पहुंचे। जिस तरह वे प्रशासनिक सेवा में सफल रहे उसी तरह उन्होंने राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ी। राज्यसभा के बाद वे लोकसभा और फिर छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंंत्री बने।



स्व. अजीत जोगी को चेम्बर में बैठना पसंद नहीं था: अजय सिंह।
श्री सिंह नें कहा की, अजीत जोगी की कार्यशैली निराली थी। कलेक्टर रहते हुए उन्होंने कभी चेम्बर में बैठना पसंद नहीं किया। श्री सिंह नें कहा की, मुझे याद है जब वे सीधी कलेक्टर थे, उस दौरान वे पोर्च में बैठकर ही आमजन से मुलाकात करते और मौके पर ही उनकी समस्या का हल कर देते थे। इसका एक लाभ यह भी होता था कि लोग उनसे मुलाकात करने में झिझक नहीं करते थे। अपनी बात भी खुलकर कह देते थे। आमजन से साथ उठने बैठने से उन्हें जिले की खबरें भी मिलती रहती थीं, यदि कहीं कोई गड़बड़ होती थी तो पहली सूचना उन्हें आमजन से ही मिलती थी।



पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें कहा की, कई बार तो नेता मजाक में कहते थे कि कलेक्टर साहब के कारण तो उनके पास लोगों ने आना ही बंद कर दिया। यदि ऐसा ही रहा तो उनकी पूछपरख ही कम हो जाएगी। लेकिन यह भी सही है कि वे जिनते आमजन में लोकप्रिय थे, उनते ही नेताओं के बीच भी लोकप्रिय थे।



बता दें की, स्व. श्री जोगी का नाम छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री के तौर पर भी इतिहास में दर्ज हो गया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के करीबी रहे जोगी का संपर्क राजीव गांधी से होने के बाद वे IAS छोड़कर राजनीति में आ गए। राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले अर्जुन सिंह से ही जोगी ने राजनीतिक दांवपेच सीखे। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह के गृह जिले सीधी में बतौर कलेक्टर श्री जोगी की पोस्टिंग रही।



स्व. अजीत जोगी का, स्व. अर्जुन सिंह से जुड़ा एक किस्सा ये भी।
स्व. अजीत जोगी बतौर कलेक्टर काम करने से भी नहीं डरते थे। एक बार सूखा पडऩे के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने टेलीफोन पर राहत बांटने के मौखिक आदेश दिए थे, जिस पर उन्होंने राशि का आवंटन कर दिया।

पत्रकारिता लोकतंत्र का आधार स्तंभ, स्वतन्त्रता संग्राम में और आजादी के बाद देश निर्माण में हिन्दी पत्रकारिता का अभूतपूर्व योगदान: अजय सिंह।


भोपाल : मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर सभी पत्रकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि स्वतन्त्रता संग्राम में और आजादी के बाद देश व समाज निर्माण में हिन्दी पत्रकारिता का अभूतपूर्व योगदान रहा है। आज ही के दिन हिंदी भाषा में 'उदन्त मार्तण्ड' के नाम से पहला समाचार पत्र 30 मई 1826 को निकाला गया था। इसलिए इस दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता से एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने आगे कहा है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और आजादी के बाद भी पत्रकारिता ने देश में लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए बखूबी अपनी भूमिका का निर्वहन किया है ।

वर्तमान समय में देश के सामने जो भी चुनौतियां हैं उन चुनौतियों को शासन प्रशासन के सामने उजागर करने में हिंदी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है । आज पूरे देश में जब गरीबों असहाय को न्याय नहीं मिल पाता है ऐसी परिस्थितियों में एक सजग पत्रकार जब अपने उत्तरदायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए काम करता है तो वह समाज में आदर और प्रतिष्ठा का प्रतीक बन जाता है।

आज भी समाचार पत्र को जो सम्मान हासिल है उसे यह सम्मान दिलाने में लाखों लाख पत्रकार बंधुओं का श्रम और उनका काम करने का जज्बा बहुत बड़ी भूमिका का निर्वहन करता है । देश में पत्रकारिता के जो भी शिक्षण संस्थान हैं उन्हें और अधिक मजबूत करने एवं छात्रों को पत्रकारिता की ओर आकर्षित किए जाने की आवश्यकता है जिससे पत्रकार बंधु और अधिक दक्षता से परिपूर्ण होकर कार्य कर सकें। हिंदी पत्रकारिता दिवस के इस अवसर पर एक बार पुनः सभी पत्रकार बंधुओं को बहुत बहुत शुभ शुभकामनाएं।

लॉकडाउन 5.0: देश में लॉकडाउन 30 जून तक बढ़ा, जानें क्या रहेगा बंद और किसमें रहेगी छूट।


लॉकडाउन 5.0: देश में चल रहे कोरोना के संकट के बीच अब लॉकडाउन को 30 जून तक बढ़ानें का फ़ैसला लिया गया है। बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन का चौथा चरण का कल 31 मई को आखिरी दिन है। अब देश में लॉकडाउन 5.0 लागू हो गया है।अब ये 1 जून से 30 जून तक लागू रहेगा। लॉकडाउन 5.0 को
अनलॉक-1 का नाम दिया गया है। जिसमें शर्तों के साथ धार्मिक स्थल खुलेंगे। रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू रहेगा। इसको लेकर सरकार द्वारा गाइडलाइंस जारी की गयी है।



लॉकडाउन 5.0 की मुख्य बातें।
  • होटल और रेस्टोरेंट 8 जून से खुलेंगे।
  • 30 जून तक नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा।
  • 8 जून से शर्तों के साथ धार्मिक स्थल खोलने की इजाजत।
  • सामाजिक आयोजनों पर पाबंदी जारी रहेगी।
  • 8 जून से शॉपिंग मॉल खुल जाएंगे।
  • सिनेमाघर खोलने का फैसला जुलाई में लिया जाएगा।
  • फेज-3 में मेट्रो खोलने का फैसला होगा
  • जुलाई में स्कूल खोलने का फैसला होगा।
  • कंटेनमेंट जोन में 30 जून तक स्कूल बंद रहेंगे

इससे पहले, लागू हुये लॉकडाउन की अवधि।
गौरतलब है की, कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन का चौथा चरण का कल 31 मई को आखिरी दिन है। चौथा लॉकडाउन 18 मई से 31 मई तक के लिए लगाया गया था। इससे पहले 25 मार्च से 14 अप्रैल, 15 अप्रैल से 3 मई और 4 मई से 17 मई तक के लिए लॉकडाउन का एलान किया गया था।

डॉ. एस.बी खरे को हाई कोर्ट की फटकार, HC नें कहा- कोरोना आपदा के समय ट्रांसफर के खिलाफ मुकदमेबाजी उचित नही।


सीधी: अभी कुछ दिनों पहले ही सीधी में कोरोना संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गयी थी। जिसके तहत बर्षों से जमें हुये चिकित्सकों का तबादला किया गया था। जिले के सीएमएचओ एवं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन दोनों ही बदल दिये गयें थे। जारी आदेश के अनुसार सीधी में तत्कालीन सिविल सर्जन  डॉक्टर एस.बी खरे को जिला चिकित्सालय रीवा स्थानांतरित किया गया था।



जिसको लेकर डॉक्टर एस.बी खरे नाराज होके अपने स्थानांतरण के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंच गये थे। इस पर हाई कोर्ट ने डॉक्टर साहब को जमकर फटकार लगा दी। हाई कोर्ट ने सख्त लहजे पर कहा की कोरोना महामारी के समय सरकार ही जज है। वही तय करेगी कि किस डॉक्टर को कहां रखना है।



हाई कोर्ट ने कहा प्रभारी सिविल सर्जन जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए ट्रांसफर के खिलाफ याचिका दायर करना अनुचित है। याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी गई कि वह अभ्यावेदन दे और सरकार उसका निराकरण करे।



बता दें की, डॉ.एसबी खरे सीधी में प्रभारी सिविल सर्जन बतौर पदस्थ थे। उनका ट्रांसफर रीवा कर दिया गया। जिसके खिलाफ वे हाईकोर्ट चले आए। उनका तर्क यह था कि वे प्रथम श्रेणी के अधिकारी हैं। इस मामले में सक्षम अधिकारी ने ट्रांसफर आदेश नहीं निकाला। ट्रांसफर आदेश निरस्त किया जाए।



इस पर राज्य की ओर से साफ किया गया कि प्रशासनिक आवश्यकता के मद्देनजर सीधी से रीवा भेजा जा रहा है। कोरोना आपदा के समय यह आवश्यक था। साथ ही याचिकाकर्ता लंबे समय से सीधी में पदस्थ है। ऐसे में रीवा में उनकी अधिक आवश्यकता महसूस की गई।



हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को नसीहत दी कि कोरोना आपदा के समय इस तरह ट्रांसफर के खिलाफ मुकदमेबाजी उचित नहीं है। ऐसे समय में डॉक्टर को पूरा ध्यान मानव सेवा पर लगाना चाहिए। इसके साथ कोर्ट ने याचिका निराकृत कर दी।

तुलसी सिलावट के नेतृत्व में फिर 200 कांग्रेसियों नें भाजपा की सदस्यता ली, सीएम बोले आप ही "सिंधिया" आप ही "शिवराज"।


भोपाल: देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में भी कोरोना का कहर जारी है। कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इन्दौर में कोरोना का सबसे जादा संक्रमण है। लेकिन इन्दौर में कोरोना संकट के बीच, सांवेर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का कांग्रेस में सेंधमारी अभियान जारी है।



बता दें की, इन्दौर की सांवेर विधानसभा सीट जहां उपचुनाव होना है, से ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल करा रहे हैं। शुक्रवार को जलसंसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के नेतृत्व में सांवेर के 200 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी मौजूद रहे।



कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीजेपी ज्वाइन करने से खुश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि बीजेपी की जीत उपचुनावों में तय हो चुकी है। वहीं इस अवसर पर मौजूद जलसंसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि ये सभी सांवेर विधानसभा क्षेत्र से आने वाले बड़े सामाजिक लीडर हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज ने भाजपा ज्वाइन करने वाले नए सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा ‘आप ही तुलसी सिलावट, आप ही भाजपा, आप ही शिवराज सिंह चौहान और आप ही ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, आपको ही यह चुनाव लड़ना और जीतना है’।



सीएम शिवराज ने कहा की, मै मुख्यमंत्री बनते ही व्यवस्थाओं में जुट गया और आज प्रदेश में COVID19 के टेस्ट और इलाज की पर्याप्त व्यवस्थाएं बना दी है, जबकि कमलनाथ तो आईफा जैसे आयोजनों में ही लगे रहते थे। उन्हें जो काम करना था, वो किया नहीं और जो नहीं करना था, उसी में लगे रहते थे। उन्होंने कहा हमने तय किया कि मध्यप्रदेश की धरती पर जो भी प्रवासी भाई-बहन आयेंगे, उनके लिए बसे लगायेंगे, चाय-नाश्ता, भोजन करवायेंगे, घर पहुंचायेंगे और कोई तकलीफ नहीं आने देंगे। मैं आप सभी कार्यकर्ताओं को भी प्रणाम करता हूं कि आपने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। फिर से मध्यप्रदेश बनायेंगे, फिर से इसे खड़ा कर देंगे


मुख्यमंत्री ने कहा किसानों के साथ कर्जमाफी बहुत बड़ा धोखा था, कांग्रेस ने केवल 6 हजार करोड़ रुपये दिये हैं। मैं तो ऐसे रास्ते निकालूंगा, जिससे किसानों के खाते में डायरेक्ट पैसा जाये। दुरावस्था प्रदेश की नहीं होने देंगे, फिर से मध्यप्रदेश बनायेंगे, फिर से इसे खड़ा कर देंगे। आज प्रदेश में COVID19 से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं और इसे परास्त करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। प्रदेश में कोरोना की रिकवरी रेट अब 54% हो गई है।

Friday, 29 May 2020

सीधी: कंटेनमेंट एरिया कोल्हूडीह में फिर मिले 2 कोरोना पॉजिटिव मरीज, आंकड़ा 12 तक पहुंचा।


ग्राम कोल्हूडीह में पाए गए दो कोरोना संक्रमित मरीज, कलेक्टर श्री चौधरी ने कंटेनमेंट एरिया का निरीक्षण कर कड़ी चौकसी रखने के दिए निर्देश।

सीधी: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. एल. मिश्रा ने बताया कि आज दिनांक 29.05.2020 को प्राप्त 89 जाँच रिपोर्टों में 2 लोगों की कोरोना जाँच रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। ये दोनों ही व्यक्ति ग्राम कोल्हूडीह के निवासी हैं और पूर्व में कोरोना पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि सभी पॉजिटिव केसों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराने की कार्यवाही की जा रही है तथा उनके सम्पर्क में आए परिवार के अन्य सदस्यों को संस्थागत क्वारेंटाईन करने की कार्यवाही की जा रही है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.  मिश्रा ने बताया कि ग्राम कोल्हूडीह में पाए जाने वाले केसों के दृष्टिगत ग्राम कोल्हूडीह में सघन सर्वे किया जा रहा है। अभी तक 346 व्यक्तियों की सैंपलिंग कर जाँच हेतु नमूना भेजा गया है।

कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी द्वारा कंटेनमेंट एरिया कोल्हूडीह निरीक्षण कर कड़ी चौकसी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर श्री चौधरी ने लोगों से अपील की है कि कोरोना वायरस से संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाईजरी का पालन करें। सभी व्यक्ति अपने घरों पर ही रहें। केवल अत्यावश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें तथा इस दौरान भी विशेष सतर्कता और सावधानी रखें।

घर से निकलने पर मास्क अनिवार्य रूप से लगा कर रखें। नियमित अंतराल में अपने हाथ को साबुन से धोते रहें। उन्होंने कहा गाँव के जो व्यक्ति/श्रमिक बाहर से आ रहे हैं, वो 14 दिनों तक अपने घरों में रहें, किसी से भी मिले नहीं और शारीरिक दूरी बनाकर रखें। कलेक्टर श्री चौधरी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को बुखार, सर्दी, खांसी, साँस लेने में तकलीफ़ हो तो इसकी जानकारी तत्काल जिला स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 07822-297521 या 07822-250123 पर उपलब्ध करायें।

छ.ग. के पूर्व सीएम एवं सीधी कलेक्टर रहे अजीत जोगी के निधन पर, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें जताया दुख।


भोपाल: छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री एवं सीधी के कलेक्टर रहे अजीत जोगी का आज निधन हो गया। श्री अजीत जोगी के निधन पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें गहरा दुख व्यक्त किया है। अजय सिंह नें ट्वीट करते हुये कहा- " छग के प्रथम मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। वे पूज्य दाऊ सा के निकट सहयोगियों में से रहे। उनका अवसान मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। परमात्मा दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे तथा शोकाकुल परिजनों को आघात सहने की सामर्थ्य प्रदान करे"।


श्री जोगी का मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. श्री अर्जुन सिंह से गहरा नाता था। स्व. श्री अर्जुन सिंह नें श्री जोगी के सेवाभाव और नेतृत्व क्षमता को पहचाना और उन्हीं के सुझाव पर श्री जोगी भारतीय प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में आये। स्व. अर्जुन सिंह एवं स्व. जोगी के इसी रिश्ते और प्रेम का जिक्र पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें अपनें ट्वीट में करते हुये श्री जोगी के निधन पर दुख व्यक्त किया।



बता दें की, दिल का दौरा पड़ने के बाद श्री जोगी लंबे समय से कोमा में थे। उन्हें वेंटिलेटर से ऑक्सीजन दिया जा रहा था। वहीं आज फिर से कार्डियक अरेस्ट हुआ। इस दौरान डॉक्टरों की टीम जोगी की स्थिति कंट्रोल करने की कोशिश की। लेकिन अजीत जोगी की हालत में सुधार नहीं हुआ और दुनिया को अलविदा कह दिया।



9 मई को सुबह नाश्ता के दौरान अजीत जोगी की तबीयत बिगड़ गई थी। दिल का दौरा पड़ने के बाद तुरंत रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अमित जोगी ने ट्वीट कर कहा ​कि पापा की तबियत बहुत गम्भीर है। ढाई करोड़ छत्तीसगढ़वासियों की प्रार्थनाओं और ईश्वर की इच्छा पर ही अब सब कुछ निर्भर है।



गौरतलब है की, छतीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र से काफी गहरा नाता रहा है। वो सीधी के कलेक्टर रह चुकें हैं तथा शहडोल लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकें है। अगर बात सीधी की करें तो यहां के लोग पूर्व सीएम से व्यक्तिगत जुड़ाव रखतें हैं, वजह यही है की वो यहां के कलेक्टर रह चुकें है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सीधी के कलेक्टर रहे अजीत जोगी का निधन।


सीधी/ रायपुर: छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री एवं सीधी के कलेक्टर रहे अजीत जोगी का निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के बाद जोगी लंबे समय से कोमा में थे। उन्हें वेंटिलेटर से ऑक्सीजन दिया जा रहा था। वहीं आज फिर से कार्डियक अरेस्ट हुआ। इस दौरान डॉक्टरों की टीम जोगी की स्थिति कंट्रोल करने की कोशिश की। लेकिन अजीत जोगी की हालत में सुधार नहीं हुआ और दुनिया को अलविदा कह दिया।

बता दें की, 9 मई को सुबह नाश्ता के दौरान अजीत जोगी की तबीयत बिगड़ गई थी। दिल का दौरा पड़ने के बाद तुरंत रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अमित जोगी ने ट्वीट कर कहा ​कि पापा की तबियत बहुत गम्भीर है। ढाई करोड़ छत्तीसगढ़वासियों की प्रार्थनाओं और ईश्वर की इच्छा पर ही अब सब कुछ निर्भर है।

गौरतलब है की, छतीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र से काफी गहरा नाता रहा है। वो सीधी के कलेक्टर रह चुकें हैं तथा शहडोल लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकें है। अगर बात सीधी की करें तो यहां के लोग पूर्व सीएम से व्यक्तिगत जुड़ाव रखतें हैं, वजह यही है की वो यहां के कलेक्टर रह चुकें है। श्री जोगी के निधन  पर सीधी में भी शोक छा गया है।

दलबदलू नेताओं की "घर वापसी" के मसले पर दो खेमे में बंटी कांग्रेस, उपचुनाव में क्या होगा भविष्य?


भोपाल: मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं उनके समर्थक 22 विधायकों के पार्टी छोड़ने एवं 15 महीने में ही सरकार गंवाने के बाद भी कांग्रेस की आंतरिक कलह शांत होनें का नाम नही ले रही। प्रदेश में होनें वाले आगामी 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के पहले मध्यप्रदेश कांग्रेस, खेमों में बंट गयी है। जिसकी वजह से पार्टी आलाकमान को प्रदेश जिलाध्यक्षों के नाम दिल्ली से तय करने पड़ रहें हैं। साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का मामला भी इसी वजह से अधर में लटका है।



क्या है वजह?
उपचुनाव से ठीक पहले खेमों में बंटी दिख रही प्रदेश कांग्रेस के पीछे की ताजा वजह चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी हैं, जिन्हे टीम कमलनाथ उपचुनाव में टिकट देना चाहती है लेकिन पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह एवं पूर्व सहकारिता मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह इस बात का विरोध कर रहें हैं। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित भिंड कांग्रेस की पूरी जिला इकाई भी पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के इस बात का समर्थन कर रही की, चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को टिकट ना दिया जाय।


चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की वापसी के साथ ही, कमलनाथ खेमे के नेता उन्हें भिंड के मेहगांव से विधानसभा उपचुनाव लड़ाना चाहते हैं। यहां ब्राह्मण मतदाताओं का बाहुल्य है। इससे दोनों नेता और उनके समर्थक आमने-सामने आ गए हैं। कमलनाथ के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति जैसे नेता हैं। वहीं दिग्विजय सिंह के खेमें में अजय सिंह, डॉ. गोविंद सिंह, केपी सिंह सहित भिंड जिले की पूरी कांग्रेस इकाई शामिल है।


आइये जानतें हैं, कौन है चौधरी राकेश सिंह और किस समय उन्होनें कांग्रेस छोड़ी थी।
वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ तत्कालीन नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था उस दौरान चलते विधानसभा सत्र में उपनेता रहे चौधरी राकेश ने कह दिया था कि वे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करते हैं। इस तरह कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था, और राकेश ने भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके छोटे भाई मुकेश चौधरी को मेहगांव से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए थे। 2018 में फिर भाजपा ने राकेश को भिंड से टिकट दिया जहां से वे हार गए थे उसके बाद से ही वे कांग्रेस में आने के लिए प्रयासरत थे। 



सिंधिया समर्थक मानें वाले चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया की वजह से फिर से कांग्रेस में हुई थी वापसी।
मध्यप्रदेश के इतिहास में यह एकमात्र घटनाक्रम है जब विधानसभा सत्र के बीच उपनेता प्रतिपक्ष ने अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया हो। चौधरी राकेश सिंह ने कांग्रेस को यह झटका दिया था। लेकिन जब भाजपा में उनकी दाल नही गली तो वो वापस कांग्रेस में लौट आए। गौरतलब है की, चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया समर्थक नेता माना जाता है। एक बार फिर उन्होंने शिवपुरी में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब लोकसभा का नामांकन भरा था तब चौधरी राकेश भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे।


आखिर कांग्रेस के लिये क्या है, गद्दारी की परिभाषा।
अपनी गलतियों से ना सीखनें का दूसरा नाम ही मध्यप्रदेश कांग्रेस है। आखिर दलबदलुओं कें नाम पर कांग्रेस क्यूं बंटी हुई है। टीम कमलनाथ एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसते हैं और उन्हें गद्दार कहतें हैं, लेकिन यही टीम कमलनाथ  चौधरी राकेश सिंह, प्रेमचंद गुड्डू एवं नारायण त्रिपाठी जैसे लोंगों को गद्दार नही मानती। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यूं। इस बात को टीम कमलनाथ एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस को समझना होगा, अन्यथा उपचुनाव का रिजल्ट क्या होगा किसी को बतानें की जरुरत नही है।



खेमों में बंटे नेता।
प्रदेश में खींचतान का ही असर रहा कि पिछले दिनों प्रदेश के ग्यारह जिलों एवं बाद में 3 जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति दिल्ली से की गई, जबकि आमतौर पर यह जिम्मा प्रदेश कांग्रेस का रहता है। जहां तक नेता प्रतिपक्ष की बात है तो खेमेबाजी के चलते एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही। जहां दिग्विजय एवं अजय सिंह खेमा कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे डॉ गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनवाना चाहता है, वहीं कमलनाथ खेमा उनके नाम का विरोध कर रहा है। प्रदेश के कई बड़े चेहरे फिलहाल कमलनाथ के साथ हैं, जिनमें बाला बच्चन, सज्जन सिंह वर्मा, तरुण भनोत, सुखदेव पांसे जैसे नेता शामिल हैं। ये सभी कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी व पूर्व स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति भी नाथ के साथ हैं। यह खेमा बाला बच्चन को नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहता है। इसके पीछे दलील है कि वे उपनेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। वहीं सज्जन सिंह वर्मा का नाम भी रेस में बताया जा रहा है। दूसरी ओर दिग्विजय सिंह के खेमे में अजय सिंह, गोविंद सिंह, जयवर्द्धन सिंह, जीतू पटवारी, आरिफ अकील व के पी सिंह जैसे नेता हैं।



उपचुनाव में प्रत्याशियों का मामला अटका।
गौर करनें वाली बात यह है कि, आपसी मतभेद के चलते जल्द ही प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के लिए प्रत्याशियों के नाम भी नहीं तय हो पा रहे हैं। खेमों में बंटी कांग्रेस में सबसे बड़ा मुद्दा बन रहा है - कांग्रेस छोड़कर बीजेपी गए नेताओं की घरवापसी। इनमें दो नाम काफी चर्चा में हैं- चौधरी राकेश चतुर्वेदी और पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू। कमलनाथ खेमा चतुर्वेदी को भिंड की मेहगांव सीट से उतारना चाहता है। लेकिन अजय सिंह सहित दिग्विजय खेमे के कई नेता उन्हें टिकट दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। इसी तरह, गुड्डू की पार्टी में वापसी व टिकट देने का विरोध कमलनाथ खेमा कर रहा है।

MP में पोस्टर वार: अब राजधानी भोपाल में, सांसद प्रज्ञा ठाकुर के गुमशुदा होनें के लगे पोस्टर।


भोपाल: देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में भी कोरोना का कहर जारी है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन इसी बीच कोरोना को लेकर मध्यप्रदेश में पोस्टर वार भी जारी है। पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ के गायब होनें के पोस्टर लगे, बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया केे लापता होने के पोस्टर लगे और अब मध्यप्रदेश के भोपाल से सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के लापता होनें के पोस्टर लगें हैं।



राजधानी में जगह-जगह ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर के लापता होने का दावा किया गया है। भोपाल में कई जगह लगे ये पोस्टर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को लापता बता रहे हैं। पोस्टर में ये भी कहा गया है कि जिले में कोरोना संकट के समय सांसद लापता हो गयी है। वहीं पोस्टर में लापता कि तलाश लिखते हुए ये भी पूछा जा रहा है कि इस संकट की घड़ी में जब राजधानी की जनता परेशान है। प्रज्ञा सिंह ठाकुर कहां लापता हो गयी है। 



हला की, यह पहली बार नहीं है जब किसी नेता के गुमशुदगी के पोस्टर लगे हैं। इससे पहले कमलनाथ के साथ उनके सांसद बेटे नकुलनाथ तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुमशुदा होने के पोस्टर भी प्रदेश में लग चुकें हैं और इस मसले पर सियासत भी गरम थी। 



गौरतलब है की, कांग्रेस भी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के गायब होने पर सवाल उठा चुकी है। बता दें की, कोरोना संकट में भी भोपाल सांसद के सक्रिय न होने पर, सियासत तेज हो गयी है। कांग्रेस ने पूछा था क्या सांसद गुमशुदा हैं। अगर ऐसा है तो उन्हें ढूंढकर लाने या पता बताने वाले को वो इनाम देगी। कांग्रेस नेता रवि सक्सेना ने भोपाल सांसद को ढूंढ कर लाने वाले को 5000 रुपये और प्रशस्ति पत्र देने का ऐलान किया है।




Thursday, 28 May 2020

सिंधिया पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का बड़ा बयान, कहा- वह कोई जनप्रतिनिधि नहीं।


शिवपुरी: ज्योतिरादित्य सिंधिया एक ऐसा नाम, जिनकी धमक कांग्रेस में रहते हुये चारों ओर थी। लेकिन उन्होनें जैसे ही भाजपा की सदस्यता ली, उनके घोर समर्थक रहे नेताओं नें ही उन्हें आड़े हाँथों लेना चालू कर दिया। कांग्रेस सिंधिया पर लगातार हमला कर रही है। लेकिन अब भाजपा के अन्दर से भी सिंधिया और उनके समर्थकों का विरोध चालू हो गया है। सबसे पहले पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू नें सिंधिया के खिलाफ मोर्चा खोला, बाद में पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया नें और अब केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर नें ऐसी बात कह दी जो की सिंधिया समर्थकों को शायद ही पसंद आये।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सिंधिया के पोस्टर मुद्दे पर साफ तौर पर कहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कोई जनप्रतिनिधि नहीं है, जब होंगे तब पोस्टर लगा लेना। इसके साथ ही सिंधिया को उपचुनाव में मुख्य चेहरे के रुप में देखने की बात पर भी चुप्पी साध ली।

बता दें कि श्योपुर प्रवास से लौटे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पोहरी रेस्ट हाउस में ठहरे थे। जहां भाजपा कार्यकर्ताओ से बातचीत की और आनें वाले विधानसभा चुनाव को लेकर नकारात्मक बातों को भुलाकर तैयारी करने के लिए कहा। वही सिंधिया के पोस्टर बार पर मीडिया के सवालों का जबाब देते हुए कहा कि सिंधिया अभी कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। जब बनेंगे तब लगा लेना पोस्टर। केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद सिंधिया की ग्वालियर संभाग में मुख्य भूमिका होगी या नही, इस पर सियासत गर्म हो गयी है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ग्वालियर में बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के लापता होने के पोस्टर लगाए गए। साथ ही तलाश करने वाले पर 5100 रुपए इनाम भी घोषित किया गया था। जिसके बाद राजनितिक बवाल शुरु हो गया और ग्वालियर से कांग्रेस नेता सिद्धार्थ राजावत ने कहा कि सिंधिया के पोस्टर ग्वालियर में ही नहीं भिंड, मुरैना, अशोकनगर और गुना में भी लगाए जाएंगे।


"स्पीक अप इंडिया": अजय सिंह का ट्वीट- गरीबों एवं मजदूरों को 10 हजार रुपये की सहायता एवं 200 दिन का रोजगार दिया जाए।


भोपाल: कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर पार्टी के "स्पीक अप इंडिया" अभियान की शुरुआत की है। सोनिया ने कहा कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण गरीबों का बुरा हाल है लेकिन सरकार उन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। कांग्रेस ने गुरुवार को इस अभियान की शुरुआत की और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की।



पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी "स्पीक अप इंडिया" अभियान में हुये शामिल।
मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा "स्पीक अप इंडिया" में शामिल होते हुये, सरकार से की गयी मांग इस प्रकार है।

  • देश के सभी ग़रीबो को दस हजार रुपये की तुरंत सहायता राशि दी जाये।
  • छोटे उद्योगों को सरकार वित्तीय सहायता दे।
  • सभी प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक सकुशल और नि:शुल्क पंहुचाने की व्यवस्था करे।
  • सभी मजदूरों को मनरेगा में साल में कम से कम 200 दिन का रोजगार दिया जाए।

गौरतलब है की "स्पीक अप इंडिया' अभियान की शुरुआत करते हुए कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि देश विभाजन के बाद की सबसे बड़ी त्रासदी से गुजर रहा है। गरीब, मजदूर छोटे कारोबारी और किसान परेशान हैं। देश में हर व्यक्ति उनकी पीड़ा को महसूस कर रहा है, लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। हमने बार-बार सरकार को चेताया लेकिन सरकार समझने को तैयार नहीं है। इसलिए कांग्रेस ने भारत की आवाज बुलंद करने का सामाजिक बीड़ा उठाया है। सरकार को तुरंत खजाने का ताला खोलना चाहिए और गरीबों को राहत देनी चाहिए। 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ये मांग दोहराते हुए कहा कि कोरोना की सबसे ज्यादा मांग गरीबों पर पड़ी है। उन्होंने कहा, ‘मजदूरों को हजारों किमी पैदल भूखा-प्यासा चलना पड़ रहा है। देश को भारी संख्या में रोजगार देने वाले उद्योग एक के बाद एक बंद हो रहे हैं। हिन्दुस्तान को कर्ज की जरूरत नहीं है, आज देश को पैसों की जरूरत है। गरीब जनता को पैसे की जरूरत है।’

शहडोल: कोरोना संकट के बीच मानवता को शर्मसार करने वाली घटना, नाबालिग लड़की से रेप के बाद की गयी हत्या।


शहडोल: जहां एक तरफ देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में कोरोना का कहर जारी है, वहीं दूसरी ओर समाज में कुछ ऐसे भी लोग घूम रहें जो बलात्कार जैसे जघन्य कृत्य करनें से भी बाज नहीं आ रहें। ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से सामनें आया है। जहां एक नाबालिग लड़की से रेप के बाद हत्या कर दी गयी।



प्राप्त जानकारी के अनुसार, रेप के बाद लड़की का गला दबाकर हत्या की कोशिश की गयी और फिर उसे मरा समझकर आरोपी  झाड़ियों में फेंक कर चला गया था।एक दिन बाद पुलिस को वो बेहोशी की हालत में पड़ी मिली। बुरी तरह ज़ख्मी और गंभीर हालत में लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसने दम तोड़ दिया।



ये घटना जैतपुर के कुम्हारी गांव की है। मृतका 11 वीं कक्षा की छात्रा थी। परिवार का कहना है घटना वाले दिन वो मंदिर जाने के लिए घर से निकली थी। जब लड़की देर तक घर नहीं लौटी तब उसकी तलाश शुरू की गयी। परिवार ने पुलिस में सूचना दी और उसके बाद गांव के बाहर उसकी तलाश शुरू हुई। एक दिन बाद लड़की बुरी तरह ज़ख्मी हालत में झाड़ियों में बेहोश पड़ी मिली।



परिवार वाले और पुलिस फौरन उसे लेकर अस्पताल गए। डॉक्टरों ने लड़की को बचाने की हरसंभव कोशिश की लेकिन वो लगातार बेहोशी की हालत में रही और उसे बचाया नहीं जा सका। बेहोश होने के कारण लड़की के बयान नहीं लिया जा सका। पुलिस ने परिवार वालों से पूछताछ के बाद संदेह के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ जारी है।

MP में पुलिस निरीक्षकों के तबादले, सीधी से आदित्य प्रताप सिंह का स्थानांतरण रीवा किया गया।


सीधी: देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में में भी कोरोन का संकट जारी है। रोजाना कोरोन पॉजिटिव मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। लेकिन कोरोन संकट के बीच भी प्रदेश में तबादलों का दौर जारी है। पुलिस विभाग में लगातार फेरबदल देखने को मिल रहा है। एक बार फिर पुलिस निरीक्षकों के तबादले किये गए हैं। 

आज जारी की गयी सूची में सीधी जिले में पदस्थ पुलिस निरीक्षक आदित्य प्रताप सिंह का स्थानांतरण रीवा कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय से जारी सूची के मुताबिक पांच निरीक्षकों के जिले बदले गए हैं।

  • पुष्पा चौहान, नीमच से मंदसौर।
  • शिव कुमार यादव, मंदसौर से नीमच।
  • नलिन बुधोलिया, खंडवा से सीहोर।
  • आदित्य प्रताप सिंह, सीधी से रीवा
  • राजेश सिंह, पीटीएस तिगरा से सागर



भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा में कोरोना के लक्षण दिखनें के बाद अस्पताल में किया गया भर्ती, सिंधिया नें किया ट्वीट।


Covid 19: देशभर में कोरोना का कहर जारी है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा में कोरोना वायरस के लक्षण मिलने के बाद उन्हें गुरुवार दोपहर गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खबरों की मानें तो उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया है।



पात्रा मूलतः ओडिशा के रहने वाले हैं, और उन्होनें 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में पुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि वह बीजू जनता दल के उम्मीदवार पिनाकी मिश्र से हार गए थे। संबित पात्रा न्यूज़ चैनलों में आने वाले भारतीय जनता पार्टी के एक लोकप्रिय चेहरा हैं। वे सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते हैं। पात्रा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता होने के साथ साथ सर्जन भी हैं। वह हिंदू राव अस्पताल में बतौर मेडिकल ऑफिसर भी काम कर चुके हैं। पात्रा ओएनजीसी के बोर्ड में नॉन ऑफिशियल डायरेक्टर्स में से एक हैं।



हला की अस्पताल में भर्ती होने से पहले गुरुवार सुबह से ही संबित पात्रा अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर सक्रिय हैं। पात्रा गुरुवार सुबह से ही कई ट्वीट कर चुके हैं, आज ही उन्होंने भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक ट्वीट रीट्वीट किया था।



सिंधिया नें ट्वीट कर उनके जल्दी स्वस्थ होनें की कामना की।
पात्रा के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके शुभचिंतक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नें इंडियन एक्सप्रेस के ट्वीट को रीट्वीट करते हुये संबित पात्रा के जल्द स्वस्थ होनें की कामना की है।

Latest Post

ललित सुरजन का निधन पत्रकारिता के लिए बड़ी क्षति: अजय सिंह।

ललित सुरजन में मायाराम सुरजन के पूरे गुण विद्यमान थे: अजय सिंह। भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि मै...