Wednesday, 8 April 2020

शिवराज सरकार नें प्रदेश में लगाया "अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून" (ESMA), पूर्व सीएम कमलनाथ नें उठाये सवाल।


भोपाल: देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में भी कोरोना का कहर जारी है। मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच प्रदेश की शिवराज सरकार अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लगा दिया है। ESMA लगाने के बाद अति आवश्यक सेवा से जुड़े कर्मचारी अधिकारी अवकाश पर हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। अति आवश्यक सेवा से जुड़े व्यक्तियों को सरकार के निर्देश का पालन करना होगा ।जिसमें उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई होगी।इस कानून के लागू होने के बाद सरकार को हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए कई प्रकार के अधिकार प्राप्त हो जाते हैं।



प्राप्त जानकारी के अनुसार, ESMA लागू करने से पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने कुछ चुनिंदा अधिकारियों के साथ बैठक की और बाद यह तय किया गया कि प्रदेश में ESMA लगाना जरूरी है। अब कोई भी व्यक्ति आवश्यक सेवाओं के लिए इंकार नहीं कर सकेगा।



सीएम शिवराज सिंह चौहान ने किया ट्वीट।
सीएम शिवराज सिंह ने ट्वीट कर लिखा -  नागरिकों के हित को देखते हुए कोरोना के बेहतर प्रबंधन के लिए आज से सरकार ने मध्यप्रदेश में एस्मा लागू कर दिया है। एसेंशियल सर्विसेज़ मैनेजमेंट एक्ट (Essential Services Management Act) जिसे ESMA या हिंदी में ‘अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून’ कहा जाता है, तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।”




आइये जानतें है ESMA के बारे में।
ESMA कानून संसद द्वारा पारित अधिनियम है, जिसे 1968 में लागू किया गया था। हड़ताल को रोकने के लिए यह कानून लगाया जाता है। ESMA लागू करने से पहले इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को समाचार पत्र या अन्य माध्यमों से सूचित किया जाता है। यह कानून अधिकतम छह माह के लिए लगाया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध और दण्डनीय है। कानून का उल्लंघन कर हड़ताल पर जाने वाले किसी भी कर्मचारी को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।



पूर्व सीएम कमलनाथ नें खड़े किये सवाल।
कोरोना संकट के बीच प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा ESMA लगाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सवाल खड़ा किया है। कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा है कि- कोरोना महामारी के इस दौर में प्रदेश में सभी शासकीय डॉक्टर्स, मेडिकल स्टाफ़, अधिकारी -कर्मचारी बेहद ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर प्रदेश की जनता के हित में रात-दिन कार्य कर रहे है,संकट की इस घड़ी में सब एक है,ऐसे में प्रदेश में “ESMA“ लागू का निर्णय,क़ानून का भय,समझ से परे ?




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