Tuesday, 21 April 2020

आज दोपहर शिवराज मंत्रिमंडल का गठन संभव, सिंधिया के लाख प्रयासों के बावजूद उनके गुट से अभी केवल दो लोग ही बनेंगें मंत्री।


भोपाल: देश के साथ साथ मध्यप्रदेश में भी कोरोना का कहर जारी है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या रोजाना बढ़ रही है। ऐसे में सीएम शिवराज सिंह पर आरोप लग रहें है की, वो वन मैन आर्मी बननें के चक्कर में मंत्रिमंडल गठन नही कर रहें और प्रदेशवासियों की जान से खिलवाड़ कर रहें है। जिसे देखते हुये आज शिवराज सरकार के मंत्रीमंडल के गठन की पूरी संभावना है।

शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बनने के 29 दिन बाद आज मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का गठन कर सकतें हैं। खबरों की मानें तो चार से छह नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।शपथ ग्रहण का वक़्त अभी तय नहीं है। राजभवन से सूचना मिलने के बाद ही मंत्रिमंडल के गठन का वक़्त तय किया जाएगा। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया के लाख प्रयासों के बावजूद उनके गुट से अभी केवल दो लोगों को मंत्री बनाया जायेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिंधिया खेमे में से तुलसी सिलावट, गोविंद राजपूत और बिसालू लाल सिंह में से किन्हीं दो को मंत्री बनाया जा सकता है। सिंधिया ने अपने समर्थक पूर्व विधायकों को यह आश्वस्त किया है कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल के विस्तार के समय उन सब को भी मंत्री बनाया जाएगा। शिवराज मंत्रिमंडल कोरोना को देखते हुए बनाया जा रहा है और फिलहाल इसका पूरा ध्यान कोरोना संक्रमण से निपटने पर ही होगा।

भाजपा से ये हो सकतें हैं मंत्री।
अगर बात भारतीय जनता पार्टी की करें तो, मंत्रिमंडल के लिए गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है। साथ ही कमल पटेल और मीना सिंह का भी नाम चर्चा में है।

23 मार्च को शिवराज ने सीएम पद की ली थी शपथ।
शिवराज सिंह चौहान ने 23 मार्च को राजभवन में सादे समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। कोरोना संकट को देखते हुए उन्होंने अकेले शपथ ली थी। बिना मंत्रिमंडल के ही शिवराज लगातार कोरोना वायरस संकट के दौरान काम करते रहे हैं और इसे लेकर वे विपक्ष के निशाने पर भी आए।पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कुछ दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि देश का इकलौता राज्य है, जहां कोरोना संकट में स्वास्थ्य मंत्री और गृहमंत्री नहीं है।

20 मार्च को गिर गई थी कमलनाथ सरकार।
दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता में आई थी, लेकिन वरिष्ठ नेता सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों के कांग्रेस से बगावत के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को लगभग एक माह पहले 20 मार्च को त्यागपत्र देना पड़ा था।

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