Friday, 20 March 2020

सीएम कमलनाथ नें किया इस्तीफे का ऐलान, राज्यपाल से मिलकर सौंपेंगे अपना इस्तीफ़ा।


भोपाल: मध्यप्रदेश की सियासत में चल रहे घमासान के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज सीएम हाउस में प्रेस क्रॉन्फ्रेंस  कर अपनें इस्तीफे का ऐलान कर दिया है।थोड़ी देर बाद वे राज्यपाल लालजी टंडन को इस्तीफा सौंपेंगे।

सीएम ने कहा कि 11 दिसंबर 2018 को विधानसभा का परिणाम आया, कांग्रेस सबसे ज्यादा सीट जीतकर आई थी।17 दिसंबर को मैने सीएम की शपथ ली। आज 20 मार्च है लघबग 15 महीनों में प्रयास रहा प्रदेश को नई दिशा दे। 40-45 साल के राजनीतिक जीवन में विकास पर विश्वास रखा।प्रदेश पूछ रहा है मेरा कसूर क्या है। बीजेपी को 15 साल मुझे 15 महीने। 15 महीने में मैने क्या गलती की। हमारे 22 विधायकों को बीजेपी ने कर्नाटक में बंदी बनाने का काम किया।पूरा प्रदेश इसका गवाह है।बीजेपी ने लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की है।प्रदेश के साथ धोखा करने वालों क जनता कभी माफ नहीं करेगी।बागियों को जनता माफ नहीं करेगी।ये विश्वासघात मेरे साथ नहीं मध्यप्रदेश की जनता के साथ है।प्रदेश के विकास का एक नया नक्शा बन रहा था लेकिन बीजेपी मेरी सरकार को अस्थिर करने के प्रयास में लगी रही।

इस दौरान कमलनाथ ने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि  15 महीने में तीन लाख किसानों का कर्जा माफ किया। दूसरे चरण में साढ़े सात लाख किसानों के कर्ज माफी की प्रक्रिया जारी है।तीसरे चरण में 1 जून से कर्ज माफी की तीसरी प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं। भाजपा ने हमारी सरकार के साथ षडयंत्र कर किसानों और जनता के साथ धोखा किया। 15 महीने में प्रदेश को माफिया मुक्त करने का अभियान किया। लेकिन भाजपा नहीं चाहती थी कि माफिया के खिलाफ अभियान चले। बीजेपी शासन काल में माफिया को बढ़ावा मिला। बीजेपी ने विधायकों को तोड़ने के लिये करोड़ो खर्च किये। 15 महीने में हमने मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की।

कमलनाथ ने आगे कहा कि प्रदेश को विश्वपटल पर पहुंचाने के लिये प्रयास किये।  युवाओं को रोजगार देने की कोशिश की। रामवनगमन पथ , गौ माता सरक्षण के लिये गौशाला बनाई। हम प्रदेश को सुरक्षित भयमुक्त बनाना चाहते हैं ये भाजपा को रास नहीं आया।बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या की है।15 महीने में हमने अपने वचनपत्र में से 400 वचनों को पूरा किया। इस दौरान सिंधिया पर हमला करते हुए कहा कि धोखा देने वालों को जनता माफ नहीं करेगी।हम कर्तव्य के पद पर चलेंगे।न झुकेंगे।

गौरतलब है की, गुरूवार देर रात मध्यप्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम में एक बड़े उलटफेर के चलते स्पीकर एन पी प्रजापति ने सोलह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिये हैं। ये वही कांग्रेस के बागी विधायक हैं जो पिछले दस दिनों से बेंगलुरू में डेरा डाले हुए हैं। इनमें सुरेश धाकड़, रक्षा संतराम सरोनिया, जजपाल सिंह जज्जी, विजेंद्र सिंह, रघुराज कंसाना, ओपीएस भदौरिया, मुन्नालाल गोयल, गिर्राज दंडोतिया, कमलेश जाटव, रणवीर सिंह जाटव, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, हरदीप सिंह डंग और मनोज चौधरी ,एन्दल सिह कंसाना, बिसाहू लाल सिंह शामिल हैं।

इससे पहले गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को शुक्रवार यानि आज बहुमत साबित करने के लिये कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि शुक्रवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराया जाए। 

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