Wednesday, 15 January 2020

इन्दौर:" ये रिश्ता क्या कहलाता है"? राजनीति के दो धुर विरोधी, जब दिखे एक साथ।


इंदौर: मध्य प्रदेश के इन्दौर में मकर संक्रांति के अवसर पर, राजनीति के दो कट्टर विरोधियों को एक साथ एक मंच पर गले मिलते देख वहां उपस्थित लोग हैरान हो गये।
मकर संक्रांति पर कुछ ऐसी ही तस्वीरें देखने को मिलीं, जब राजनीति के धुर विरोधी कहे जाने वाले भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय एवं मध्य-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जब मिले तो दोनों ने एक दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया। दिग्विजय सिंह ने मालवी पगड़ी कैलाश विजयवर्गीय को पहनाई और कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी पगड़ी उतारकर दिग्विजय सिंह को पहना दी।

सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अहम किरदार एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा भाजपा के कद्दावर नेता एवं महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बीच राजनैतिक खींचतान किसी से छिपी हुई नहीं है। मुद्दा कोई भी हो दोनों नेता एक दूसरे पर निशाना साधने से नही चूकते। लेकिन इसी खींचतान के बीच सियासत के दोनों सूरमा जब एक मंच पर गले मिल जाएं तो सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म होना स्वाभाविक है।

पगड़ी पहनाकर किया एक दूसरे का स्वागत।
बुधवार को इंदौर की स्मार्ट सड़क पर जब ये दोनों नेता मिले तो दोनों ही एक दूसरे को गले लगा लिया और फिर दिग्विजय सिंह ने तुरंत कैलाश विजयवर्गीय को कॉफी ऑफर कर दी। कहा- चलो कॉफी पीते है। इस दौरान उनकी पुरानी यादें ताजा हो आयीं। दोनों नेता इस दौरान ठहाके लगाते नज़र आए।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी की टीम देश के सबसे साफ शहर इंदौर की स्मार्ट सड़क का जायजा लेने पहुंची थी। इसमें कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह भी शामिल थे। उसी दौरान जब कैलाश विजयवर्गीय मौके पर पहुंचे तो दिग्विजय सिंह ने आगे बढ़कर कैलाश विजयवर्गीय को गले लगा लिया। फिर क्या था, मेल मुलाकात के बीच ही विजयवर्गीय ने दिग्विजय सिंह को मालवी पगड़ी पहना दी।दिग्विजय सिंह ने भी मालवी पगड़ी पहनाकर विजयवर्गीय का स्वागत उनके अंदाज में कर दिया।


कैलाश विजयवर्गीय नें इसे सौजन्य भेंट बताया।
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय नें इसे सौजन्य भेंट बताया, उनका कहना है कि एमपी की यही खासियत है कि राजनेताओं के बीच भले ही मतभेद हों लेकिन व्यक्तिगत संबंध हमेशा ही मधुर रहते हैं। जबकि दिग्विजय सिंह इस मुलाकात पर कुछ नहीं कह रहे हैं। लेकिन उनके समर्थक इसे राजनीति की अच्छी परंपरा और सकारात्मक राजनीति बता रहे हैं। उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी का कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंदिता अपनी जगह लेकिन यह मुलाकात संस्कारी व्यवहार का उदाहरण है।

राजनैतिक जानकारों के मुताबिक, विजयवर्गीय अपनी गिरफ्तारी से बचनें के लिये यह सब कर रहें।
इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों भी चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। जब मध्यप्रदेश में कैलाश विजयवर्गीय को चौतरफा घेरने के लिए कांग्रेस पूरी ताकत लगा रही है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा कर गिरफ्तारी की बात कह रही है। राज्य के गृहमंत्री बाला बच्चन भी जल्द गिरफ्तारी की बात कह रहे हैं, तो ऐसे में सियासत के 'चाणक्य' दिग्विजय सिंह, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से गर्मजोशी से मिलनें के क्या मायने है।
राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि ये मुलाकात तो सिर्फ बहाना है। दरअसल कैलाश विजयवर्गीय अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए कांग्रेस की शरण में पहुंच गए हैं और कांग्रेस नेताओं को अपने पुराने संबंध याद दिला रहे हैं।उन्हें आस है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उनकी मदद अवश्य करेंगे।

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