Friday, 15 November 2019

म.प्र: भाजपा में 50 की उम्र पार करनें वाले जिला अध्यक्ष होंगे बाहर, सीधी जिला अध्यक्ष डॉ.राजेश मिश्रा भी 50 पार के फार्मूले में।


भोपाल / सीधी: मध्यप्रदेश में भाजपा जिला स्तर पर अपने संगठन को और भी मजबूत करनें की तैयारी कर रही है। इसके लिए पहले से पदस्थ जिला अध्यक्षों जगह पर पर दूसरे व्यक्ति को जिला संगठन को मजबूत करने का दायित्व दिया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार नए जिला अध्यक्षों को बनाने के लिए 50 की उम्र की सीमा रखी गई है। यानी पचास की उम्र पार कर चुके नेता पहले ही इस दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
यदि ऐसा होता है तो कई वरिष्ठ भाजपा जिला अध्यक्ष इस फार्मूले के तहत अपनी कुर्सी गवां बैठगें।

50 की उम्र पार करनें वाले जिला अध्यक्ष होंगे बाहर।
मध्यप्रदेश भाजपा के जिला अध्यक्षों में कई जिला अध्यक्ष 50 साल की उम्र सीमा पार कर चुके हैं। इन पर भी 50 पार का फार्मूला चलाया जा सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कह रहे हैं कि इस बार हर हाल में यह फार्मूला लागू किया जाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उम्र के साथ ही कुछ जिलाध्यक्षों को निष्क्रियता और उदासीनत के कारण भी उन्हें बदला जा सकता है।

सीधी भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. राजेश मिश्रा भी 50 पार के फार्मूले में।
मध्यप्रदेश के सीधी जिले के भाजपा अध्यक्ष डा. राजेश मिश्रा की भी कुर्सी, 50 के उम्र के फार्मूले के तहत फसती हुई दिख रही।


बता दें, डॉक्टर राजेश मिश्रा सीधी के लिये एक जाना पहचाना नाम है, उन्होनें राजनीति की शुरुआत बहुजन सामज पार्टी से करते हुये विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हे हार का सामना करना पड़ा था। बाद में वे भाजपा में सम्मलित हो गये। 2018 के मध्य-प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा नेतृत्व ने, तत्कालीन सीधी जिला अध्यक्ष श्री लालचंद्र गुप्ता को हटाकर डॉक्टर राजेश मिश्रा को भाजपा जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया गया था, जिस पर काफी बबाल हुआ था, और अपदस्थ तत्कालीन अध्यक्ष लालचंद्र गुप्ता, थोड़े दिन बाद लोकसभा चुनाव 2019 के पहले अपनें समर्थकों सहित भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे सम्मलित हो गये थे, और आज वो मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष है।

डा.राजेश मिश्रा नें भाजपा जिला अध्यक्ष के रुप मे संगठन को मजबूती प्रदान की, जिसका रिजल्ट विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनावों में दिखा और भाजपा नें पहले के चुनावों से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया।
अब यह देखना बेहद दिलचस होगा की, एक बेहतरीन परफॉरमेंस वाले जिला अध्यक्ष को क्या उम्र की सीमा में बांधकर उन्हे पद से हटा दिया जायेगा?
सीधी के साथ साथ इन जिला अध्यक्षों की कुर्सी पर भी खतरा।
  • दो बार जिला अध्यक्ष रह चुके होशंगाबाद के हरिशंकर जायसवाल 50 पार फार्मूले के तहत बाहर हो सकते हैं। 
  • लगातार पार्टी की पराजय के कारण आलीराजपुर के किशोर शाह को हटाए जाने की चर्चा है।
  • हरदा जिले के अमरसिंह मीणा और रायसेन जिले में धर्मेंद्र चौहान को निष्क्रियता के कारण बदला जाएगा।
  • सागर में भी प्रभुदयाल पटेल पर उदासीन रवैये के कारण नया चेहरा लाया जा सकता है। 
  • विदिशा के राकेश सिंह जादौन से भी प्रदेश संगठन काफी नाराज है।
  • ग्वालियर के देवेश शर्मा की भी यही स्थिति है।
  • शिवपुरी में वीरेंद्र रघुवंशी, श्योपुर के गोपाल आचार्य, मुरैना के केदार सिंह यादव का नाम परिवर्तन सूची में है।
  • पन्ना के सदानंद गौतम दो बार जिलाध्यक्ष रहे, रीवा में विद्याप्रकाश श्रीवास्तव का भी नाम लिस्ट में।
  • कटनी के जिलाध्यक्ष पीतांबर टोपनानी, मंडला के जिलाध्यक्ष रतन ठाकुर, बालाघाट में नरेंद्र रंगलानी, छिंदवाड़ा में नरेंद्र राजू परमार, इंदौर में गोपीकृष्ण नेमा को उम्र के कारण हटाया जा सकता है।
  • खंडवा के हरीश कोटवाले को लगातार दो बार अध्यक्ष बनने के बाद हटाया जा सकता है।
  • सतना जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी के नाम पर सांसद गणेश सिंह असहमत हैं।
  • भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन सहित ग्रामीण जिलाध्यक्षों को अलग-अलग बदलने की तैयारी है।
  • नीमच के हेमंत हरित यादव, रतलाम के राजेंद्र सिंह लूनेरा, मंदसौर के राजेंद्र सुराना,खरगोन में परसराम चौहान, बड़वानी में ओम खंडेलवाल, धार में डॉ. राज वरफा, शाजापुर के नरेंद्र सिंह बैस, आगर-मालवा के दिलीप सखलेचा, देवास के नंदकिशोर पाटीदार को बदला जाएगा।

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