Saturday, 5 October 2019

NFHS रिपोर्ट के अनुसार, सीधी जिले के बच्चों में कुपोषण और बौनेपन की शिकायत अत्यधिक।



सीधी: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक सीधी ज़िले में 5 साल तक की उम्र के बच्चों में कुपोषण की शिकायत अत्याधिक है।
जिले में बच्चों में कुपोषण का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, और बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं। पिछले दिनों आई  रिपोर्ट के अनुसार  सीधी ज़िले में करीब 2500 बच्चे अति कुपोषित पाए गए । इसके अलावा ज़िले के करीब 23 हजार बच्चों में बौनेपन के लक्षण पाए गए ।

क्या कहती है, NFHS की रिपोर्ट।
सीधी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था जस की तस  बदहाल बनी हुई है। पिछले दिनों किये गए सर्वे में ज़िले में कुल 2518 बच्चे अति कुपोषित पाए गए ।नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे  (NFHS) के अनुसार 0 से 5 साल तक के बच्चों में 41.39 फीसदी बच्चे जिले भर में कुपोषण के शिकार पाए गए। जिले भर में 19,913 बच्चे गम्भीर रूप से बौनेपन का शिकार हो चुके हैं। मध्यम रूप से बौनेपन का शिकार हुए बच्चों की संख्या 23 हजार से अधिक है।

तत्कालीन कलेक्टर अभिषेक सिंह के समय दस्तक अभियान मे सीधी रहा था अव्वल।
स्वाथ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 58.8 प्रतिशत बच्चों की उंचाई सामान्य पाई गई है। जिला प्रशासन ने दस्तक अभियान का हवाला दिया जिसमें घर-घर जाकर इलाज की व्यवस्था की गई और पुनर्वास केंद्र बनाए गए। 80 बिस्तरों वाले इस कुपोषित पुनर्वास केंद्र में 14 दिन बच्चे को मां के साथ रखा जाता है और और कुपोषित बच्चे का पोषण आहार देकर इलाज किया जाता है।
गौरतलब है की दस्तक अभियान के तहत तत्कालीन कलेक्टर अभिषेक सिंह ने एक बेहतर पहल की थी, यहां तक की कलेक्टर ने अपनें सरकारी आवास को भी अस्पताल मे परिवर्तित कर दस्तक अभियान के तहत बच्चों के इलाज की व्यवस्था की थी, और सीधी जिला दस्तक अभियान में अव्वल रहा था, कलेक्टर के इस कार्य के लिये सीएम कमल नाथ ने भी तारीफ की थी, आज प्रशासन उसी दस्तक अभियान का हवाला दे रहा, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर तो राजनीति के शिकार होकर स्थानांतरित हो गये और सीधी मे स्वास्थ्य व्यव्स्था जस की तस रह गयी।

पंचायत मंत्री क्या कहतेंं है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल का मानना है कि सीधी जिले में ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई जिले में कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार में कुपोषण से निजात दिलाने के लिये तेजी से काम भी चल रहा है।
अब देखना होगा की शासन कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को कितनी गंभीरता से लेता है।

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