Monday, 7 October 2019

म.प्र में निकाय चुनावों पर सियासत तेज, कांग्रेस और भाजपा दोनों एक-दूसरे पर हमलावर।


भोपाल: मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव को लेकर सियासत तेज होती दिख रही, कमलनाथ कैबिनेट द्वारा महापौर और नगरपालिका अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता के बजाय पार्षदों से कराये जानें वाले अध्यादेश पर राज्यपाल लालजी टंडन की रोक की वजह से अब प्रदेश में सियासत तेज हो गई है, सत्ताधारी कांग्रेस और बिपक्ष भाजपा के लोग अब इस मसले को लेकर एक दुसरे पर हमलावर हो गये है।
भाजपा जहां पहले वाली प्रत्यक्ष प्रणाली से ही चुनाव की मांग कर रही,और ऐसा ना होनें पर सड़क पर उतरनें की बात कर रही तो कांग्रेस राज्यपाल को भाजपा के दवाब में ना काम करनें की सलाह दे रही, अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा की अन्तिम निर्णय क्या होता है, क्युकी कुछ ही मनीनों बाद मध्य-प्रदेश में निकाय चुनाव प्रस्तावित है।

अध्यादेश पर रोक लगने से राज्यपाल पर कांग्रेस नेता और राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।  उन्होंंने कहा कि राज्यपाल को राजधर्म का पालन करना चाहिये।
दरअसल, प्रदेश में निकाय चुनाव का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। जिसे देखते हुए सरकार ने कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद दो अध्यादेश राज्यपाल के पास भेजे थे। लेकिन राज्यपाल लालजी टंडन ने पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दी है, लेकिन मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव से जुड़े अध्यादेश को फिलहाल रोक दिया है। इस अध्यादेश को लेकर नगरीय निकाय मंत्री जयवर्धन सिंह राज्यपाल से मिल भी चुके हैं।

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की राज्यपाल से अपील।
राज्यपाल द्वारा अध्यादेश को अबतक मंज़ूरी नहीं दिए जाने पर कांग्रेस राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने उन्हें राजधर्म
का पालन करने की अपील की है। वहीं, कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने भी बयान दिया है कि राज्यपाल को अध्यादेश को मंज़ूरी देना चाहिए। उन्होंने आरोप भी लगाया कि राज्यपाल बीजेपी के दबाव में काम कर रहे हैं।

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