Sunday, 6 October 2019

कमलनाथ सरकार के महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली वाले अध्यादेश पर राज्यपाल की रोक।


भोपाल:  कमलनाथ सरकार नगरीय निकाय चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करना चाहती है। अध्यादेश पारित किया गया है कि नगरपालिका अध्यक्ष एवं महापौर के चुनाव अब सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि 25 साल पहले की तरह पार्षदों के द्वारा किए जाएंगे लेकिंन अब राज्यपाल ने इस अध्यादेश को रोक दिया है।
दरअसल, महापौर एवं नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से करने संबंधी प्रस्ताव को बीते महीने मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव के तहत प्रदेश में महापौर औक नगर पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन पार्षदों द्वारा किया जाना है, वहीं, बीजेपी द्वारा इस प्रक्रिया का विरोध किया जा रहा है, बीजेपी ने निकाय चुनाव की अप्रत्यक्ष प्रक्रिया को मंजूरी नहीं देने के लिए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था। वहीं, राज्यपाल लालजी टंडन द्वारा के इस अध्यादेश पर रोक लगाने के बाद से ही मध्‍य प्रदेश में सियासत तेज हो गई है।मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष,अप्रत्यक्ष चुनाव के अध्यादेश रोक के बाद कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे के सामनें आ गयें है, और एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे।

राज्‍यपाल का कदम।
प्राप्त जानकारी के अनुसार निकाय चुनाव का कार्यकाल दिसंबर तक है। ऐसे में सरकार ने कैबिनेट से मंजूरी के बाद दो अध्यादेश राज्यपाल को अंतिम मंजूरी के लिए भेजे थे। इनमें से एक पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे और दूसरा मेयर यानी महापौर एवं नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव से जुड़ा था। राज्यपाल लालजी टंडन ने पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दी है, लेकिन मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव से जुड़े अध्यादेश को फिलहाल रोक दिया है। इस अध्यादेश को लेकर नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह राज्यपाल से मुलाकात भी कर चुके हैं।

राज्यपाल राजधर्म का पालन करें: विवेक तन्खा।
राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने राज्यपाल से राजधर्म का पालन करने की अपील की है। जबकि कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल का कहना है कि राज्यपाल को अध्यादेश को मंजूरी देनी चाहिए, लेकिन बीजेपी के दबाव में राज्यपाल काम कर रहे हैं। उन्हें दबाव में काम नहीं करना चाहिए। सरकार के जो भी फैसले हैं, उन्हें मान लेना चाहिए।

मैं कोई रबर स्टैंप नहीं है: राजयपाल
बता दें कि हाल ही में राज्यपाल लालजी टंडन ने सरकार को स्पष्ट संकेत दिया है। पत्रकारों को इंटरव्यू के लिए बुलाकर उन्होंने अपना मैसेज दे दिया था। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। यहां कोई रबर स्टैंप नहीं है।" उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के काम में मेरी कोई रुचि नहीं, लेकिन असाधारण स्थिति अथवा संविधान का उल्लंघन होने पर अंतिम अस्त्र और वीटो अधिकार मेरे पास है।

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