Sunday, 27 October 2019

भाजपा प्रदेश नेतृत्व द्वारा, सीधी विधायक के खिलाफ इतनी जल्दी कार्यवाही की वजह, कहीं विधायक का सीधी सांसद से आपसी मतभेद तो नहीं?


सीधी / भोपाल: विश्व की सबसे बड़ी कार्यकर्ता आधारित एवं अनुशासन वाली पार्टी का दावा करनें वाली भाजपा में सब कुछ ठीक नही चल रहा, जिसका सबसे बड़ा उदहारण सीधी भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला द्वारा अपनें ही प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ़ अभी हाल में ही दिया गया एक बयान है, झाबुआ उपचुनाव हारने के बाद  भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सीधी से विधायक केदारनाथ शुक्ला ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की काबिलियत पर सवालिया निशान खड़े कर दिए और यह तक कह डाला कि उन्हीं के असक्षम नेतृत्व के चलते पार्टी चुनाव हारी है ।शुक्ल ने यहां तक कह दिया कि  राकेश सिंह के नेतृत्व में पार्टी चौपट हो रही है और उन्हें जल्द पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना चाहिए। 

केदारनाथ शुक्ला का इतना बोलते ही पार्टी में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पार्टी के प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा ने केदारनाथ शुक्ल की इस बयान बाजी को अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया।
महामंत्री भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश विष्णु दत्त शर्मा द्वारा जारी बयान के मुताबिक, झाबुआ विधानसभा उपचुनाव के परिणाम को लेकर सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ला के वक्तव्य को भारतीय जनता पार्टी अनुशासनहीनता मानती है। उन्होंने जो कहा है वह पार्टी की रीति नीति के तहत नहीं आता। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह पर अक्षमता के जो आरोप लगाए हैं ,उसके संबंध में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के उपरांत उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 

भाजपा के इतिहास में शायद पहली बार इतनी जल्द कार्यवाही हुई। इससे पहले ऐसे कई उदहारण रहे है जब भाजपा में लोगों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानबाज़ी की लेकिन उनपर कोई कार्यवाही नही की गई, कुछ दिनों पहले ही पार्टी के दो विधायक, नारायण त्रिपाठी एवं शरद कोल ने तो खुले आम बगावती तेवर अपनाते हुये मुख्यमंत्री कमल नाथ एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा को बुरा भला कहते हुये कांग्रेस में जानें की बात कही थी, तब भी भाजपा नें उन पर कोई कार्यवाही नही की थी,  हला की बाद में दोनों विधायक फिर भाजपा नें वापस लौट गये।
पार्टी के एक अन्य सीनियर नेता रघुनंदन शर्मा भी गाहे-बगाहे शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मोर्चा खोलते रहते हैं और अभी भी उन्होंने केदारनाथ शुक्ल की राय से इत्तेफाक रखते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए।लेकिन उन पर कार्रवाई की चर्चा तक नहीं हुई।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा की, आखिर सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला पर इतनी जल्दी कार्यवाही क्यूं? कहीं इसके पीछे सीधी सांसद रीति पाठक तो नही?

क्युकिं सीधी से भोपाल तक राजनैतिक गलियारों में ,शुक्ल के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को सीधी जिले में चल रही सांसद और विधायक के बीच तकरार से जोड़कर देखा जा रहा है। 

दरअसल सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ल और सांसद रीति पाठक के रिश्ते बिल्कुल समान्य नही है, और दोनों एक दुसरे के बारे मे मीडिया में भी बयानवाजी करनें से पीछे नही हटते। हालत तो यहां तक पहुंच गये थे की सीधी विधायक द्वारा सीधी सांसद पर व्यक्तिगत छींटाकशी की गयी थी, जिसके जवाब में सांसद रीति पाठक ने, सीधी विधायक के मानसिक स्थिति पर ही सवालिया निशान लगा दिया था, और शिवराज सिंह को बीच बचाव करना पड़ा था।

सीधी सांसद रीति पाठक प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के खेमे की मानी जाती है, और सीधी विधायक के खिलाफ इतनी जल्दी कार्यवाही किये जानें के पीछे सीधी भाजपा की गुटवाजी भी जिम्मेदार है। और अब इस कार्यवाही से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जा रहा है ,आखिर अनुशासनहीनता के नाम पर कार्यवाही कुछ चिन्हित लोगों के खिलाफ ही क्यूं?

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