Tuesday, 29 October 2019

कांतिलाल भूरिया का, विधायक पद शपथ ग्रहण कार्यक्रम 31अक्टूबर को। मंत्रिमंडल विस्तार एवं प्रदेश अध्यक्ष के नाम का भी ऐलान संभव।


भोपाल: झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करनें वाले कांतिलाल भूरिया राजधानी पहुंच गए हैं। भूरिया गुरूवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। इसके साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार का ऐलान भी हो सकता है। खबर तो यह भी आ रही कि इसी दिन प्रदेश कांग्रेस को नया अध्यक्ष भी मिल सकता है।मंगलवार को राजधानी में जिला कांग्रेस कार्यालय पर भूरिया का स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कांग्रेसाध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने बताया कि भूरिया की ऐतिहासिक जीत कांग्रेस के लिए कई मायने रखती है। इसके अलावा भूरिया कांग्रेस क सीनियर नेता हैं, उन्होंने पार्टी के लिए कई स्तर पर बड़ा योगदान दिया है। दीवाली के मौके पर आई उनकी जीत की खबर ने कांग्रेस के लिए रौशनी और मिठास का काम किया है।

31 अक्टूबर को विधायक पद की शपथ ग्रहण।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उप चुनाव में जीते कांतिलाल भूरिया 31 अक्टूबर को विधायक पद की शपथ ग्रहण लेंगें शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सरकार के सभी मंत्री, विधायक, पार्टीजन मौजूद रहेंगे। जानकारी के मुताबिक भूरिया को विधानसभा में सुबह 11:30 बजे विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति शपथ दिलाएंगे।

मंत्रिमंडल विस्तार की भी खबर।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भूरिया के विधानसभा में शामिल होने के बाद उन्हें उनके कद और अनुभव के हिसाब से पद दिए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसके लिए मौजूदा मंत्रियों के पदों में बदलाव करने की योजना भी तैयार की गई है। बताया जा रहा है कि ऐसे मंत्री, जिनके पास एक से ज्यादा विभाग मौजूद हैं, उनसे कुछ विभाग कम किए जा सकते हैं। इसके अलावा कुछ मंत्रियों के विभागों को इधर से उधर भी किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार सम्भवत: 31 अक्टूबर की शाम को हो सकता है। बताया जा रहा है मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से विस्तृत चर्चा भी की है। 

प्रदेश अध्यक्ष के लिए नए नाम का ऐलान भी किया जा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ,31 अक्टूबर को होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही इसी दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए नए नाम का ऐलान भी किया जा सकता है। करीब डेढ़ साल पहले अरुण यादव की जगह अध्यक्ष बनाए गए कमलनाथ के सीएम बनने के बाद से इस बात की कवायद जारी है कि अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी दूसरे नेता को दी जाए। इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ,बाला बच्चन और जीतू पटवारी तक के नामों की चर्चाएं उठती रही हैं। लेकिन सहमती ना बन पानें की वजह से यह ऐलान रुका हुआ है। इधर हाल ही में कांग्रेस के कद्दावर मंत्री सज्जन सिंह वर्मा द्वारा दिए गए भूरिया को अध्यक्ष बनाए जाने के बयान को लेकर कहा जा रहा है कि संभवत: पार्टी भूरिया को ही यह जिम्मेदारी दे सकती है। 
उम्मीद की जा रही है मुख्यमंत्री कमलनाथ मंगलवार की मुलाकात में कांग्रेस आलाकमान से मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष पद पर भी मोहर लगवा कर लाएंगे। 

भूरिया को सत्ता या फिर संगठन में जगह देनें पर कांग्रेस के साथ साथ भूरिया भी असमंजस में।
झाबुआ उपचुनाव में जीत के बाद विधायक कांतिलाल भूरिया का नाम जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर विकल्प के रूप में चर्चा में आया, भूरिया खुद असमंजस मे पड़ गये, उनकी पसंद सरकार में  हिस्सेदारी हैं। चुनाव में उन्हे डिप्टी सीएम प्रोजेक्ट किया गया था। कांतिलाल इससे कम कुछ नहीं चाहते और इसके लिए अब लाबिंग भी शुरू हो गई है।

दिग्विजय सिंह ने कहा, मुख्यमंत्री करेंगे फैसला।
झाबुआ सीट पर जीत के साथ ही कांतिलाल भूरिया की ताजपोशी को लेकर अब कांग्रेस मुश्किल में है। भूरिया को सत्ता या संगठन में जगह देने की मजबूरी पर मंथन तेज हो गया है। उपचुनाव में कांतिलाल भूरिया को डिप्टी सीएम प्रोजेक्ट करने के बाद कांग्रेस में नवनिर्वाचित विधायक को सत्ता में जगह देने को लेकर चर्चाएं गरम हैं। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा द्वारा कांतिलाल भूरिया को पीसीसी चीफ के लिए परफेक्ट बताने के बयान के बाद नेताओं के रिएक्शन तेज हो गये हैंं। मंत्री पीसी शर्मा पार्टी में भूरिया की नई भूमिका को लेकर सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से बचते दिखे। तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इस बारे में फैसला मुख्यमंत्री कमलनाथ को करना है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ करेंगे फैसला।
बहरहाल झाबुआ में जीत हासिल कर कांग्रेस ने संख्या गणित में भले ही मजबूती हासिल कर ली हो लेकिन भूरिया की नई पारी को लेकर कांग्रेस में संकट के हालात जरूर खड़े हो गये हैं। यदि कांग्रेस नेताओं के झाबुआ में दिए गये बयानों पर अमल होता है तो कांतिलाल भूरिया को सत्ता में भागीदार बनाया जाएगा लेकिन यदि सिंधिया, अजय सिंह और दूसरे नेताओं की पीसीसी चीफ को लेकर की जा रही दावेदारी को कमजोर किया जाना है तो भूरिया को प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जा सकती है लेकिन कांग्रेस के इस सीनियर लीडर की नई भूमिका को लेकर अब गेंद मुख्यमंत्री कमलनाथ के पाले में है और उम्मीद इसको लेकर है कि 31 अक्टूबर को विधानसभा में विधायक पद की सदस्यता के बाद पार्टी इस मामले को लेकर कोई बड़ा फैसला जरूर ले लेगी।

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