Wednesday, 25 September 2019

प्रदेश में अब महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे ना होकर अप्रत्यक्ष तरीके से होगा।


भोपाल: मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने आज बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव को मंज़ूरी दे दी है. इसके बाद अब महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से किया जाएगा.
भोपाल में आज कमलनाथ कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले पर कैबिनेट ने मोहर लगा दी. इस बदलाव के बाद प्रदेश में महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे ना होकर अप्रत्यक्ष तरीके से होगा. यानि जनता सीधे महापौर को नहीं चुन पाएगी. पार्षदों के ज़रिए महापौर और अध्यक्ष चुने जाएंगे.

गौरतलब है कि पिछले 20 साल से जनता सीधे वोट देकर अपने नगर पालिका अध्यक्ष एवं महापौर का चुनाव करती आई है परंतु अब ऐसा नहीं कर पाएगी। कमलनाथ कैबिनेट ने तय किया है कि 20 साल पहले जैसा होता था वही फिर से किया जाएगा। जनता पार्षदों को चुनेगी और पार्षद महापौर या अध्यक्ष को।

प्रदेश में अगले साल मार्च के महीने में निकायों के चुनाव संभावित है। 
फिलहाल प्रदेश के नगरीय निकायों में आम चुनाव के जरिए जनता वोट कर महापौर या अध्यक्ष को चुनती है। नई व्यवस्था लागू करने के लिए मध्यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। प्रदेश में अगले साल मार्च के महीने में निकायों के चुनाव संभावित है। अब यह देखना दिलचस्प होगा की उन लोंंगो की क्या प्रतिकृया आती है, जो लोग आने वाले निकाय चुनाव के लिये पूरी तैयारी कर के बैठे थे।

20 साल पहले पार्षदों की खरीद फरोख्त रोकनें के लिये प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव करानें का निर्णय लिया गया था।
20 साल पहले तय हुआ था कि अप्रत्यक्ष प्रणाली से नगर पालिका अध्यक्ष या महापौर का चुनाव होना गलत है।
अप्रत्यक्ष प्रणाली की सबसे बड़ी खामी यह होती है कि चुनाव जीतकर आए पार्षदों की खरीद फरोख्त शुरू हो जाती है। सरकार के पास ऐसा कोई फार्मूला नहीं हो जो वो पार्षदों की खरीद फरोख्त जैसे गंभीर अपराध को रोक पाए,  और जो व्यक्ति करोड़ों खर्च करके महापौर बनेगा, यह यह स्वभाविक नहीं होगा वो निवेश की गई रकम का 10 गुना कमाने की कोशिश नहीं करेगा।

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