Monday, 23 September 2019

जन्मदिन विशेष: अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष रहते हुये तत्कालीन भाजपा सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरा और कांग्रेस की सरकार में वापसी की नीव रखी।

मध्‍यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और राज्‍य विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह " राहुल" का आज जन्मदिन है।
अजय सिंह का जन्‍म 23 सितंबर 1955 को इलाहाबाद में हुआ था। अजय सिंह प्रसिद्ध कांग्रेस नेता श्री कुंवर अर्जुन सिंह के पुत्र हैं। अर्जुन सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री तथा पंजाब के राज्यपाल भी रह चुके हैं। 


अजय सिंह, ये साली जिन्दगी, जिस्म-2, मैं तेरा हीरो और मोहन जोदाडो जैसी बॉलीवुड फिल्मों से अपनें अभिनय का लोहा मनवा चुके, अभिनेता अरुणोदय सिंह के पिता हैं।



शिक्षा।

अजय सिंह ने अपनी शुरूआती पढ़ाई भोपाल मे कैंपियन स्कूल से पूरी की थी वे वर्ष 1971-72 के दौरान कैंपियन स्‍कूल के कैप्‍टन भी रह चुके हैं। इसके बाद वो दिल्ली आ गये और श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय से बी.ए. (अर्थशास्‍त्र) आनर्स किया उसके बाद उन्होंने 1976-77 में भोपाल विश्‍वविद्यालय से एम.ए. (अर्थशास्‍त्र) में किया और गोल्‍ड मेडल भी प्राप्त किया। इसके अलावा अजय सिंह 1971 में सर्वश्रेष्‍ठ एनसीसी सदस्‍य चुने गए तथा 1972 में इंटरस्‍कूल डिबेट कॉम्पीटिशन की ट्रॉफी जीती। 

राजनीतिक करियर।
अजय सिंह मध्यप्रदेश राजनीति का जाना-माना चेहरा हैं। वह छह बार लगातार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। 
    
पहली बार 1985 के उप चुनाव मे चुरहट से विधायक बनें।         
1985 मे अजय सिंह पहली बार मध्यप्रदेश के सीधी जिले की चुरहट विधानसभा से उपचुनाव जीत कर पहली बार विधायक बनें,यह सीट उनके पिता कुं.अर्जुन सिंह के पंजाब के राज्यपाल बन जानेंं के बाद खाली हुई थी।
           
दूसरी बार 1991 में फिर उपचुनाव जीत कर विधायक बनें
1991 मे अजय सिंह दूसरी बार मध्यप्रदेश के सीधी जिले की चुरहट विधानसभा से दुबारा उपचुनाव जीत कर दूसरी बार विधायक बनें, यह सीट उनके पिता कुं.अर्जुन सिंह के केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बन जानें के बाद खाली हुई थी।        


1998 में उन्हें तीसरी बार विधायक चुना गया।     
1998 में मध्यप्रदेश मे हुये विधानसभा चुनाव में उन्होनें सीधी जिले की चुरहट विधानसभा से भाजपा के कद्दवार नेता गोविंद प्रसाद मिश्रा को हराकर तीसरी बार विधायक बनें।            


मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनें।
1998 में उन्हें तीसरी बार विधायक चुना गया और मध्यप्रदेश सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पर्यटन और संस्कृति विभागों के कैबिनेट मंत्री बन गए।जब शाइनिंग इंडिया का दौर चल रहा था। केंद्र में वेंकैया नायडू पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री थे।उस वक्त अजय सिंह मध्य प्रदेश में भी पंचायत मंत्री थे।प्रदेश में अजय सिंह का मॉडल बहुत फेमस हुआ था।जिससे प्रभावित होकर श्री नायडू ने उसे समझने के लिए अजय सिंह को आमंत्रित किया गया था, और अजय सिंह से मुलाकात की थी।


2003 में चौथी बार विधायक चुनें गये।
2003 में मध्यप्रदेश मे हुये विधानसभा चुनाव में उन्होनें सीधी जिले की चुरहट विधानसभा से भाजपा के कद्दवार नेता गोविंद प्रसाद मिश्रा को हराकर तीसरी बार विधायक बनें।


2008 में पांचवी बार मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए।
2008 में मध्यप्रदेश मे हुये विधानसभा चुनाव में उन्होनें सीधी जिले की चुरहट विधानसभा से भाजपा के अजय प्रताप सिंह को हरा कर विधायक बनें। अजय प्रताप सिंह बर्तमान में मध्य-प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं।


2011 में पहली बार मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुने गए।
15 अप्रैल, 2011 को मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुने गए थे। नेता प्रतिपक्ष रहते हुये उन्होनें तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरा, और सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर भी आये, लेकिन ऐन वक़्त पर कांग्रेस के ही विधायक चौधरी राकेश सिंह के भाजपा के पक्ष में चले जानें से शिवराज सिंह सरकार बचानें मे कामयाब हो गये।


2013 में छठी बार विधायक बने।                  
2013 में मध्यप्रदेश मे हुये विधानसभा चुनाव में उन्होनें सीधी जिले की चुरहट विधानसभा से भाजपा के शर्देँदु तिवारी को हरा कर विधायक बनें। वर्तमान मे शर्देँदु तिवारी चुरहट से भाजपा विधायक हैं।


2017 को वह दूसरी बार विपक्ष के नेता चुनें गये।      
27 फरवरी, 2017 को वह दूसरी बार विपक्ष के नेता के रूप में चुने गये, और दिसंबर 2018 में कांग्रेस सरकार बननें तक वो नेता प्रतिपक्ष रहे।


व्यापम घोटाले को सदन से सड़क तक ले आये।       
नेता प्रतिपक्ष रहते हुये अजय सिंह नें, व्यापम घोटाले के मुद्दे पर तत्कालीन शिवराज सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरा। व्यापम घोटाले को व्यापक तरीके से उठाने और तत्कालीन सरकार को उस पर कार्यवाही करने के लिये मजबूर करनें का श्रेय अजय सिंह को ही जाता है।


अजय- अरूण की जोड़ी नें कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार किया
साल 2018 में अजय सिंह नें तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष अरूण यादव के साथ मिलकर प्रदेश भर में यात्रा कर कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार किया। बाद मे कमलनाथ के पीसीसी चीफ़ बननें पर अजय सिंह ने कमल नाथ के साथ मिलकर प्रचार अभियान की कमांन संभाली और कांग्रेस की प्रदेश में वापसी हुई।हला की 2018 का चुनाव अजय सिंह और अरुण यादव दोनों लोग हार गये, लेकिन पार्टी की इस जीत का श्रेय पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव और नेता प्रतिपक्ष रहे अजय सिंह को भी जाता है।वे चुनाव जरूर हार गए, लेकिन पार्टी की सरकार बनाने में उनके त्याग को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

अजय सिंह के हार के साथ जुड़ा है, अजब संयोग।
अजय सिंह के साथ एक अजब सा संयोग यह भी है कि विपक्ष में रहने के बाद वे जब-जब चुनाव हारते हैं प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है। वर्ष 1990 से 1993 तक विपक्ष में रहने के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को घेरने के लिए चुरहट की बजाय भोजपुर से चुनाव लड़ा था। पटवा ने उन्हें चुनाव तो हरा दिया, लेकिन बहुमत ला पाने में सफल नहीं हो पाए थे। ठीक इसी तरह विपक्ष के नेता होनें की वजह से 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नें अपना पूरा जोर अजय सिंह के प्रभाव वाले विंध्य क्षेत्र में लगा दिया, जिससे अजय सिंह सहित विंध्य से आने वाले कई दिग्गज चुनाव हार गये लेकिन कांग्रेस सरकार बनानें मे सफल हो गयी।

अजय सिंह की हार पर जब अरुण यादव हुये भावुक।


2018 के विधानसभा चुनाव मे अजय सिंह के हार के बाद एक बेहद भावुक दृश्य देखने में आया जब अजय सिंह से मिलने पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के आंसू निकल आए। भावुक हुए अरुण यादव को अजय सिंह और आसपास के लोगों ने सांत्वना दी।
दरअसल भोपाल में अजय सिंह से अरुण यादव जब मिले तो उनकी आंखों में आंसू आ गए।अजय -अरुण की जोड़ी  नें तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ काफी संघर्ष किया जिसकी बदौलत सूबे में कांग्रेस की सरकार बनीं पर अजय सिंह की हार ने अरुण यादव को भावुक कर दिया।


अजय सिंह के लिए सीट छोड़ने को तैयार हुये थे, दर्जनभर विधायक।
नरसिंहपुरगाडरवारा से नव निर्वाचित कांग्रेस विधायक सुनीता पटेल चुरहट से पराजित हुए नेता प्रतिपक्ष रहे अजय सिंह के लिए अपनी सीट छोड़ने तैयार थी। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। साथ ही एक दर्जन विधायकों ने भी उनके लिए सीट छोड़ने की पेशकश की थी। इसमें चित्रकूट के विधायक नीलांशु चतुर्वेदी, चांचोड़ा के विधायक लक्ष्मण सिंह, गाडरवाड़ा विधायक सुनीता पटेल और छतरपुर के आलोक चतुर्वेदी, सुरेन्द्र सिंह और विनय सक्सेना आदि विधायकों ने कमलनाथ को चिट्ठी लिखकर इस्तीफे की पेशकश की थी।

चुनाव हारे पर लोकप्रियता कम नही हुई।
अजय सिंह आज भी उतनें ही लोकप्रिय है, इस बात का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की आज भी चाहे भोपाल हो या चुरहट अजय सिंह से मिलनें के लिये पार्टी कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता  का जमावड़ा आज भी लगा रहता है, आज चुनाव हारनें के बाद भी अजय सिंह लोंगों से उतनी ही सिद्दत से मिलतें है, जैसे की विधायक रहते मिलते थे।

राजनैतिक बिरोधियों से भी अजय सिंह के मधुर संबंध।

अजय सिंह का विपक्षी पार्टियों के लोंगों से भी बड़े गर्मजोशी से मिलतें है, और सब का हाल चाल जानतें रहतें है, उनका कहना है की उनका विरोध सिर्फ राजनैतिक है, व्यक्तिगत नही। ऐसा ही एक उदहारण 2019 के लोकसभा चुनाव के वक़्त देखनें को मिला था, जब उनके धुर राजनैतिक विरोधी, सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला की तवियत अचानक खराब हो गयी, और अजय सिंह जो सीधी लोकसभा से खुद प्रत्यासी थे, अपना दौरा तत्काल रद्द कर श्री शुक्ला से मिलनें पहुंचे और उनके स्वास्थ्य के बारे मे जाना।


चुरहट विधानसभा से हमेशा उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले गोविंद प्रसाद मिश्रा से भी उनके मधुर संबंध है।


अजय सिंह की पहचान ,एक जमीन से जुड़े हुये नेता की।
अजय सिंह एक जमीन से जुड़े हुये नेता है, और अपनें क्षेत्र और क्षेत्र के लोंगों से गहरा संबंध रखतें है, और उनके सुख और दुख मे हमेशा शरीक होतें है।
अजय सिंह का कार्यक्रम चाहे कितना भी व्यस्त क्युं ना हो, वो हर महीनें अपनें क्षेत्र का दौरा जरुर करतें है।
वों भोपाल के अपने सरकारी आवास में हो या फिर चुरहट के अपनें पैतृक निवास पर सभी से बराबर मिलते हुये उनकी समस्याओं के बारें में जानते हुये उसका निदान करनें का प्रयास करतें हैं।


धर्म के प्रति अजय सिंह की गहरी आस्था ।
अजय सिंह अपनें धर्म के प्रति गहरी आस्था के साथ साथ दुसरे धर्मों का भी उतना ही सम्मान करतें है।

श्री सिंह, आचार्य महा मंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरि महराज से गहरी आस्था रखतें हैं।


अजय सिंह, महाकालेश्वर उज्जैन, शारदा मन्दिर मैहर, चित्रकूट धाम के साथ साथ प्रयागराज से आस्था रखते हुये हिंदू त्यौहारों पर यहा आशीर्वाद लेनें जरुर पहुंचते है।


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