Thursday, 10 June 2021

कौन हैं चौधरी राकेश सिंह? जिनको लेकर कांग्रेस में मचा है घमासान।



भोपाल: मध्यप्रदेश में संगठन की मजबूती के लिये प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में 56 जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति की है। जिसको लेकर अब पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति पैदा हो गई है। सबसे जादा विवाद रीवा जिले की कमान BJP से कांग्रेस में शामिल हुए चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को सौंपनें को लेकर है। चौधरी राकेश सिंह को लेकर पूरे विंध्य क्षेत्र में घमासान मचा हुआ है। पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना की जो व्यक्ति विधानसभा का उपनेता प्रतिपक्ष रहते हुये, चलते सदन में पार्टी को धोखा देकर भाजपा के खेमें मे चला गया हो वह कार्यकर्ताओं को क्या सिखाएगा।


आइये जानतें हैं, कौन है चौधरी राकेश सिंह।

बता दें की ये वही चौधरी राकेश सिंह हैं जिन्होनें वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेेेस द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के बीच भरे सदन में उपनेता प्रतिपक्ष रहते हुये अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान करते हुये अविश्वास प्रस्ताव को गिरा दिया था और भाजपा का दामन थाम लिया था।


वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ तत्कालीन नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था उस दौरान चलते विधानसभा सत्र में उपनेता रहे चौधरी राकेश ने कह दिया था कि वे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करते हैं। इस तरह कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था, और राकेश ने भाजपा का दामन थाम लिया था। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके छोटे भाई मुकेश चौधरी को मेहगांव से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए थे। 2018 में फिर भाजपा ने राकेश को भिंड से टिकट दिया जहां से वे हार गए थे उसके बाद से ही वे कांग्रेस में आने के लिए प्रयासरत थे।


सिंधिया समर्थक मानें वाले चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया की वजह से फिर से कांग्रेस में हुई थी वापसी।

मध्यप्रदेश के इतिहास में यह एकमात्र घटनाक्रम है जब विधानसभा सत्र के बीच उपनेता प्रतिपक्ष ने अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान किया हो। चौधरी राकेश सिंह ने कांग्रेस को यह झटका दिया था। लेकिन जब भाजपा में उनकी दाल नही गली तो वो वापस कांग्रेस में लौट आए। गौरतलब है की, चौधरी राकेश सिंह को सिंधिया समर्थक नेता माना जाता है। एक बार फिर उन्होंने शिवपुरी में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब लोकसभा का नामांकन भरा था तब चौधरी राकेश भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे।


आखिर कांग्रेस के लिये क्या है, गद्दारी की परिभाषा।

अपनी गलतियों से ना सीखनें का दूसरा नाम ही मध्यप्रदेश कांग्रेस है। आखिर दलबदलुओं कें नाम पर कांग्रेस क्यूं बंटी हुई है। टीम कमलनाथ एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसते हैं और उन्हें गद्दार कहतें हैं, लेकिन यही टीम कमलनाथ  चौधरी राकेश सिंह एवं नारायण त्रिपाठी जैसे लोंगों को गद्दार नही मानती। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यूं। अभी कुछ दिनों पहले भी कांग्रेस नें एक ऐसा ही फैसला लिया और नाथूराम गोडसे के भक्त बाबूलाल चौरसिया की कांग्रेस में वापसी करायी थी। जिसका पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव नें विरोध किया था।

Wednesday, 9 June 2021

पूर्व सीएम कमलनाथ की कोरोना एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट आई निगेटिव, अजय- कमलेश्वर नें की जल्द स्वस्थ होने की कामना।



भोपाल: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की तबीयत बिगड़ने पर बुधवार को उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उनका एंटीजन टेस्ट कराया गया है जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। जांच में हल्का इंफेक्शन पाया गया है। इसके चलते फिर से RT-PCR टेस्ट कराया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व सीएम कमलनाथ को दो-तीन दिन से सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत के बाद रूटीन चेकअप के लिए वे मेदांता गए थे। डॉक्टर्स की पैनल ने एहतियात के तौर पर उन्हें एडमिट होने की सलाह दी। इसके बाद वे भर्ती हो गए। अस्पताल के 15 वें फ्लोर के रूम नंबर 4412 में उनका इलाज डॉक्टर आदर्श जायसवाल की देखरेख में चल रहा है। डॉक्टर जायसवाल ने बताया कि कमलनाथ की हालत अभी स्थिर है।


मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह एवं पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। अजय सिंह नें कहा की, "मध्यप्रदेश काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मा.श्री कमलनाथ जी के अस्वस्थ होने का समाचार प्राप्त हुआ है। आपके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।"  वहीं पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल नें कहा की, "मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी के अस्वस्थ होने के समाचार से मन ठीक नही है। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें शीघ्र स्वस्थ कर उत्तम आयु प्रदान करने की कृपा करें।"

अजय सिंह की कार्यकर्ताओं से अपील: कहा- बेवजह बयानबाजी न करें, संगठन को प्रभावी और मजबूत करने के लिये काम करें।



  • कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का विंध्य को लेकर दिया गया बयान एक सहज अभिव्यक्ति थी न कि कोई दोषारोपण: अजय।
  • कांग्रेस पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र में असहमति, आपत्ति और उचित सलाह का अर्थ विरोध करना नहीं लगाया जाता: अजय।

भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं से विनम्र अपील की है कि वे ताजा राजनीतिक गतिविधियों के चलते विचलित होकर जल्दबाजी में ऐसी कोई प्रतिक्रिया न करें जिससे कि कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो।  राजनीति धैर्य के साथ ठहरने और देख कर आगे बढ़ने की प्रक्रिया है। इसलिए भावुक होकर अपना विवेक न छोड़ें और ऐसी बयानबाजी न करें जिससे भाजपा को फायदा लेने का कोई मौका मिले।


श्री सिंह ने कहा कि विन्ध्य की तासीर को न समझने वाले इक्का दुक्का जूनियर लोग मुझ पर व्यक्तिगत आक्षेप लगा रहे हैं। इस बहाने वे अपनी महत्वाकांक्षा के चलते राजनीतिक प्रतिबद्धता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे पार्टी को ही नुकसान होगा और भाजपा इसका लाभ लेने की कोशिश करेगी। एकता में ही हमारी ताकत है। कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता से मेरा आग्रह है कि वे किसी उकसावे में न आयें। इसके पीछे छिपी साजिश का आकलन करें और संगठन को प्रभावी और मजबूत करने के लिए पहले की तरह काम करते रहें।


अजय सिंह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि जहाँ तक कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के बयान का सवाल है, वह एक सहज अभिव्यक्ति थी न कि कोई दोषारोपण। फिर भी मैंने आप सबकी ओर से असहमति, आपत्ति और भावनाएं उन्हें व्यक्त कर दी हैं कि आपके कहने का कांग्रेस कार्यकर्ताओं में कहीं न कहीं विपरीत सन्देश गया है। इससे भाजपा को मौका मिलेगा। मैं आज भी कह रहा हूँ कि पिछले चुनाव में विन्ध्य के कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं ने जी तोड़ मेहनत की थी, भले ही परिणाम विपरीत आये हों।  


श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र में असहमति, आपत्ति और उचित सलाह का अर्थ विरोध करना नहीं लगाया जाता। लेकिन विन्ध्य के साथ साथ प्रदेश के कुछ कार्यकर्ता इस घटनाक्रम पर जिस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं उससे भाजपा  वाले कांग्रेस में आंतरिक विरोध शुरू होने का प्रचार कर रहे हैं, जो कि पार्टी के लिए नुकसानदायक है। इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता से आग्रह करता हूँ कि वे शांत रहें। जहाँ तक कांग्रेस प्रभारियों की नियुक्तियों का मामला है उस पर कांग्रेस का बयान आ चुका है कि जहाँ कहीं से भी विसंगति की शिकायतें आ रही हैं वहां पुनर्विचार किया  जायेगा। इसलिए आप सभी कृपया धैर्य से काम लें। कांग्रेस के गौरवशाली इतिहास को बनाये रखना प्रत्येक कांग्रेसी की जिम्मेदारी है।

MP कांग्रेस में कुछ भी ठीक नहीं, अजय सिंह के बाद सज्जन वर्मा नें भी दी कमलनाथ को नसीहत।



भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस में इस समय कुछ भी ठीक नही चल रहा और वरिष्ठ नेताओं की आपसी बयानबाज़ी जारी है। अभी हाल में ही मैहर दौरे पर आये पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था की अगर 2018 के विधानसभा चुनाव मे यदि विंध्य से जादा सीटें आती तो हमारी सरकार नही गिरती। पूर्व सीएम कमलनाथ के इस बयान पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुये कहा था की सरकार तो बन गयी थी लेकिन चल नही पायी, इसके लिये विंध्य को दोष देना उचित नही है। अजय सिंह के इस बयान को लेकर चारों तरफ घमासान मच गया था।


अब कमलनाथ को सज्जन वर्मा का सुझाव।

अभी तक पूर्व सीएम कमलनाथ एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सिंह के बयानों की आग ठण्डी भी नही हुई थी की अब कमलनाथ को लेकर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का बयान सामने आ गया जिसको लेकर राजनैतिक गलियारों मे कई तरह के मायने निकाले जा रहें हैं। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने पूर्व सीएम कमलनाथ को सुझाव देते हुये कहा की अब उन्हें पार्टी अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष मे से एक पद छोड़ देना चाहिए और दूसरे लोगों को मौका देना चाहिए। साथ ही उन्होनें कहा की जो कार्यवाहक अध्यक्ष काम नही कर पाये हैं उन्हें बदल देना चाहिए। सज्जन वर्मा ने ये भी कहा की कांग्रेस में दूसरी लाईन के नेताओं को जिम्मेदारी देने की दरकार है, अगर ऐसा नही किया गया तो पार्टी मजबूत नही होगी और आगे चलकर बहुत दिक्कतें आ सकती है।


कमलनाथ के बयान के बाद क्या बोले थे अजय सिंह।

3 जून को सतना दौरे पर आए मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह से पत्रकारों ने कमलनाथ के विंध्य वाले बयान का जवाब मांगा था। तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह ने कहा था की सरकार विंध्य की वजह से नही गिरी थी, उनका कहना था की सरकार सिंधिया एवं उनके समर्थक विधायकों के पार्टी छोड़नें की वजह से गिरी थी। भारत विश्व में हो रहा बदनाम के सवाल पर अजय सिंह ने कहा था की, चाहे कमलनाथ हो या अजय सिंह सबको संयम रखने की जरूरत है।

पूर्व सीएम कमलनाथ की तबियत बिगड़ी, गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पीटल में भर्ती।



भोपाल: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की तबियत बिगड़ गयी है। उन्हें गुरुग्राम के निजी अस्पताल मेदांता में भर्ती किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्हें बुखार और सिर में दर्द की शिकायत है। वो रुटीन चैकअप के लिए अस्पताल गए थे जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया।


बताया जा रहा है की पूर्व सीएम कमलनाथ बुधवार सुबह छाती में दर्द की शिकायत के साथ साथ बुखार एवं सर में दर्द भी था। जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल वरिष्ठ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।

चौधरी राकेश सिंह को लेकर कांग्रेस में अंतर्कलह जारी, प्रदेश सचिव नें पूंछा- आखिर क्या है गद्दारी की परिभाषा?



सीधी: मध्यप्रदेश में संगठन की मजबूती के लिये प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में 56 जिलों में प्रभारियों की नियुक्ति की है। जिसको लेकर अब पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति पैदा हो गई है। सबसे जादा विवाद रीवा जिले की कमान BJP से कांग्रेस में शामिल हुए चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को सौंपनें को लेकर है। चौधरी राकेश सिंह को लेकर पूरे विंध्य क्षेत्र में घमासान मचा हुआ है। पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना की जो व्यक्ति विधानसभा का उपनेता प्रतिपक्ष रहते हुये, चलते सदन में पार्टी को धोखा देकर भाजपा के खेमें मे चला गया हो वह कार्यकर्ताओं को क्या सिखाएगा।


प्रदेश कांग्रेस सचिव नें भी खड़े किये सवाल।

चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को रीवा जिले का प्रभारी नियुक्त किये जाने पर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के आईटी एवं सोशल मीडिया सचिव अरुण सिंह 'चिन्टू' नें सवाल करते हुये कहा- "आखिर क्या है गद्दारी की परिभाषा?? एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसा जाता हैं और उन्हें गद्दार कहा जाता हैं, लेकिन दूसरी तरफ चौधरी राकेश सिंह  को सर आँखों पर बैठाया जा रहा है, जो चलते सदन में विश्वासघात कर भाजपा की गोद बैठ गये थे। यह दोहरा मापदंड क्यूं??"


आइये जानतें हैं, कौन है चौधरी राकेश सिंह और किस समय उन्होनें कांग्रेस छोड़ी थी।

बता दें की ये वही चौधरी राकेश सिंह हैं जिन्होनें वर्ष 2011-12 में भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेेेस द्वारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव के बीच भरे सदन में उपनेता प्रतिपक्ष रहते हुये अपनी ही पार्टी से इस्तीफे का ऐलान करते हुये अविश्वास प्रस्ताव को गिरा दिया था और भाजपा का दामन थाम लिया था।


आखिर कांग्रेस के लिये क्या है, गद्दारी की परिभाषा।

अपनी गलतियों से ना सीखनें का दूसरा नाम ही मध्यप्रदेश कांग्रेस है। आखिर दलबदलुओं कें नाम पर कांग्रेस क्यूं बंटी हुई है। टीम कमलनाथ एक तरफ तो सिंधिया एवं उनके समर्थकों को पानी पी पी कर कोसते हैं और उन्हें गद्दार कहतें हैं, लेकिन यही टीम कमलनाथ  चौधरी राकेश सिंह एवं नारायण त्रिपाठी जैसे लोंगों को गद्दार नही मानती। आखिर यह दोहरा मापदंड क्यूं। अभी कुछ दिनों पहले भी कांग्रेस नें एक ऐसा ही फैसला लिया और नाथूराम गोडसे के भक्त बाबूलाल चौरसिया की कांग्रेस में वापसी करायी थी। जिसका पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव नें विरोध किया था।

Sunday, 2 May 2021

दमोह उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन चुनाव जीते, भाजपा प्रत्याशी अपना ही बूथ हारे।



दमोह उपचुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन चुनाव जीत चुकें हैं। मतगड़ना के 26वां राउंड खत्म होते ही मध्य प्रदेश के दमोह उपचुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन बीजेपी प्रत्याशी राहुल लोधी से 15 हजार से ज्यादा वोटों से जीत गए है।


दरअसल, दमोह उपचुनाव के लिए 17 अप्रैल को वोटिंग समाप्त हुई थी, जिसके बाद आज 2 मई को मतगणना की गई। इसमें शुरुआत से ही अजय टंडन आगे चल रहे थे, हालांकि 20वें राउंड के बाद राहुल लोधी ने बढ़त बनाई लेकिन 24-25-26वें राउंड में फिर पीछे हो गए। यहां 59.81% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।


बता दें की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत तमाम बड़े दिग्गज नेताओं के प्रचार प्रसार के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन जीत हासिल करने में कामयाब हुए। वही कांग्रेस पूर्व मंत्री जयंत मलैया के घर में सेंध लगाने में कामयाब हुई। भाजपा के जयंत मलैया अपना ही पोलिंग नंबर 134 नहीं जितवा पाए।


भाजपा प्रत्याशी अपना ही बूथ हारे।

जहां भाजपा के जयंत मलैया अपना ही पोलिंग नंबर 134 नहीं जितवा पाए। वहीं गांव खेरूआ के रहने वाले राहुल सिंह लोधी अपना ही गृह मतदान केंद्र हार गए हैं। मतदान केंद्र क्रमांक 12 पर कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन को 206 वोट मिले, जबकि राहुल सिंह को केवल 108 । वे यहां 98 वोट से अपने ही गांव में बूथ हार गए।

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