Thursday, 4 March 2021

दंतेवाड़ा में हुए IED ब्लास्ट में रीवा का लाल शहीद, अजय सिंह ने जताया दुख।


रीवा: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में गुरुवार की दोपहर हुए IED ब्लास्ट में रीवा के एक जवान की शहादत की खबर है। मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें जवान की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। श्री सिंह नें कहा- छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में रीवा जिले के ग्राम बरछा निवासी श्री लक्ष्मीकांत द्विवेदी के शहीद होने का समाचार अत्यंत दुःखद है। वे दंतेवाड़ा में सी ए एफ की 22 वीं बटालियन में पोस्टेड थे। परमात्मा दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोकाकुल परिजनों को दुःख सहने की शक्ति दे।ॐ शांति।


बता दें कि रीवा के लाल हेड कांस्टेबल लक्ष्मीकान्त द्विवेदी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों द्वारा प्लांटेड प्रेशर बम की चपेट में आने से शहीद हो गए। घटना गीदम थाना क्षेत्र के पाहुरनार की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ये ब्लास्ट जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर हुआ है। सूचना मिलते ही फोर्स मौके पर पहुंची और सर्चिंग शुरू की।


मिली जानकारी के अनुसार, इंद्रवती नदी पर पुल निर्माण कार्य चल रहा है। जिसमें 22वीं बटालियन के जवानों को सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात किया गया है। CAF हेड कांस्टेबल लक्ष्मीकांत द्विवेदी भी वहीं पर तैनात थे। वह करीब 12.30 बजे एक पेड़ के नीचे खाना खाने के लिए बैठे, जैसे ही उन्होंने खाना शुरू किया, तभी IED ब्लास्ट हो गया। ब्लास्ट इतना जबरदस्त था कि जवान लक्ष्मीकांत के शरीर के चिथड़े उड़ गए।


ये विस्फोट जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर हुआ है। जहां नक्सलियों ने पहले से ही मौके पर 5 किलो का टिफिन बम लगाया हुआ था। जिसकी चपेट में जवान लक्ष्मीकांत आ गए।

सीधी: म.प्र. के पूर्व सीएम स्व. कुंवर अर्जुन सिंह की पुण्‍यतिथि आज, जानें उनसे जुड़ी हुई कुछ यादें।



सीधी/ चुरहट: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के दिग्गज राजनेता स्व. कुंवर अर्जुन सिंह का जन्म 5 नवंबर 1930 को हुआ था और 4 मार्च 2011 यानी आज के दिन ही राज्यसभा सदस्य रहते हुए वो इस दुनिया को अलविदा कह गए। सीधी CHRONICLE उन्हें याद करते हुये, उनकी जिंदगी से जुड़े हुये कुछ तथ्य साझा कर रहा।


बता दें अर्जुन सिंह को लोग बड़े प्यार से दाऊ साहब कहते थे। 1952 में मध्यप्रदेश के चुरहट से राजनीति के शुरूआत की थी। तीन बार मध्यप्रदेश  के मुख्यमंत्री रहे, केंद्र में कई अहम पदों पर भी रहे।


निर्दलीय चुनाव लड़कर, राजनीति की शुरूआत की।

अर्जुन सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत किसी पार्टी के सहारे नहीं अपने बल पर शुरू की थी।साल 1952 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इलेक्शन कैंपेन के दौरान अर्जुन सिंह के पिता राव शिवबहादुर सिंह को इलेक्शन कैंडिडेट के तौर पर घोषित किया था। लेकिन रीवा पहुंचने के बाद नेहरू ने अपनी स्पीच में ये कह दिया कि उनकी पार्टी से कोई कैंडिडेट नहीं है। इसके बाद अर्जुन सिंह के पिता निर्दलीय इलेक्शन लड़े लेकिन वो उस वक्त जीत नहीं पाए। जिसका अर्जुन सिंह पर गंभीर असर हुआ। और इसी अपमान का बदला लेने के लिए वे व्यक्तिगत तौर पर राजनीति में आ गए और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।


जब पहली बार बने विधायक।

अर्जुन सिंह अपने पिता का बदला लेने के लिए राजनीति में सक्रिय हो गए। साल 1957 में अर्जुन सिंह कांग्रेस का टिकट लेने के लिए तैयार नहीं हुए और कांग्रेस से अपनी हार का बदला लेने के लिए निर्दलीय उमीदवार के रूप में विधानसभा  चुनाव लड़े और विधायक बनें।


जब नेहरू ने अर्जुन सिंह को बुलाया दिल्ली।

अब अर्जुन सिंह विधायक बन चुके थे, और कांग्रेस के इस मिथक की "यदि कांग्रेस किसी को लैंप-पोस्ट टिकट दे तो उसकी जीत पक्की है" को तोड़ने में सफल रहे थे।


साल 1961 में मध्यप्रदेश विधानसभा में एक प्रस्ताव रखा गया कि सभी विधायकों को अपनी सम्पत्ति का सत्यापन करना होगा। इसके बाद अर्जुन सिंह ने नेहरू को एक पत्र लिखा जिससे प्रभावित होकर उन्होंने अर्जुन सिंह को दिल्ली बुला लिया। चर्चा के बाद जब अर्जुन सिंह निकले तो नेहरू से खूब प्रभावित थे और कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा कर दिए।


जब बनें मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष।

1977 में कांग्रेस अल्पमत में आ गई और प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अर्जुन सिंह को बनाया गया। अर्जुन सिंह ने नेता प्रतिपक्ष बनकर जिस तरह से काम किया शायद ही भारतीय राजनीति में ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं। उन्होंने तीन साल नेता प्रतिपक्ष रहते हुए तत्कालीन जनता सरकार के तीन सीएम बदलने पर मजबूर कर दिए थे। जिसमें कैलाश जोशी , वीरेंद्र सकलेचा और सुंदरलाल पटवा शामिल हैं। इस बाद राष्ट्रपति लागू होने के बाद इलेक्शन कराए गए। जिसमें कांग्रेस बहुमत में आ गयी।


तीन बार रहे मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री।

समय बदला, अर्जुन सिंह इंदिरा और संजय के करीबी होने लगे। इंदिरा दतिया के मंदिर गईं तो भोपाल में अर्जुन सिंह के यहां रुकीं। संजय गांधी चुनाव प्रचार के लिए चुरहट तक गए। 1980 आया, कांग्रेस चुनाव जीती। विधायक दल का नेता चुनने के लिए बड़े-बड़े नाम आये।केपी सिंह, विद्याचरण शुक्ला, प्रकाशचंद सेठी, शिवभानु सिंह सोलंकी और अर्जुन सिंह, अभी के मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम भी था लेकिन उन्होंने अपने वोट और अपना साथ अर्जुन सिंह को दे दिया था। मुख्यमंत्री  चुनने का दूसरा दौर चला। पर्यवेक्षक के तौर पर आये प्रणव मुखर्जी की उपास्थिती में मतपेटी में वोट डाले गए।मतपेटी को दिल्ली मंगवा लिया गया।इसके बाद तमाम विरोधी अटकलों के बीच अर्जुन सिंह को कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री बनाया। साल 1980 में पहली बार वे मुख्यमंत्री बने।  इसके बाद उन्होंने दूसरी बार एक साल और तीसरी बार भी एक साल मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली।


जब उन्हें बनाया गया पंजाब का राज्यपाल।

मप्र के मुख्यमंत्री रहते हुए राजीव गांधी द्वारा अर्जुन सिंह को पंजाब का राज्यपाल बनाया गया। उस समय पंजाब की हालत अत्यंत दयनीय थी। राजनीतिक विष्लेशकों की मानें तो अर्जुन सिंह को पंजाब का राज्यपाल उन्हें परास्त करने के लिए बनाया गया था। उन दिनों पंजाब में गदर मारपीट मची हुई थी। किंतु अर्जुन के माथे पर चिंता की लकीरे नहीं देखी गई।


जब अर्जुन सिंह नें कहा, चिंता की जरूरत नहीं।

उनके द्वारा सीधी से पंजाब के लिए रवाना होते समय उपस्थित जनसमुदाय से बस इतना कहा गया था कि जिंदा रहे तो जल्द आप लोगों के बीच आएंगे, कोई चिंता की जरूरत नहीं है। उनके इस बोल से लोगों के आंखों में आंसू तैरने लगा था। अर्जुन सिंह अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए आतंकवाद से झेल रहे पंजाब में जल्द ही राजीव-लोगोवाल समझौता कराकर पंजाब में शांति बहाल कराई गई। इस ऐतिहासिक कार्य के लिए उस दौर में अर्जुन सिंह को भारत रत्न पुरस्कार देने की भी मांग उठी थी।


फिर केंद्र की राजनीति में हुये सक्रिय।

नई दिल्ली की लोकसभा सीट तत्कालीन सांसद की मौत होने से खाली हो गई थी। अर्जुन सिंह को वहां से चुनाव लड़ाने का निर्णय कांग्रेस ने लिया। उनके विरोधी कुनबे में खुशी थी कि दिल्ली में बाहरी व्यक्ति बाटर लो साबित होगा। किंतु अर्जुन सिंह दिल्ली के चक्रब्यूह को तोड़कर चुनाव जीतने में सफल रहे तब उन्हें केंद्र सरकार मे संचार मंत्री बनाया गया। उसके बाद राजीव गांधी की हत्या के बाद नरसिंहा राव सरकार में मानव संसाधन मंत्री से नवाजा गया। उसके बाद मनमोहन सिंह सरकार मे मानव संसाधन मंत्री रहे।


एक रोचक किस्सा ये भी "महात्मा गांधी ने पकड़ा तो अर्जुन सिंह ने फिर कभी टाई नहीं पहनी"

अर्जुन सिंह, सामंती खानदान में पैदा हुए, पिता राव शिव बहादुर सिंह चुरहट राव थे, लेकिन अर्जुन सामंती नहीं थे।वे जब सात साल के थे और इलाहाबाद में पढ़ते थे, तब महात्मा गांधी इलाहाबाद आये तो उन्हें देखने गए। गांधी उनके सामने से गुजरे तो अर्जुन सिंह की टाई पकड़ ली। अर्जुन सिंह को लगा महात्मा गांधी को उनका टाई पहनना पसंद नहीं है. अर्जुन सिंह ने उस दिन के बाद टाई नहीं पहनी।10 साल के थे, दशहरे में जाना था, राजसी कपड़े पहनाये जाने लगे लेकिन अर्जुन सिंह ने मना कर दिया। जब वो इलाहाबाद कॉलेज में थे, पिता ने भाइयों में ज़ायदाद बांट दी थी, पता लगा कि उनके इलाके में अकाल पड़ा है तो अर्जुन सिंह ने किसानों का लगान माफ़ कर दिया, पिता बहुत गुस्साए, लेकिन अर्जुन सिंह नही मानें।


अर्जुन सिंह ने जब दुनिया को कहा अलविदा।

विंध्य की माटी के सपूत एक छोटी सी जागीर से जनम लेकर भारत की राजनीति के क्षितिज पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कुंवर अर्जुन सिंह की यादों का अब अवशेष शेष रह गया है। चुरहट जागीर के राव घराने में 5 नवंबर 1930 को जन्में अर्जुन बीमारी के बाद राज्यसभा सदस्य रहते हुए 4 मार्च 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।


अर्जुन सिंह की सेवाभावना, को आगे बढ़ाते उनके पुत्र अजय सिंह।

4 मार्च 2011 को अर्जुन सिंह की दिल्ली में मौत हो गई, लेकिन उनके उनके पुत्र अजय सिंह अपनें पिता के पदचिन्हों पर चलकर आज भी जनता की सेवा में लगे हुये हैं। अजय सिंह मध्यप्रदेश की राजनीति में दिग्गज नेताओं में शुमार है, वे मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। साथ ही वो मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके है।

Wednesday, 3 March 2021

सांसद नंदकुमार चौहान पंचतत्व में विलीन, पूर्व सीएम कमलनाथ एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने दी श्रद्धाजंलि।



खंडवा: खंडवा-बुरहानपुर के भाजपा सांसद एवं पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे नंदकुमार सिंह चौहान का पार्थिव शरीर बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। नंदकुमार सिंह चौहान के पैतृक गांव शाहपुर में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई और वहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया। नंदकुमार सिंह चौहान की अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, जबलपुर सांसद राकेश सिंह, मंत्री उषा ठाकुर, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव सहित अन्य कई बड़े नेता शामिल हुए।


नंदकुमार चौहान, खंडवा से 5 बार के सांसद रहे।

बता दें कि खंडवा-बुरहानपुर से 5 बार के सांसद नंदकुमार सिंह चौहान का मंगलवार को दिल्ली के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था। इसी दिन उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से एयर एंबुलेंस के जरिए भोपाल भाजपा दफ्तर लाया गया। फिर सड़क मार्ग से उनके पैतृक गांव शाहपुर पहुंचाया गया। जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।


पूर्व सीएम कमलनाथ एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने दी श्रद्धाजंलि।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी बीजेपी कार्यालय में पहुंचकर नंदकुमार सिंह चौहान को श्रद्धांजलि दी। कमलनाथ ने कहा कि वह मेरे साथ राजनीतिक क्षेत्र में रहे। संसद में मेरे साथ रहे। मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला. काफी दुखी हूं, इस दुख की घड़ी में ईश्वर उनके परिवार को हिम्मत दे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह नें नंदकुमार सिंह चौहान को श्रद्धांजलि देते हुये कहा- मध्यप्रदेश के कद्दावर राजनेता संसद सदस्य श्री नंदकुमार सिंह चौहान के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। प्रदेश की राजनीति में उनका  बहुत महत्वपूर्ण स्थान था। वे हमेशा अपने सरल और मिलनसार स्वभाव के कारण जाने जाते थे। परमात्मा दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दे और शोकाकुल परिजनों को यह आघात सहने की सामर्थ्य प्रदान करे| ॐ शांति|

अजय सिंह नें बजट को बताया नीरस, कहा- सपने दिखाकर ठगने में माहिर हैं मुख्यमंत्री।



  • नीरस बजट में शिवराज सिंह की दूरदृष्टि और संवेदनशीलता का अभाव: अजय सिंह।
  • युवाओं, कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनर्स को निराश किया: अजय सिंह।
  • राम वनगमन पथ के विकास को भूल गए सीएम शिवराज: अजय सिंह।

भोपाल: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि मध्यप्रदेश के नीरस बजट में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह की दूरदृष्टि और संवेदनशीलता की कमी स्पष्ट दिख रही है। बजट से ज्यादा सरकार पर कर्ज का बोझ है। राम वनगमनपथ के विकास का कोई उल्लेख नहीं है। सरकार बनने के बाद शिवराज सिंह राम को भूल गए। कर्मचारियों और खासकर साढ़े चार लाख पेंशनर्स के कोरोना काल में रोके गए डी.ए. के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है। सभी पेंशनर्स वरिष्ठ नागरिक हैं और कुछ तो बहुत ही बुजुर्ग हैं। कम से कम उनके लिए तो शिवराज सिंह को दया भाव दिखाना था। उन्हें जुलाई, 19 से डी.ए. नहीं दिया जा रहा है। ढलती उम्र के चलते डी.ए. को लेकर सभी चिंतित हैं।


अजय सिंह ने कहा कि अपने स्वभाव के अनुरूप शिवराज सिंह ने बेरोजगारों को फिर से हजारों नौकरियों के सपने दिखाये हैं। बजट में कहा गया है कि ये नौकरियाँ शिक्षा और पुलिस विभाग में दी जाएंगी जबकि हर विभाग में हजारों पद खाली हैं। व्यापम की शिक्षक परीक्षा पास बेरोजगार युवकों और संविदा शिक्षकों को तो अभी तक नियुक्ति नहीं दी गई और शिक्षकों की नई भर्ती का ऐलान कर दिया। यह घोषणाएँ विरोधाभासी हैं। नौकरी की बाट जोह रहे हजारों युवाओं की पथरायी आँखों के सपने बेचने का काम मुखयमंत्री कर रहे हैं।


अजय सिंह ने कहा कि कोरोना योद्धाओं को दस दस हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने की ऊंची ऊंची घोषणाएँ की गई थी लेकिन बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं है। सस्ती और मुफ्त बिजली योजनाओं की सब्सिडी 13 हजार करोड़ रुपए का भुगतान सरकार ने अभी तक नहीं किया है। इस कारण बिजली कंपनियों ने घाटा बताकर बिजली के रेट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। पेट्रोल, डीजल पर वेट नहीं घटाया गया है। पहले ही महंगाई से जूझ रही गरीब जनता हलाकान है।


श्री सिंह नें कहा की,मध्यप्रदेश में मकान, जमीन की रजिस्ट्री शुल्क पूरे देश में सबसे ज्यादा है। इसे भी नही घटाया गया है जिससे रियल स्टेट में घोर निराशा है। जनता को लुभाने के लिए 460 नई सड़कें, 65 पुल और 105 आर.ओ.बी. निर्माण के सपने तो दिखाये गए हैं लेकिन हरेक के लिए एक एक हजार रुपए का टोकन बजट रखा गया है। इसी तरह स्वरोजगार में सब्सिडी का बजट बहुत कम रखा गया है। इसमें केवल 112 करोड़ रुपए का प्रावधान ऊंट के मुंह में जीरा है। कांग्रेस सरकार की किसान कर्ज माफी योजना को बड़ी होशियारी के साथ हाशिये पर डाल दिया गया है। जबकि कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने आठ हजार करोड़ का प्रावधान किया था। कुल मिलाकर बजट के बाद शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री की तरह नहीं बल्कि एक भविष्यवक्ता ज्योतिषी की तरह खड़े दिखाई दे रहे हैं।

सीधी: पूर्व सीएम स्व. अर्जुन सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम 4 मार्च को सीधी में आयोजित।



सीधी: राष्ट्रनायक, जनसेवक, विंध्यधरा के सपूत पू्र्व मुख्यमंत्री, पूर्व राज्यपाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृतिशेष कुंवर अर्जुन सिंह (दाऊ साहब) का परलोक गमन दिनांक 4 मार्च 2011 को नई दिल्ली में हुआ था। जिनकी पुण्यतिथि पर गुरुवार, 4 मार्च को सीधी में स्थापित उनकी प्रतिमा पर शाम 7:00 बजे श्रद्धांजलि दी जायेगी। जिला युवा कांग्रेस सीधी के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह "दादू" नें सीधी नगर के समस्त सम्भ्रांत नागरिकों, युवाओं, माताओं एवं बहनों को स्थानीय अस्पताल चौक सीधी में आयोजित होने वाली उक्त श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने का आग्रह किया है।


साथ ही श्री सिंह एवं युवा कांग्रेस सीधी द्वारा, कांग्रेस के पूर्व विधायक गण, जिला पंचायत सदस्य गण,जनपद पंचायत सदस्यगण, नगर पालिका के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं पार्षद गण, सरपंच गण के साथ ही सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों,  स्थानीय स्तर पर रहने वाल प्रदेश पदाधिकारीगण, जिला कांग्रेस कमेटी सीधी के सभी पदाधिकारियों, ब्लाक, सेक्टर एवं मंडल के सभी पदाधिकारियों, युवा कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारियों, महिला कांग्रेस, सेवा दल, एन‌एस‌यू‌आई, पिछड़ा वर्ग, आईटी एवं सोशल मीडिया सेल एवं अन्य सभी वरिष्ठों, युवाओं, किसानों, व्यापारीयों से आग्रह किया गया है कि 4 मार्च गुरुवार को शाम 7:00 बजे अस्पताल चौराहे पर पधार कर श्रद्धांजलि अर्पित कर दाऊ साहब कों याद करें।


युवा कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह एवं कांग्रेस आईटी सेल प्रदेश सचिव अरुण सिंह "चिन्टू" नें जानकारी देते हुये बताया की, स्व. अर्जुन सिंह की याद में दिनांक 6 मार्च को राव सागर तालाब चुरहट में प्रात 9:00 बजे से श्रद्धांजलि सभा आयोजित है, जिसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह "राहुल" भी उपस्थित रहेंगे। बता दें की अर्जुन सिंह का देहावसान 4 मार्च 2011 को हुआ था, लेकिन उनका पार्थिव शरीर 6 मार्च को चुरहट स्थित रावसागर तालाब लाया गया था और वहीं पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था।


गौरतलब है की विंध्य की माटी के सपूत एक छोटी सी जागीर से जनम लेकर भारत की राजनीति के क्षितिज पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कुंवर अर्जुन सिंह की यादों का अब अवशेष शेष रह गया है। चुरहट जागीर के राव घराने में 5 नवंबर 1930 को जन्में अर्जुन बीमारी के बाद राज्यसभा सदस्य रहते हुए 4 मार्च 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह गए। आज भी भारतीय राजनीति में उन्हे शोषित, दलितों, अल्पसं यकों एवं पिछड़ा वर्ग के लिए संघर्ष व आरक्षण की मांग को लेकर आवाज उठाने वाला राजनेता के तौर पर याद किया जाता है। जिले में उन्हे दाऊ साहब के नाम से ही पुकारा जाता है।

Sunday, 28 February 2021

हिंदू महासभा ने सोनिया, राहुल और कमलनाथ को लिखा पत्र, कहा- कांग्रेस का नाम "गोडसेवादी कांग्रेस" रख लें।



सीधी CHRONICLE: नाथूराम गोडसे के भक्त एवं गोडसे का मंदिर स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले बाबूलाल चौरसिया को कांग्रेस में शामिल करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जहां एक तरफ कांग्रेस इस मसले पर दो धड़ों में बंट गयी है तो वहीं हिंदू महासभा भी कांग्रेस पर हमलावर हो गई। हिंदू महासभा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी व मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ को पत्र लिखे हैं।


पत्र में हिंदू महासभा ने लिखा है कि, अब कांग्रेस में किसी की आस्था नहीं बची है। इसलिए कांग्रेस का नाम बदलकर "गोडसेवादी कांग्रेस" रख दिया जाना चाहिए। आम आदमी कांग्रेस में शामिल नहीं होना चाहता है। यह बात साबित होती है बाबूलाल चौरसिया को गांधीवादी कांग्रेस में शामिल करने से। बाबूलाल ने ग्वालियर में गोडसे का मंदिर स्थापित किया था, इसलिए कांग्रेस कार्यालय में नाथूराम गोडसे का चित्र भी लगा लेना चाहिए।  


दौलतगंज स्थित हिंदू महासभा के कार्यालय से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने बताया कि नाथूराम गोडसे के मंदिर की स्थापना में मुख्य रूप से भूमिका निभाने वाले हिंदू महासभा को नेता बाबूलाल को पार्टी में शामिल करके कांग्रेस ने बता दिया है कि अब आम आदमी कांग्रेस में जाना नहीं चाहता है। इसलिए अब अखिल भारतीय कांग्रेस का नाम बदलकर "गोडसेवादी कांग्रेस" कर देना चाहिए। इस दौरान उन्होंने बाबूलाल चौरसिया के बयानों का भी खंडन किया है, जिसमें उन्होंने धोखे से गोडसे की पूजा कराने की बात कही थी। उनका कहना था कि हर कार्यक्रम में वह सबसे आगे रहते थे।


कांग्रेस में गांधी एवं गोडसे को लेकर घमासान।

गोडसे भक्त बाबूलाल चौरसिया की कांग्रेस में एंट्री पर कांग्रेस में भी घमासान मचा हुआ है। पार्टी अब दो गुटों में बंटती हुई नजर आ रही है। एक चौरसिया के पक्ष में है, दूसरा खिलाफ। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, लक्ष्मण सिंह के बाद दूसरे गुट में शनिवार को पार्टी नेता मानक अग्रवाल भी जुड़ गए। अग्रवाल बोले, 'कमलनाथ बताएं कि वे गांधीवादी विचारधारा के साथ हैं या गोडसे की।'

MP के गृह मंत्री का राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान, कहा- BJP नेता चुनाव प्रचार कर रहे, पप्पू मछली पकड़ रहा !



सीधी CHRONICLE: भारतीय निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सहित चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया। जिसके बाद राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच जुबानी-जंग तेज हो गई है। इसी बीच मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने राहुल गांधी को लेकर एक विवादास्पद बयान दे डाला है।


नरोत्तम मिश्रा ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य भाजपा नेताओं का जिक्र करते हुए राहुल गांधी के ऊपर तंज कसा है। नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया के साथ बातचीत में राहुल गांधी के ऊपर निशाना साधते हुये कहा की, आप अंतर देखो "मोदी जी तमिलनाडु में प्रचार कर रहे हैं, अमित शाह जी पश्चिम बंगाल में हैं, नड्डा जी असम में हैं, राजनाथ जी केरल में हैं और पप्पू मछली पकड़ रहा है, फिर कहेंगे EVM खराब है।"


बता दें की, नरोत्तम मिश्रा बंगाल में बीजेपी की तरफ से चुनाव प्रभारी भी हैं। उनके इस बयान के बाद सियासत गर्म हो गयी है। इससे पहले नरोत्तम मिश्रा ने 8 चरणों में बंगाल चुनाव की तारीखों के ऐलान को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी थी। बंगाल में आधे दर्जन से ज्यादा चरणों में चुनाव को लेकर ममता बनर्जी के बयान पर मिश्रा ने कहा था कि यह निर्वाचन आयोग का फैसला है। ममता बनर्जी, आयोग को संवैधानिक संस्था नहीं मानती हैं। मिश्रा ने आगे कहा था कि केंद्र और चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में तत्काल रिजर्व पुलिसबल की तैनाती करनी चाहिए, ताकि वहां शांतिपूर्ण तरीके से मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके।

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